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विश्व दुग्घ सम्मेलन में जुटेंगे 300 विदेशी प्रतिनिधि

नयी दिल्ली : इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन द्वारा दुग्ध उद्योग पर ग्रेटर नोएडा में 12 सितम्बर से होने वाले चार दिवसीय विश्व डेयरी सम्मेलन- 2022 में दुग्ध उत्पादन से जुड़ी दुनिया भर की अत्याधुनिक तकनीकों से अवगत होने के साथ-साथ भारत से दुग्ध उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने के अवसरों का पता लगाने का मौका मिलेगा।

केन्द्रीय मत्स्य, पशुधन और डेयरी मंत्री परशोत्तम रुपाला ने गुरुवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि इस सम्मेलन में 50 देशों के 300 विदेशी प्रतिनिधियों सहित 1500 प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनमें किसान, दुग्ध सहकारी समितियों के प्रतिनिधि और डेयरी उद्योग से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञ भी भाग लेंगे। विदेशी प्रतिनिधियों में करीब 50 किसान होंगे। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे। सम्मेलन के कई केन्द्रीय मंत्रियों और कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना है।

श्री रूपाला ने कहा कि भारत दुनिया का सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाला देश है। दुनिया के दुग्ध उत्पाद में 23 प्रतिशत योगदान भारत का है, लेकिन इसके निर्यात में देश का हिस्सा मात्र एक प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि किसानों और उद्योग के हित में देश से दूध का निर्यात बढ़ाने की महती आवश्यकता है और इस सम्मेलन में इस पर खास ध्यान दिया जायेगा।

उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में दूध उत्पादक किसानों और डेयरी उद्योग से जुड़े लोगों को अधिक से अधिक फायदा हो, इस पर विशेष जोर होगा।

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष मीनेश शाह ने इस मौके पर कहा कि सम्मेलन में दुग्ध उत्पादों की पोषणीयता और दुग्ध क्षेत्र में आजीविका पर भी विशेष रूप से चर्चा की जायेगी। स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव काल में इस सम्मेलन के आयोजन से दुग्ध क्षेत्र को बहुत लाभ होने की संभावना है। दुनिया भर के विशेषज्ञों के अनुभवों से देश में इस व्यवसाय से जुड़े लोग और किसान बहुत लाभान्वित होंगे। दुग्ध उत्पादन और व्यवसाय में अग्रणी देशों की तकनीक जान-समझकर देश में उसका अधिकतम लाभ उठाया जायेगा।

श्री रूपाला ने एक सवाल के जवाब में बताया कि पशुओं में फैले लम्पी रोग पर नियंत्रण किया जा रहा है। गुजरात, राजस्थान, पंजाब ,हरियाणा, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में इसका प्रकोप है। प्रभावित क्षेत्रों में इसकी वैक्सीन उपलब्ध है। केन्द्र सरकार प्रभावित राज्यों से निरंतर संपर्क में है और दिल्ली में एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है जो राज्यों के साथ समन्वय करके उनकी जरूरतें पूरी कर रहा है। वह स्वयं राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों से लम्पी रोग के प्रभाव के बारे में जानकारी लेेते रहते हैं।

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