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            <title>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर एक भावनात्मक अपील</title>
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            <pubDate>April 17, 2026, 10:46 am</pubDate>
            <description><![CDATA[नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर एक भावनात्मक और प्रेरणादायक अपील करते हुए सभी सांसदों से देश की नारीशक्ति के अधिकारों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यह समय राजनीति से ऊपर उठकर एक ऐतिहासिक निर्णय लेने का है, जो भारत [&hellip;]
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            <content:encoded><![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली :</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर एक भावनात्मक और प्रेरणादायक अपील करते हुए सभी सांसदों से देश की नारीशक्ति के अधिकारों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यह समय राजनीति से ऊपर उठकर एक ऐतिहासिक निर्णय लेने का है, जो भारत के लोकतंत्र को और मजबूत बनाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं सभी सांसदों से कहूंगा कि आप अपने घर में मां, बहन, बेटी और पत्नी का स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा की आवाज को सुनें। यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को उनका हक देने का अवसर है।” उनके इस बयान ने संसद में मौजूद सभी दलों के सदस्यों को सोचने पर मजबूर कर दिया।</p>
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<p>यह अपील ऐसे समय में आई है जब महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। इस विधेयक का उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करना है, जिससे राजनीति में उनकी भागीदारी बढ़ सके।<br />
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में आगे कहा कि यह संशोधन केवल कानून का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह देश की नारीशक्ति के सम्मान और उनके योगदान को स्वीकार करने का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “देश की नारीशक्ति की सेवा का, उनके वंदन का यह बहुत बड़ा अवसर है। उन्हें नए अवसरों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।” उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने में सहयोग करें। उनका मानना है कि यदि यह विधेयक एकमत से पारित होता है, तो इससे न केवल महिलाओं का सशक्तिकरण होगा, बल्कि भारत का लोकतंत्र भी और अधिक मजबूत बनेगा।<br />
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत की प्रगति में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, विज्ञान, खेल या फिर राजनीति—हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है। ऐसे में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व देना समय की मांग है।<br />
संसद में इस मुद्दे पर विभिन्न दलों के नेताओं ने भी अपने विचार रखे और कई ने प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन किया। हालांकि, कुछ दलों ने विधेयक के प्रावधानों को लेकर सवाल भी उठाए और विस्तृत चर्चा की मांग की।<br />
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विधेयक पारित होता है, तो यह भारत की राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे न केवल महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि नीति-निर्माण में भी उनकी आवाज को अधिक महत्व मिलेगा।<br />
प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से एकजुट होकर इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “आइए, हम मिलकर आज इतिहास रचें और भारत की नारी को, देश की आधी आबादी को उनका अधिकार दें।” इस महत्वपूर्ण विधेयक पर फैसला लिया जाएगा। यदि यह पारित होता है, तो यह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।</p>
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            <dc:creator>Praveen Singh</dc:creator>
            <category>Modi,Narendra Modi,PM,women,women bill</category>
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