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            <title>कमजोर मानसून का संकेत, बढ़ती गर्मी ने बढ़ाई चिंता</title>
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            <pubDate>April 14, 2026, 11:41 am</pubDate>
            <description><![CDATA[नयी दिल्ली : देश में इस साल मौसम को लेकर दोहरी चुनौती सामने आती दिख रही है । एक ओर समय से पहले और तेज होती गर्मी, दूसरी ओर कमजोर मानसून का पूर्वानुमान। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के शुरुआती अनुमान ने किसानों से लेकर नीति-निर्माताओं तक सभी की चिंता बढ़ा दी है। मानसून सामान्य से [&hellip;]
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            <content:encoded><![CDATA[<p style="font-weight: 400"><strong>नयी दिल्ली :</strong> देश में इस साल मौसम को लेकर दोहरी चुनौती सामने आती दिख रही है । एक ओर समय से पहले और तेज होती गर्मी, दूसरी ओर कमजोर मानसून का पूर्वानुमान। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के शुरुआती अनुमान ने किसानों से लेकर नीति-निर्माताओं तक सभी की चिंता बढ़ा दी है।</p>
<p style="font-weight: 400"><strong>मानसून सामान्य से कम रहने का अनुमान</strong></p>
<p style="font-weight: 400">आईएमडी के अनुसार, वर्ष 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून–सितंबर) के दौरान देश में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत लगभग 92% रहने की संभावना है जो  सामान्यतः 96% से 104% के बीच की बारिश को सामान्य माना जाता है, इसलिए यह स्तर “सामान्य से कम” श्रेणी में आता है। निजी एजेंसी स्काईमेट ने भी लगभग 94% वर्षा का अनुमान जताया है।</p>
<p style="font-weight: 400"><strong> ‘</strong><strong>अल नीनो</strong><strong>’ </strong><strong>का असर</strong><strong>, IOD </strong><strong>से थोड़ी उम्मीद</strong></p>
<p style="font-weight: 400">कमजोर मानसून के पीछे प्रमुख कारण एल नीनो को माना जा रहा है, जो प्रशांत महासागर में बनने वाली एक जलवायु घटना है और भारत में बारिश को कम कर देती है।<br />
हालांकि, हिंद महासागर में पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल बनने की संभावना है, जो मानसून के दूसरे हिस्से में अल नीनो के प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है।</p>
<p style="font-weight: 400"><strong>कृषि और महंगाई पर सीधा असर</strong></p>
<p style="font-weight: 400">भारत की लगभग आधी खेती मानसून पर निर्भर है। ऐसे में कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों—धान, दालें और तिलहन पर पड़ सकता है।</p>
<ul style="font-weight: 400">
<li>बुवाई और पैदावार प्रभावित हो सकती है</li>
<li>खाद्यान्न उत्पादन घटने की आशंका</li>
<li>खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं</li>
<li>ग्रामीण आय में कमी और मांग में गिरावट संभव</li>
</ul>
<p style="font-weight: 400">इसका असर देश की आर्थिक वृद्धि (GDP) पर भी पड़ सकता है।</p>
<p style="font-weight: 400"><strong> </strong><strong>समय से पहले तेज हुई गर्मी</strong></p>
<p style="font-weight: 400">इसी बीच, देश के मौसम में स्पष्ट असंतुलन देखने को मिल रहा है।</p>
<ul style="font-weight: 400">
<li>उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में तापमान तेजी से बढ़ रहा है</li>
<li>कई राज्यों में लू जैसी स्थिति बन रही है</li>
<li>आने वाले दिनों में तापमान 4–6°C तक बढ़ने का अनुमान</li>
</ul>
<p style="font-weight: 400">वहीं, पूर्वोत्तर भारत में बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की घटनाएं जारी हैं। यह अंतर एक सक्रिय ट्रफ प्रणाली और ऊपरी हवा में चक्रवाती परिसंचरण के कारण बन रहा है।</p>
<p style="font-weight: 400"><strong> </strong><strong>पानी और बिजली पर भी असर</strong></p>
<p style="font-weight: 400">भारत में लगभग 75% वर्षा मानसून से होती है, जो:</p>
<ul style="font-weight: 400">
<li>सिंचाई</li>
<li>पेयजल आपूर्ति</li>
<li>जलविद्युत उत्पादन<br />
के लिए बेहद जरूरी है।</li>
</ul>
<p style="font-weight: 400">देश में केवल करीब 55% खेती ही सिंचाई के दायरे में है, जिससे मानसून पर निर्भरता और बढ़ जाती है।</p>
<p style="font-weight: 400"><strong> </strong><strong>आगे की राह: तैयारी जरूरी</strong></p>
<p style="font-weight: 400">यह केवल पहला पूर्वानुमान है, और मई के अंत में आईएमडी अधिक विस्तृत रिपोर्ट जारी करेगा। लेकिन शुरुआती संकेत साफ हैं कि गर्मी लंबी और तीव्र हो सकती है और  मानसून थोड़ा कमजोर रह सकता है । ऐसे में सरकार, किसानों और आम लोगों को पहले से तैयारी करने की जरूरत है ,जैसे जल संरक्षण, फसल प्रबंधन और आपूर्ति संतुलन।  कुल मिलाकर, 2026 का मौसम चुनौतीपूर्ण हो सकता है।</p>
<p style="font-weight: 400">
]]></content:encoded>
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            <dc:creator>Prafull Rai</dc:creator>
            <category>climate pattern,Delhi,El nino,GDP,IMD,Indian Weather,IOM,Monsoon,weather</category>
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