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            <title>नोएडा का श्रमिक संघर्ष: ‘विकसित भारत’ के पीछे छुपी सच्चाई</title>
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            <pubDate>April 14, 2026, 9:54 am</pubDate>
            <description><![CDATA[कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आख़िरी चीख़ थी &#8211; जिसकी हर आवाज़ को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया। नोएडा में काम करने वाले एक मज़दूर की ₹12,000 महीने की तनख्वाह,₹4,000-7,000 किराया। जब तक ₹300 की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक ₹500 सालाना किराया बढ़ा [&hellip;]
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            <content:encoded><![CDATA[<p>कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आख़िरी चीख़ थी &#8211; जिसकी हर आवाज़ को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया।</p>
<p>नोएडा में काम करने वाले एक मज़दूर की ₹12,000 महीने की तनख्वाह,₹4,000-7,000 किराया। जब तक ₹300 की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक ₹500 सालाना किराया बढ़ा देता है।</p>
<p>तनख्वाह बढ़ने तक ये बेलगाम महंगाई ज़िंदगी का गला घोंट देती है, कर्ज़ की गहराई में डुबा देती है &#8211; यही है “विकसित भारत” का सच।</p>
<p>एक महिला मज़दूर ने कहा &#8211; “गैस के दाम बढ़ते हैं, पर हमारी तनख्वाह नहीं।” इन लोगों ने शायद इस गैस संकट के दौरान अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए ₹5000 का भी सिलेंडर खरीदा होगा।</p>
<p>यह सिर्फ़ नोएडा की बात नहीं है। और यह सिर्फ़ भारत की भी बात नहीं है। दुनियाभर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं &#8211; पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट गई है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi">कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आख़िरी चीख़ थी &#8211; जिसकी हर आवाज़ को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया।</p>
<p>नोएडा में काम करने वाले एक मज़दूर की ₹12,000 महीने की तनख्वाह,₹4,000-7,000 किराया। जब तक ₹300 की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक ₹500…</p>
<p>— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) <a href="https://twitter.com/RahulGandhi/status/2043939305840881943?ref_src=twsrc%5Etfw">April 14, 2026</a></p></blockquote>
<p>मगर, अमेरिका के टैरिफ़ वॉर, वैश्विक महंगाई, टूटती सप्लाई चेन &#8211; इसका बोझ Modi जी के “मित्र” उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा। इसकी सबसे बड़ी मार पड़ी है उस मज़दूर पर जो दिहाड़ी कमाता है, तभी रोज़ खाता है।</p>
<p>वो मज़दूर, जो किसी युद्ध का हिस्सा नहीं, जिसने कोई नीति नहीं बनाई &#8211; जिसने बस काम किया। चुपचाप। बिना शिकायत। और उसके बदले अपना हक मांगने पर उन्हें मिलता क्या है? दबाव और अत्याचार।</p>
<p>एक और ज़रूरी मुद्दा &#8211; मोदी सरकार ने 4 लेबर कोड जल्दबाज़ी में बिना संवाद नवंबर, 2025 से लागू कर, काम का समय 12 घंटे तक बढ़ा दिया।</p>
<p>जो मज़दूर हर रोज़ 12-12 घंटे खड़े होकर काम करता है फिर भी बच्चों की स्कूल फ़ीस क़र्ज़ लेकर भरता है &#8211; क्या उसकी मांग ग़ैरवाजिब है? और जो उसका हक़ हर रोज़ मार रहा है &#8211; वो “विकास” कर रहा है?</p>
<p><a href="http://noida">नोएडा का मज़दूर</a> ₹20,000 माँग रहा है। यह कोई लालच नहीं &#8211; यह उसका अधिकार, उसकी जिंदगी का एकमात्र आधार है।</p>
<p>मैं हर उस मज़दूर के साथ हूं &#8211; जो इस देश की रीढ़ है और जिसे इस सरकार ने बोझ समझ लिया है।</p>
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            <dc:creator>Ravi Shankar Tiwari</dc:creator>
            <category>Rahul Gandhi</category>
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