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            <title>मतदान केवल अधिकार नहीं, राष्ट्र निर्माण का संकल्प है - Gauravshali Bharat</title>
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            <pubDate>April 21, 2026, 10:21 pm</pubDate>
            <description><![CDATA[भारत में असम, केरल, पुदुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल इन 5 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेश में पूर्ण विधानसभा के आम चुनाव हो रहे हैं। इनके अलावा गोवा,]]></description>
            <content:encoded><![CDATA[<p>भारत में असम, केरल, पुदुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल इन 5 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेश में पूर्ण विधानसभा के आम चुनाव हो रहे हैं। इनके अलावा गोवा, कर्नाटक, नागालैंड, त्रिपुरा, गुजरात, महाराष्ट्र इन 6 राज्यों की 8 विधानसभा सीटों पर उप-चुनाव भी हो रहे हैं।</p>
<p>असम, केरल और पुदुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान हो चुका है। तमिलनाडु में 23 अप्रैल और पश्चिम बंगाल में 23 व 29 अप्रैल को मतदान है। सभी की मतगणना 4 मई 2026 को होगी।<br />
इसलिए आज मतदाता पर चर्चा प्रसंग हो गया है। लोकतंत्र के सशक्तिकरण के लिए शत प्रतिशत मतदान आवश्यक है। वर्ष 1950 में भारतीय निर्वाचन आयोग की स्थापना हुई थी। भारतीय निर्वाचन आयोग संघ और राज्यों में लोकसभा, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तथा राज्य विधानसभाओं के चुनाव का संचालन करता है। संविधान के अनुच्छेद 324 से 329 निर्वाचन आयोग से संबंधित हैं। आयोग के 61वें स्थापना दिवस 25 जनवरी 2011 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल ने राष्ट्रीय मतदाता दिवस का शुभारंभ किया था। तब से प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है।</p>
<p>इस अवसर पर मतदाताओं को जागरूक करने के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। घर घर अलख जगाएँगे, मतदाता जागरूक बनाएँगे जैसे अभियानों के साथ भाषण प्रतियोगिता, हस्ताक्षर अभियान, वोटर आईडी वितरण आदि कार्यक्रम भी सम्पन्न होते हैं। लोकतंत्र की जड़ मतदाता है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है क्योंकि यहाँ मताधिकार प्राप्त नागरिकों की संख्या सर्वाधिक है। हम लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत स्वतंत्र नागरिक हैं और इस प्रणाली में नागरिकों को प्राप्त अधिकारों में सबसे बड़ा अधिकार मतदान का अधिकार है। इस अधिकार को प्राप्त कर हम मतदाता कहलाते हैं।</p>
<ul>
<li><strong>जागरूक मतदाता ही संविधान के असली संरक्षक</strong></li>
<li><strong>एक-एक वोट की ताकत से लोकतंत्र मजबूत बनता है</strong></li>
<li><strong>शत प्रतिशत मतदान: विकसित भारत का पहला संकल्प</strong></li>
</ul>
<p>सभी मतदाताओं को बिना किसी भय और दबाव के मतदान करना चाहिए। चुनाव सरकार और शासन को संवैधानिक वैधता प्रदान करते हैं। इसलिए यह स्वतः सिद्ध है कि लोकतंत्र का आधार मतदाता है। मतदाताओं को निर्भय होकर मतदान करना चाहिए। भय, पक्षपात, स्वार्थ, लालच या किसी दबाव में आकर मतदान नहीं करना चाहिए। मतदाता को लोकतंत्र की रक्षा, क्षेत्र के विकास और संविधान-प्रदत्त अधिकारों के संरक्षण के लिए मतदान के दिन अवश्य मतदान केंद्र जाना चाहिए। 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके प्रत्येक भारतीय का मतदान संवैधानिक अधिकार है।</p>
<p>एक वोट से होती जीत हार, वोट न जाए बेकार&#8221; की भावना को प्रत्येक नागरिक में जागृत करना आवश्यक है। वर्तमान में देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया गतिमान है। निर्वाचन आयोग, सरकार, राजनीतिक दल और प्रत्याशी चुनाव की तैयारियों में लगे हैं। किंतु किसी भी लोकतांत्रिक देश में सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका मतदाताओं की ही होती है। मतदाता अपने अमूल्य मत से किसी दल विशेष को पाँच वर्ष के लिए सत्ता सौंपता है और राष्ट्र व राज्य के विकास में एक नागरिक के रूप में अपना कर्तव्य निभाता है। जैसा कहा गया है, &#8220;मतदान केवल अधिकार नहीं, राष्ट्र निर्माण का संकल्प है।</p>
<p>एक सशक्त लोकतंत्र के लिए शत प्रतिशत मतदान अनिवार्य है। किंतु प्रायः देखा जाता है कि भारत में शत प्रतिशत मतदान नहीं हो पाता। मतदाताओं का बड़ा हिस्सा, लगभग 40 से 60 प्रतिशत तक, मतदान में भाग नहीं लेता। यह गंभीर चिंता का विषय है कि नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग कर अपने कर्तव्य का पालन नहीं करते। आखिर वे कौन से कारण हैं जिनके चलते इतनी बड़ी संख्या में मतदाता मतदान से दूर रहते हैं। इन कारणों को जानने का कोई सुनियोजित प्रयास अब तक नहीं हुआ है। लोकतंत्र को और सशक्त बनाने के लिए इन कारणों की पहचान अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए प्रत्येक चुनाव के उपरांत वैज्ञानिक सर्वे कराया जाना चाहिए।</p>
<p>इससे प्राप्त आँकड़ों के विश्लेषण द्वारा कम मतदान के वास्तविक कारण सुनिश्चित किए जा सकेंगे। इस सर्वे का तत्कालिक नहीं बल्कि दूरगामी परिणाम होगा और भविष्य में मतदान प्रतिशत बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। चुनाव सुधार के अंतर्गत कुछ ऐसे कदम हैं जो सरलता से उठाए जा सकते हैं और जिनका प्रभाव व्यापक व दूरगामी होगा। यह भारतीय लोकतंत्र के सशक्तिकरण की दिशा में सार्थक प्रयास होगा। भारत में मतदान को कानूनी रूप से अनिवार्य करना व्यवहारिक नहीं है, इसलिए अप्रत्यक्ष उपाय अधिक कारगर हो सकते हैं।</p>
<p>मतदाताओं की निरंतर बढ़ती संख्या से निपटना निर्वाचन आयोग के लिए बड़ी चुनौती है। इसके समाधान के लिए भविष्य में सुरक्षित ऑनलाइन मतदान प्रणाली विकसित की जानी चाहिए ताकि प्रवासी, दिव्यांग, वरिष्ठ नागरिक और कार्यरत युवा भी सरलता से मत दे सकें। भारत में केवल मतदान द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता का हस्तांतरण होना, केंद्र एवं राज्यों में अलग अलग राजनीतिक दलों एवं गठबंधनों की सरकार होने के बाद भी देश की एकता और अखंडता अक्षुण्ण रहना, इस बात का प्रमाण है कि लोकतांत्रिक मूल्यों में भारतवासियों का विश्वास और निष्ठा अटूट है।</p>
<p>जब प्रत्येक मतदाता अपने एक वोट की कीमत समझेगा, तभी विकसित भारत का स्वप्न साकार होगा। अभी हो रहे विधानसभा चुनाव देश की प्रगति की दिशा और गति मैं सकारात्मक बदलाव लाएंगे। आज मतदाता परिपक्व है। राष्ट्र हित में मतदान करना चाहिए।</p>
<p>डॉ. नन्दकिशोर साह</p>
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            <dc:creator>Praveen Singh</dc:creator>
            <category>Asam,General election,Goa,Gujarat,india,Karnataka,Kerala,Legislative assembly,Maharashtra,Nagaland,Puducherry,Tamilnadu,Tripura,West Bangal</category>
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