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कानून के दायरे में रहकर खेलें रंगों की होली

प्रयागराज : रंगों और उत्साह का त्यौहार होली के अवसर पर लोगों को कानून के दायरे में रहकर ही आनंदोत्सव का लुत्फ उठाना चाहिए। ऐसा नहीं हो कि आनंद के मद में मर्यादा लांघ कर गलत नीयत से किसी को भी जबरन रंग लगाने के चक्कर में जल की सजा तक हो सकती है।
जिला न्यायालय के शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) गुलाब चंद्र अग्रहरि ने शनिवार को बताया कि होली समाज में प्रेम और भाई चारा कायम करने का संदेश देता है न/न कि रंगो की आड़ में किसी के साथ बदतमीजी कर उसे पीड़ा पहुंचाना है। होली के अवसर पर युवक जाति, लिंग, उम्र और स्थिति जैसी सामाजिक रैंकिंग को एक साथ मिलकर आनंद लेने की भावना से त्याग देते है।
श्री अग्रहरि ने कहा कि रंगों के त्यौहार होली में खुद की खुशी के लिए किसी दूसरे को कदाचित पीड़ा पहुंचाना सर्वदा अनुचित है। बुरा न मानों होली है कहकर उसकी मंशा के खिलाफ रंग लगाना, किसी पर पानी भरे गुब्बारे मारना, होलिका का जबरन चंदा वसूलना और सभ्य समाज में अश्लील गानों पर भौंडापन करना बजाना,उन्हें जेल जाकर इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि होली के अवसर पर जोर जबरदस्ती रंग लगाने के बहाने औरत के मान-सम्मान के साथ खिलवाड़ करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 509 के तहत एक साल की सजा जिसे बाद में पांच साल तक बढाया जा सकता है अर्थदण्ड या सजा दोनो ही लगाया जा सकता है। होली के अवसर पर महिलाओं के सम्मान को ध्यान में रखकर होली के रंग का आनंद लें।
अधिवक्ता अग्रहरि ने बताया कि 18 वर्ष से कम बच्चों को भी जबरन रंग लगाने से बचना चाहिए और गलत नीयत से शरीर के संवेदनशील अंगों को छूने पर आईपीसी की धारा 323, 504, 506 के साथ ही पाक्सों अधिनियम के तहत दंडित किया जा सकता है। जबरन चंदा वसूली करना भी कानूनी अपराध है। इसके लिए चंदा वसूलने वाले के खिलाफ आईपीसी की धारा 384, 386, 387, 392, 394 के तहत मुकदमा कायम कराया जा सकता। इस गैर जमानती अपराध के लिए दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष की कारावास तक की सजा हो सकती है, या फिर दोनों को सजा भुगतना होगा।

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