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       <title>Today Health News News | Latest Health News News | Breaking Health News News in English | Latest Health News News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Health News समाचार:Today Health News News ,Latest Health News News,Aaj Ka Samachar ,Health News समाचार ,Breaking Health News News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        <lastBuildDate>April 28, 2026, 2:44 pm</lastBuildDate>
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            <title>Inkhabar</title>
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        </image><item><title>क्या है साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड (PFA)? मानसिक तनाव और चिंता से जूझ रहे लोगों के लिए कैसे है मददगार</title><link>https://gauravshalibharat.com/health/what-is-psychological-first-aid-pfa-mental-health-support-tips-1177/</link><pubDate>April 23, 2026, 11:00 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2026/04/health.webp</image><category>दिल्ली</category><excerpt>नई दिल्ली: बदलते मौसम, खासकर गर्मियों के दौरान, जहां शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, वहीं मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। तेज गर्मी, नींद की कमी, डिहाइड्रेशन और दैनिक जीवन के तनाव कई लोगों में चिंता, घबराहट, चिड़चिड़ापन और उद...</excerpt><content>&lt;p data-start=&quot;173&quot; data-end=&quot;567&quot;&gt;&lt;strong data-start=&quot;173&quot; data-end=&quot;187&quot;&gt;नई दिल्ली:&lt;/strong&gt; बदलते मौसम, खासकर गर्मियों के दौरान, जहां शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, वहीं मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। तेज गर्मी, नींद की कमी, डिहाइड्रेशन और दैनिक जीवन के तनाव कई लोगों में चिंता, घबराहट, चिड़चिड़ापन और उदासी जैसी समस्याएं बढ़ा सकते हैं। ऐसे समय में ‘साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड’ (Psychological First Aid &amp;#8211; PFA) एक बेहद उपयोगी और प्रभावी तरीका माना जाता है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;569&quot; data-end=&quot;937&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://gauravshalibharat.com/web-stories/these-juices-will-prove-to-be-a-boon-during-pregnancy-know-their-benefits/&quot;&gt;&lt;span class=&quot;hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline&quot;&gt;&lt;span class=&quot;whitespace-normal&quot;&gt;World Health Organization&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt; के अनुसार, साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड एक सरल और मानवीय तरीका है, जिसके जरिए संकट या तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहे लोगों को तुरंत मानसिक और भावनात्मक सहारा दिया जाता है। यह कोई दवा, काउंसलिंग या मेडिकल थेरेपी नहीं है, बल्कि एक सहायक प्रतिक्रिया (supportive response) है जो व्यक्ति को सुरक्षित, शांत और आशावान महसूस कराने में मदद करती है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;939&quot; data-end=&quot;1243&quot;&gt;PFA का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को भावनात्मक रूप से स्थिर करना और उसे यह एहसास दिलाना है कि वह अकेला नहीं है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका ‘सुनने’ और ‘समझने’ की होती है। जब कोई व्यक्ति मानसिक तनाव में होता है, तो उसे सलाह देने से ज्यादा जरूरत होती है कि कोई उसकी बात बिना टोके सुने और उसकी भावनाओं को समझे।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1245&quot; data-end=&quot;1494&quot;&gt;गर्मियों में कई लोग अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, थकान और मानसिक दबाव जैसी समस्याओं का सामना करते हैं। इन परिस्थितियों में साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड तुरंत राहत देने में मदद करता है और लंबे समय में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में सहायक साबित होता है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1496&quot; data-end=&quot;1786&quot;&gt;अब सवाल उठता है कि PFA क्यों जरूरी है? जब कोई व्यक्ति मानसिक संकट में होता है, तो उसे सबसे ज्यादा जरूरत होती है सुरक्षा, समर्थन और जुड़ाव की। साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड इन तीनों पहलुओं पर काम करता है। यह व्यक्ति को शांत करता है, उसकी चिंता कम करता है और उसे आगे की मदद लेने के लिए तैयार करता है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1788&quot; data-end=&quot;1955&quot;&gt;साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड देना कोई कठिन प्रक्रिया नहीं है। कोई भी व्यक्ति थोड़ी समझ और संवेदनशीलता के साथ यह सहायता दे सकता है। इसके लिए कुछ जरूरी कदम अपनाए जा सकते हैं—&lt;/p&gt;
&lt;ul data-start=&quot;1956&quot; data-end=&quot;2274&quot;&gt;
&lt;li data-section-id=&quot;n6qwk&quot; data-start=&quot;1956&quot; data-end=&quot;2047&quot;&gt;सबसे पहले व्यक्ति की सुरक्षा और बुनियादी जरूरतों जैसे पानी, छाया और आराम का ध्यान रखें।&lt;/li&gt;
&lt;li data-section-id=&quot;ih342p&quot; data-start=&quot;2048&quot; data-end=&quot;2089&quot;&gt;उसकी बात ध्यान से और बिना टोके सुनें।&lt;/li&gt;
&lt;li data-section-id=&quot;1nugkpi&quot; data-start=&quot;2090&quot; data-end=&quot;2140&quot;&gt;उसकी भावनाओं को स्वीकार करें और उसे जज न करें।&lt;/li&gt;
&lt;li data-section-id=&quot;1ao1pup&quot; data-start=&quot;2141&quot; data-end=&quot;2199&quot;&gt;उसे भरोसा दिलाएं कि वह अकेला नहीं है और मदद उपलब्ध है।&lt;/li&gt;
&lt;li data-section-id=&quot;1hh0gc2&quot; data-start=&quot;2200&quot; data-end=&quot;2274&quot;&gt;जरूरत पड़ने पर उसे प्रोफेशनल मदद या मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ें।&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;p data-start=&quot;2276&quot; data-end=&quot;2389&quot;&gt;यह जरूरी है कि मदद करने वाला व्यक्ति खुद शांत और धैर्यवान रहे, ताकि वह सामने वाले को भी स्थिरता का एहसास करा सके।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;2391&quot; data-end=&quot;2671&quot;&gt;विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार के &lt;a href=&quot;#&quot;&gt;सदस्य, दोस्त,&lt;/a&gt; शिक्षक और समाज के अन्य लोग आसानी से PFA की बुनियादी समझ लेकर अपने आसपास के लोगों की मदद कर सकते हैं। खासकर गर्मी के मौसम में अगर कोई व्यक्ति तनावग्रस्त या परेशान दिखे, तो तुरंत उसे भावनात्मक समर्थन देना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;2673&quot; data-end=&quot;2842&quot;&gt;कुल मिलाकर, साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड एक सरल लेकिन बेहद प्रभावी तरीका है, जो मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और संकट की स्थिति में लोगों को संभालने में अहम भूमिका निभाता है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>घर का बना खाना क्यों है सेहत के लिए सबसे बेहतर? जानिए इसके फायदे</title><link>https://gauravshalibharat.com/health/benefits-of-home-cooked-food-healthy-eating-tips-india-1192/</link><pubDate>April 23, 2026, 8:28 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2026/04/junk-food-300x169.webp</image><category>दिल्ली</category><excerpt>नई दिल्ली: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में बाहर का खाना, फास्ट फूड और पैकेज्ड फूड लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनता जा रहा है। हालांकि, स्वाद और सुविधा के बावजूद ये खाने की आदतें धीरे-धीरे सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है क...</excerpt><content>&lt;p data-start=&quot;141&quot; data-end=&quot;465&quot;&gt;&lt;strong data-start=&quot;141&quot; data-end=&quot;155&quot;&gt;नई दिल्ली:&lt;/strong&gt; आज की तेज रफ्तार जिंदगी में बाहर का खाना, फास्ट फूड और पैकेज्ड फूड लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनता जा रहा है। हालांकि, स्वाद और सुविधा के बावजूद ये खाने की आदतें धीरे-धीरे सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि घर का बना खाना (Home Cooked Food) आज भी सबसे हेल्दी और सुरक्षित विकल्प है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;467&quot; data-end=&quot;814&quot;&gt;घर के खाने का सबसे बड़ा फायदा उसकी ताजगी और शुद्धता होती है। जब हम घर पर खाना बनाते हैं, तो सामग्री का चुनाव खुद करते हैं—जैसे ताजी सब्जियां, साफ अनाज, दालें और गुणवत्तापूर्ण मसाले। इससे यह सुनिश्चित होता है कि भोजन पौष्टिक और सुरक्षित है। वहीं बाहर के खाने में इस्तेमाल होने वाले तेल, मसाले और सामग्री की गुणवत्ता पर पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;816&quot; data-end=&quot;1118&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://gauravshalibharat.com/web-stories/these-juices-will-prove-to-be-a-boon-during-pregnancy-know-their-benefits/&quot;&gt;साफ-सफाई&lt;/a&gt; भी एक अहम कारण है, जिसकी वजह से घर का खाना बेहतर माना जाता है। घर में खाना बनाते समय हम किचन की स्वच्छता, बर्तनों की सफाई और हाथों की हाइजीन का विशेष ध्यान रखते हैं। जबकि बाहर के खाने में स्वच्छता का स्तर हमेशा स्पष्ट नहीं होता, जिससे फूड पॉइजनिंग या पेट से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1120&quot; data-end=&quot;1432&quot;&gt;घर का खाना आपकी जरूरतों के अनुसार तैयार किया जा सकता है। अगर किसी को कम तेल, कम नमक या कम मसाले वाला भोजन चाहिए, तो उसे आसानी से बनाया जा सकता है। इसके विपरीत, बाहर के खाने में अक्सर ज्यादा तेल, नमक और मसालों का इस्तेमाल होता है, जो लंबे समय में हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और हृदय रोग जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1434&quot; data-end=&quot;1746&quot;&gt;पोषण संतुलन की बात करें तो घर का खाना इस मामले में सबसे आगे है। इसमें दाल, सब्जी, रोटी, चावल, सलाद और दही जैसे सभी जरूरी पोषक तत्व शामिल किए जा सकते हैं। इससे शरीर को कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स का संतुलित मिश्रण मिलता है। बाहर के खाने में यह संतुलन अक्सर नहीं होता, जिससे पोषण की कमी हो सकती है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1748&quot; data-end=&quot;1908&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://gauravshalibharat.com/world/ocean-heat-waves-increasing-ocean-heat-is-making-storms-more-dangerous-scientists-warn-384/&quot;&gt;&lt;span class=&quot;hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline&quot;&gt;&lt;span class=&quot;whitespace-normal&quot;&gt;World Health Organization&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; &lt;/a&gt;के अनुसार, संतुलित और स्वच्छ भोजन स्वस्थ जीवनशैली की कुंजी है। घर का बना खाना इस दिशा में सबसे अच्छा विकल्प साबित होता है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1910&quot; data-end=&quot;2124&quot;&gt;इसके अलावा, घर के खाने का एक भावनात्मक पहलू भी होता है। जब परिवार के सदस्य अपने हाथों से खाना बनाते हैं, तो उसमें प्यार और अपनापन जुड़ा होता है। यह न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;2126&quot; data-end=&quot;2339&quot;&gt;&lt;a href=&quot;#&quot;&gt;घर का खाना&lt;/a&gt; पचने में भी आसान होता है। यह हल्का और कम प्रोसेस्ड होता है, जिससे पाचन तंत्र पर कम दबाव पड़ता है। इसके नियमित सेवन से डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोग जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी कम होता है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;2341&quot; data-end=&quot;2547&quot;&gt;अंत में, यह कहा जा सकता है कि घर का बना खाना न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए बेहतर है, बल्कि यह एक सुरक्षित, संतुलित और सुकून देने वाला विकल्प भी है। स्वस्थ जीवन के लिए घर के खाने को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Heatwave Alert: बच्चों और बुजुर्गों पर लू का सबसे ज्यादा खतरा, जानें बचाव के जरूरी उपाय</title><link>https://gauravshalibharat.com/health/heatwave-alert-children-elderly-safety-tips-prevention-india-1185/</link><pubDate>April 23, 2026, 8:00 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2026/04/healths-300x169.webp</image><category>दिल्ली</category><excerpt>नई दिल्ली: देशभर में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ ही हीटवेव (लू) का खतरा भी गंभीर होता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस भीषण गर्मी में सबसे ज्यादा जोखिम बच्चों और बुजुर्गों को होता है, क्योंकि उनका शरीर तापमान को संतुलि...</excerpt><content>&lt;p data-start=&quot;164&quot; data-end=&quot;540&quot;&gt;&lt;strong data-start=&quot;164&quot; data-end=&quot;178&quot;&gt;नई दिल्ली:&lt;/strong&gt; देशभर में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ ही हीटवेव (लू) का खतरा भी गंभीर होता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस भीषण गर्मी में सबसे ज्यादा जोखिम बच्चों और बुजुर्गों को होता है, क्योंकि उनका शरीर तापमान को संतुलित करने में उतना सक्षम नहीं होता। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकती है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;542&quot; data-end=&quot;903&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://gauravshalibharat.com/web-stories/raisins-are-a-boon-for-health-learn-about-their-5-amazing-benefits/&quot;&gt;&lt;span class=&quot;hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline&quot;&gt;&lt;span class=&quot;whitespace-normal&quot;&gt;National Health Mission&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; (NHM)&lt;/a&gt; के अनुसार, छोटे बच्चों और बुजुर्गों में लू लगने का खतरा अधिक होता है। बच्चों का शरीर पूरी तरह विकसित नहीं होता और उनकी पसीने की ग्रंथियां कम सक्रिय होती हैं, जिससे शरीर की गर्मी बाहर निकलने में दिक्कत होती है। वहीं, बुजुर्गों में उम्र, दवाइयों के असर और कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण गर्मी सहने की क्षमता कम हो जाती है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;905&quot; data-end=&quot;1257&quot;&gt;विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्मी के दौरान कुछ सामान्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर किसी बच्चे या बुजुर्ग को चक्कर आना, तेज सिरदर्द, अत्यधिक पसीना, कमजोरी, उल्टी या मतली जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत सावधानी बरतना जरूरी है। ऐसे मामलों में व्यक्ति को ठंडी जगह पर ले जाकर प्राथमिक उपचार देना चाहिए और आवश्यकता होने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1259&quot; data-end=&quot;1525&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://gauravshalibharat.com/world/ocean-heat-waves-increasing-ocean-heat-is-making-storms-more-dangerous-scientists-warn-384/&quot;&gt;हीटवेव&lt;/a&gt; से बचाव के लिए कुछ आसान लेकिन बेहद प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है शरीर को हाइड्रेटेड रखना। बच्चों और बुजुर्गों को नियमित अंतराल पर पानी पिलाना चाहिए। इसके अलावा नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और ORS जैसे तरल पदार्थ भी बेहद फायदेमंद होते हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1527&quot; data-end=&quot;1836&quot;&gt;धूप से बचाव भी बेहद जरूरी है। घर से बाहर निकलते समय हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनें, साथ ही सिर को ढकने के लिए टोपी या कपड़ा जरूर इस्तेमाल करें। आंखों को तेज धूप से बचाने के लिए चश्मा भी पहन सकते हैं। दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर जाने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय सूर्य की किरणें सबसे अधिक तेज होती हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1838&quot; data-end=&quot;2147&quot;&gt;खानपान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। ज्यादा तेल और मसालेदार भोजन से परहेज करें और हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक आहार लें। मौसमी फल, हरी सब्जियां, दही और सलाद शरीर को ठंडक देने में मदद करते हैं। साथ ही, शराब, कैफीन और अत्यधिक ठंडे पेय पदार्थों से दूरी बनाकर रखें, क्योंकि ये शरीर के तापमान को असंतुलित कर सकते हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;2149&quot; data-end=&quot;2449&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://gauravshalibharat.com/web-stories/raisins-are-a-boon-for-health-learn-about-their-5-amazing-benefits/&quot;&gt;&lt;span class=&quot;hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline&quot;&gt;&lt;span class=&quot;whitespace-normal&quot;&gt;Ministry of Health and Family Welfare&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; &lt;/a&gt;की सलाह के अनुसार, घर के अंदर ठंडा वातावरण बनाए रखना भी जरूरी है। पंखा, कूलर या एयर कंडीशनर का उपयोग करें और कमरों को हवादार रखें। यदि किसी को लू लगने का संदेह हो, तो तुरंत उसे ठंडे पानी से पोंछें, गीले कपड़े का इस्तेमाल करें और जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता लें।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;2451&quot; data-end=&quot;2675&quot;&gt;कुल मिलाकर, थोड़ी सी जागरूकता और सावधानी से बच्चों और बुजुर्गों को हीटवेव के खतरे से सुरक्षित रखा जा सकता है। यह जरूरी है कि परिवार के सदस्य इन बातों का ध्यान रखें और गर्मी के इस मौसम में अपने प्रियजनों की विशेष देखभाल करें।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>लोक नायक अस्पताल में 10 अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर और कैडेवरिक लैब का निर्माण शुरू</title><link>https://gauravshalibharat.com/breaking-news-ticker/lok-nayak-hospital-orthopedic-ot-cadaveric-lab-construction-944/</link><pubDate>April 21, 2026, 5:28 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2026/04/lok-nayak-hospital-300x169.webp</image><category>Breaking News Ticker</category><excerpt>नई दिल्ली के लोक नायक अस्पताल में ऑर्थोपेडिक सेवाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। अस्पताल के ऑर्थोपेडिक ब्लॉक में 10 अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर (OT) और एक आधुनिक कैडेवरिक लैब के निर्माण कार्य की शुरुआत की गई है। निर्माण कार्...</excerpt><content>&lt;p data-start=&quot;208&quot; data-end=&quot;460&quot;&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली&lt;/strong&gt; के &lt;span class=&quot;hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline&quot;&gt;&lt;span class=&quot;whitespace-normal&quot;&gt;लोक नायक अस्पताल&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; में ऑर्थोपेडिक सेवाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। अस्पताल के ऑर्थोपेडिक ब्लॉक में 10 अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर (OT) और एक आधुनिक कैडेवरिक लैब के निर्माण कार्य की शुरुआत की गई है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;462&quot; data-end=&quot;675&quot;&gt;निर्माण कार्य शुरू होने से पहले विधिवत पूजा और हवन का आयोजन किया गया, जिसमें वरिष्ठ डॉक्टरों और अधिकारियों ने भाग लिया। इस मौके पर मेडिकल स्टाफ और इंजीनियरिंग टीम ने परियोजना के सफलतापूर्वक पूर्ण होने की कामना की।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;677&quot; data-end=&quot;898&quot;&gt;बताया गया है कि यह प्रोजेक्ट लंबे समय से लंबित था और करीब एक दशक बाद अब इसे फिर से शुरू किया गया है। इस योजना के तहत दो मंजिलों का नवीनीकरण भी किया जाएगा, जिससे अस्पताल की कुल कार्यक्षमता में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;900&quot; data-end=&quot;1086&quot;&gt;परियोजना के पूरा होने के बाद &lt;a href=&quot;https://gauravshalibharat.com/state/delhi-master-plan-2041-sealing-amnesty-scheme-cat-demand/&quot;&gt;ऑर्थोपेडिक&lt;/a&gt; विभाग को एक समर्पित ऑपरेशन थिएटर ब्लॉक मिलेगा, जिससे सर्जरी की प्रक्रिया अधिक सुचारू होगी और मरीजों को ऑपरेशन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1088&quot; data-end=&quot;1326&quot;&gt;इसके साथ ही बनने वाली कैडेवरिक लैब मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए अत्याधुनिक सुविधा प्रदान करेगी। यहां सर्जिकल और लैप्रोस्कोपिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अभ्यास किया जा सकेगा, जो चिकित्सा शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाएगा।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1328&quot; data-end=&quot;1477&quot;&gt;अस्पताल प्रशासन का मानना है कि इस पहल से न केवल मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा, बल्कि मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खुलेंगी।&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>