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       <title>Today Trump News | Latest Trump News | Breaking Trump News in English | Latest Trump News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Trump समाचार:Today Trump News ,Latest Trump News,Aaj Ka Samachar ,Trump समाचार ,Breaking Trump News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/trump</link>
        <lastBuildDate>April 16, 2026, 4:24 am</lastBuildDate>
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            <title>Inkhabar</title>
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        </image><item><title>जेडी वेंस की डिप्लोमेसी पर सवाल: इस्लामाबाद के बाद हंगरी में भी अमेरिका को झटका</title><link>https://gauravshalibharat.com/world/questions-on-jd-vances-diplomacy-after-islamabad-america-also-suffered-a-setback-in-hungary/</link><pubDate>April 13, 2026, 11:05 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2026/04/JD-Vance-usa.webp</image><category>दुनिया</category><excerpt>अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance की विदेश नीति और कूटनीतिक प्रयासों पर लगातार सवाल उठने लगे हैं। हाल के घटनाक्रमों में एक के बाद एक कूटनीतिक असफलताओं ने अमेरिकी प्रशासन के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, इस्लामाबाद में ईरान ...</excerpt><content>&lt;p data-start=&quot;168&quot; data-end=&quot;401&quot;&gt;अमेरिका के उपराष्ट्रपति &lt;strong&gt;&lt;span class=&quot;hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline&quot;&gt;&lt;span class=&quot;whitespace-normal&quot;&gt;JD Vance&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; की विदेश नीति और कूटनीतिक प्रयासों पर लगातार सवाल उठने लगे हैं। हाल के घटनाक्रमों में एक के बाद एक कूटनीतिक असफलताओं ने अमेरिकी प्रशासन के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;403&quot; data-end=&quot;706&quot;&gt;सूत्रों के अनुसार, इस्लामाबाद में ईरान से जुड़ी शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के प्रयासों में वेंस को सफलता नहीं मिली। बातचीत के दौरान किसी भी बड़े समझौते पर सहमति नहीं बन पाई, जिसके बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को खाली हाथ लौटना पड़ा। इस घटना को अमेरिका की कूटनीतिक रणनीति के लिए एक झटके के रूप में देखा गया।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;708&quot; data-end=&quot;1042&quot;&gt;इसके तुरंत बाद हंगरी में हुए राजनीतिक घटनाक्रम ने स्थिति को और जटिल बना दिया। बताया जा रहा है कि हंगरी में अमेरिका समर्थित माने जाने वाले नेता के लिए प्रचार अभियान में वेंस ने सक्रिय भूमिका निभाई थी। उन्होंने बुडापेस्ट में रैलियों को संबोधित करते हुए यूरोपीय संघ की नीतियों की आलोचना की और ऊर्जा आत्मनिर्भरता जैसे मुद्दों पर जोर दिया।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1044&quot; data-end=&quot;1306&quot;&gt;हालांकि, चुनाव परिणाम अमेरिका की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे और वहां सत्ता संतुलन बदल गया। रिपोर्टों के अनुसार, लंबे समय से सत्ता में रहे नेता को जनता के विरोध का सामना करना पड़ा और वह चुनावी दौड़ में पिछड़ गए। इससे अमेरिका के रणनीतिक प्रयासों को एक और झटका लगा।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1308&quot; data-end=&quot;1567&quot;&gt;विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल व्यक्तिगत राजनीतिक असफलता नहीं है, बल्कि अमेरिका की विदेश नीति रणनीति पर भी सवाल खड़े करता है। लगातार दो बड़े अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपेक्षित परिणाम न मिलने से वाशिंगटन की कूटनीतिक प्रभावशीलता पर बहस शुरू हो गई है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1569&quot; data-end=&quot;1853&quot;&gt;वेंस को अमेरिकी राष्ट्रपति &lt;strong&gt;&lt;span class=&quot;hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline&quot;&gt;&lt;span class=&quot;whitespace-normal&quot;&gt;Donald Trump&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; &lt;/strong&gt;का करीबी सहयोगी माना जाता है और कई अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मिशनों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। हालांकि, हालिया घटनाएं यह संकेत देती हैं कि जटिल वैश्विक मुद्दों पर अमेरिका की बातचीत अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://mediumspringgreen-chimpanzee-105331.hostingersite.com/wp-content/uploads/2026/04/JD-Vance-usa-inner.webp&quot;&gt;&lt;img loading=&quot;lazy&quot; decoding=&quot;async&quot; class=&quot;aligncenter size-large wp-image-393&quot; src=&quot;https://mediumspringgreen-chimpanzee-105331.hostingersite.com/wp-content/uploads/2026/04/JD-Vance-usa-inner-1024x576.webp&quot; alt=&quot;JD Vance&quot; width=&quot;1024&quot; height=&quot;576&quot; srcset=&quot;https://gauravshalibharat.com/wp-content/uploads/2026/04/JD-Vance-usa-inner-1024x576.webp 1024w, https://gauravshalibharat.com/wp-content/uploads/2026/04/JD-Vance-usa-inner-300x169.webp 300w, https://gauravshalibharat.com/wp-content/uploads/2026/04/JD-Vance-usa-inner-768x432.webp 768w, https://gauravshalibharat.com/wp-content/uploads/2026/04/JD-Vance-usa-inner-150x84.webp 150w, https://gauravshalibharat.com/wp-content/uploads/2026/04/JD-Vance-usa-inner.webp 1400w&quot; sizes=&quot;auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1855&quot; data-end=&quot;2057&quot;&gt;राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ईरान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत में सफलता न मिलना और यूरोपीय राजनीति में अपेक्षित प्रभाव न दिखा पाना, दोनों ही अमेरिका की विदेश नीति के लिए चुनौतीपूर्ण संकेत हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;2059&quot; data-end=&quot;2207&quot;&gt;फिलहाल वेंस की टीम की ओर से इन घटनाओं पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर इन घटनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट गहराया: अमेरिका-ईरान तनाव से वैश्विक तेल सप्लाई पर खतरा</title><link>https://gauravshalibharat.com/world/strait-of-hormuz-crisis-deepens-us-iran-tensions-threaten-global-oil-supplies/</link><pubDate>April 13, 2026, 10:27 am</pubDate><image></image><category>दुनिया</category><excerpt>मध्य पूर्व में स्थित रणनीतिक जलमार्ग Strait of Hormuz एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय तनाव का केंद्र बन गया है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति को गंभीर संकट में डाल दिया है। रिपो...</excerpt><content>&lt;p data-start=&quot;502&quot; data-end=&quot;762&quot;&gt;मध्य पूर्व में स्थित रणनीतिक जलमार्ग &lt;span class=&quot;hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline&quot;&gt;&lt;span class=&quot;whitespace-normal&quot;&gt;Strait of Hormuz&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय तनाव का केंद्र बन गया है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति को गंभीर संकट में डाल दिया है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;764&quot; data-end=&quot;1152&quot;&gt;रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने पहले से ही कुछ शर्तों के आधार पर इस जलमार्ग पर नियंत्रण बढ़ाया हुआ था, जिसके तहत केवल चुनिंदा देशों के जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दी जा रही थी। कई जहाजों से टोल वसूली की खबरें भी सामने आई थीं। इसी बीच अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र से गुजरने वाले किसी भी जहाज को निशाना बनाया जा सकता है, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है।&lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;होर्मुज में टकराव चरम पर: ईरान और अमेरिका के फैसलों से समुद्री रास्ता संकट में&lt;/h2&gt;
&lt;p data-start=&quot;1154&quot; data-end=&quot;1439&quot;&gt;सूत्रों के अनुसार, इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता असफल होने के बाद अमेरिका ने अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव किया है और ओमान की खाड़ी में पनडुब्बियों और युद्धपोतों की तैनाती बढ़ाने की बात कही है। अमेरिकी नेतृत्व का कहना है कि ईरान को इस रणनीतिक मार्ग से आर्थिक लाभ नहीं उठाने दिया जाएगा।&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;इधर गड्ढा उधर खाई: होर्मुज में फंसा दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग&lt;/h3&gt;
&lt;p data-start=&quot;1441&quot; data-end=&quot;1731&quot;&gt;दूसरी ओर, ईरान का दावा है कि वह केवल सुरक्षा और नियंत्रण के उद्देश्य से कार्रवाई कर रहा है, जबकि अमेरिका इसे समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता पर हमला मान रहा है। इस टकराव के चलते इस मार्ग से गुजरने वाले लगभग 650 से अधिक मालवाहक जहाज फंस गए हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ रहा है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1733&quot; data-end=&quot;1894&quot;&gt;स्थिति को और जटिल इसलिए माना जा रहा है क्योंकि दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत फिलहाल ठप है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं।&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;होर्मुज में टकराव चरम पर: ईरान और अमेरिका के फैसलों से समुद्री रास्ता संकट में&lt;/h3&gt;
&lt;p data-start=&quot;1896&quot; data-end=&quot;2170&quot;&gt;रूस ने कूटनीतिक पहल करते हुए ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत शुरू कराने का संकेत दिया है। वहीं तुर्की बैकडोर चैनलों के जरिए दोनों पक्षों के बीच संवाद बहाल करने की कोशिश में लगा है। फ्रांस ने भी कहा है कि वह यूरोपीय देशों के साथ मिलकर इस संकट के समाधान में भूमिका निभा सकता है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;2172&quot; data-end=&quot;2341&quot;&gt;विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इससे वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;2343&quot; data-end=&quot;2509&quot;&gt;फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस संकटपूर्ण स्थिति में कौन मध्यस्थता कर दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाएगा और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से सामान्य करेगा।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>US: डोनाल्ड ट्रंप इंटरनेशनल एयरपोर्ट &amp;#8211; फ्लोरिडा के इंटरनेशनल एयरपोर्ट का बदलेगा नाम, नई पहचान</title><link>https://gauravshalibharat.com/world/us-floridas-international-airport-will-be-renamed-with-a-new-identity-donald-trump-international-airport-2/</link><pubDate>March 31, 2026, 9:14 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2026/03/69cb86d364756-west-palm-beach-313317983-16x9-1-300x169.webp</image><category>दुनिया</category><excerpt>अमेरिका के फ्लोरिडा में स्थित इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदला जाएगा. अब इस हवाई अड्डे का नाम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रखा जाएगा. फ्लोरिडा के सांसदों ने इस हफ़्ते वेस्ट पाम बीच में मौजूद इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर राष्ट्रपति डोनाल्...</excerpt><content>&lt;p&gt;फ्लोरिडा के पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रखने को मंजूरी मिल गई है. गवर्नर की मंजूरी और FAA अप्रूवल के बाद जुलाई में नाम बदल जाएगा.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अमेरिका के फ्लोरिडा में स्थित इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदला जाएगा. अब इस हवाई अड्डे का नाम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रखा जाएगा. फ्लोरिडा के सांसदों ने इस हफ़्ते वेस्ट पाम बीच में मौजूद इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रखने को मंज़ूरी दे दी है. नाम बदलने से जुड़ा यह फ़ैसला ट्रंप के परिवार की कंपनी द्वारा एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति के नाम के इस्तेमाल के लिए ट्रेडमार्क का आवेदन करने के कुछ ही दिन बाद लिया गया है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर &amp;#8216;राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप इंटरनेशनल एयरपोर्ट&amp;#8217; करने वाला यह बिल गुरुवार को राज्य की सीनेट से पास होने के बाद, अब फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस के हस्ताक्षर का इंतज़ार कर रहा है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अगर रिपब्लिकन गवर्नर इस पर हस्ताक्षर करके इसे कानून का रूप दे देते हैं और फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन से भी इसे मंज़ूरी मिल जाती है, तो जुलाई में नाम बदल जाएगा.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जल्द हो जाएगा आखिरी फैसला&lt;br /&gt;
&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
जब गवर्नर से पूछा गया कि क्या वे इस बिल पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहे हैं, तो उनकी प्रेस सेक्रेटरी, मौली बेस्ट ने शुक्रवार को बताया कि डेसेंटिस को अभी तक यह बिल मिला नहीं है. उन्होंने कहा, &amp;#8220;जब उन्हें यह बिल मिलेगा, तो वे इसके अंतिम रूप की समीक्षा करेंगे.&amp;#8221;&lt;br /&gt;
एयरपोर्ट का नाम बदलने की मंज़ूरी मिलने के कुछ ही दिनों बाद, ट्रंप ऑर्गनाइज़ेशन ने फ़ेडरल ट्रेडमार्क ऑफ़िस में आवेदन जमा किए. इन आवेदनों के ज़रिए ऑर्गनाइज़ेशन ने एयरपोर्ट्स पर और वहां मिलने वाली दर्जनों संबंधित चीज़ों, जैसे यात्रियों को लाने-ले जाने वाली बसों से लेकर छतरियों और फ़्लाइट सूट्स तक राष्ट्रपति के नाम का इस्तेमाल करने का विशेष अधिकार मांगा है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>जंग के बीच संकट में फंसे बांग्लादेश ने ट्रंप से लगाई गुहार, रूसी डीजल खरीदना है, भारत जैसे हमें भी छूट दो&amp;#8217;,</title><link>https://gauravshalibharat.com/world/we-want-to-buy-russian-diesel-give-us-a-discount-like-india-bangladesh-caught-in-a-crisis-amid-the-war-pleads-to-trump-2/</link><pubDate>March 31, 2026, 9:09 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2026/03/69cb7eeacedf0-tarique-rehman-donald-trump-russian-oil-315933443-16x9-1-300x169.webp</image><category>दुनिया</category><excerpt>बांग्लादेश ने बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका से रूसी डीजल की खरीद के लिए अस्थायी प्रतिबंध छूट की मांग की है. बांग्लादेश ने इस छूट की मांग करते हुए भारत का हवाला दिया है और अमेरिका से कहा है कि जिस तरह से भारत को छूट दी गई है, बांग्लादेश को भी ...</excerpt><content>&lt;p&gt;बांग्लादेश ने बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका से रूसी डीजल की खरीद के लिए अस्थायी प्रतिबंध छूट की मांग की है. बांग्लादेश ने इस छूट की मांग करते हुए भारत का हवाला दिया है और अमेरिका से कहा है कि जिस तरह से भारत को छूट दी गई है, बांग्लादेश को भी वैसी ही छूट मिले.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ईरान जंग के बीच तेल-गैस की बढ़ती कीमतों को देखते हुए अमेरिका ने भारत को रूसी तेल की खरीद के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट जारी की थी. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, बांग्लादेश ने इसी छूट का हवाला देते हुए अमेरिका से कहा है कि उसे दो महीने की मांग पूरी करने लायक डीजल चाहिए और वो इसे रूस के खरीदना चाहता है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;बांग्लादेश ने भारत को दी गई छूट जैसी ही व्यवस्था की मांग की है और प्रस्ताव रखा है कि वो अधिकतम 6 लाख मीट्रिक टन रूस ी डीजल आयात कर सकता है. ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों ने यह जानकारी दी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ऊर्जा और खनिज संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव मोनिर हुसैन चौधरी ने कहा, &amp;#8216;(अमेरिका के समक्ष) पत्र जमा कर दिया गया है और अब हम जवाब का इंतजार कर रहे हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ऊर्जा जरूरतों के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है बांग्लादेश&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
करीब 17.5 करोड़ आबादी वाला बांग्लादेश अपनी लगभग 95% ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है. इस कमी को पूरा करने के लिए सरकारी एजेंसियां लगातार अस्थिर वैश्विक बाजार का सहारा ले रही हैं. सरकार ने ईंधन की राशनिंग भी लागू की है, हालांकि ईद-उल-फितर के मौके पर कुछ पाबंदियों में ढील दी गई थी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;चौधरी ने कहा, &amp;#8216;हम अमेरिका, रूस, उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, अंगोला और ऑस्ट्रेलिया समेत हर संभव जगह से खरीदने की कोशिश कर रहे हैं.&amp;#8217;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;बांग्लादेश अपने मौजूदा साझेदारों से आयात भी बढ़ा रहा है. बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन अप्रैल में भारत की नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड से 40,000 मीट्रिक टन डीजल आयात करने जा रहा है. यह बांग्लादेश की मार्च की खरीद से लगभग दोगुना है.&lt;br /&gt;
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध ऊर्जा बाजार को और अधिक झटका देने वाला है. तेल आपूर्ति में रुकावट के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं और आयात पर निर्भर देशों पर भारी दबाव पड़ रहा है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>US: फ्लोरिडा के इंटरनेशनल एयरपोर्ट का बदलेगा नाम, नई पहचान- डोनाल्ड ट्रंप इंटरनेशनल एयरपोर्ट</title><link>https://gauravshalibharat.com/world/us-floridas-international-airport-will-be-renamed-with-a-new-identity-donald-trump-international-airport/</link><pubDate>March 31, 2026, 8:48 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2026/03/69cb86d364756-west-palm-beach-313317983-16x9-1-300x169.webp</image><category>दुनिया</category><excerpt>अमेरिका के फ्लोरिडा में स्थित इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदला जाएगा. अब इस हवाई अड्डे का नाम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रखा जाएगा. फ्लोरिडा के सांसदों ने इस हफ़्ते वेस्ट पाम बीच में मौजूद इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर राष्ट्रपति डोनाल्...</excerpt><content>&lt;p&gt;फ्लोरिडा के पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रखने को मंजूरी मिल गई है. गवर्नर की मंजूरी और FAA अप्रूवल के बाद जुलाई में नाम बदल जाएगा.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अमेरिका के फ्लोरिडा में स्थित इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदला जाएगा. अब इस हवाई अड्डे का नाम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रखा जाएगा. फ्लोरिडा के सांसदों ने इस हफ़्ते वेस्ट पाम बीच में मौजूद इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रखने को मंज़ूरी दे दी है. नाम बदलने से जुड़ा यह फ़ैसला ट्रंप के परिवार की कंपनी द्वारा एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति के नाम के इस्तेमाल के लिए ट्रेडमार्क का आवेदन करने के कुछ ही दिन बाद लिया गया है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर &amp;#8216;राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप इंटरनेशनल एयरपोर्ट&amp;#8217; करने वाला यह बिल गुरुवार को राज्य की सीनेट से पास होने के बाद, अब फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस के हस्ताक्षर का इंतज़ार कर रहा है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अगर रिपब्लिकन गवर्नर इस पर हस्ताक्षर करके इसे कानून का रूप दे देते हैं और फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन से भी इसे मंज़ूरी मिल जाती है, तो जुलाई में नाम बदल जाएगा.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जल्द हो जाएगा आखिरी फैसला&lt;br /&gt;
&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
जब गवर्नर से पूछा गया कि क्या वे इस बिल पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहे हैं, तो उनकी प्रेस सेक्रेटरी, मौली बेस्ट ने शुक्रवार को बताया कि डेसेंटिस को अभी तक यह बिल मिला नहीं है. उन्होंने कहा, &amp;#8220;जब उन्हें यह बिल मिलेगा, तो वे इसके अंतिम रूप की समीक्षा करेंगे.&amp;#8221;&lt;br /&gt;
एयरपोर्ट का नाम बदलने की मंज़ूरी मिलने के कुछ ही दिनों बाद, ट्रंप ऑर्गनाइज़ेशन ने फ़ेडरल ट्रेडमार्क ऑफ़िस में आवेदन जमा किए. इन आवेदनों के ज़रिए ऑर्गनाइज़ेशन ने एयरपोर्ट्स पर और वहां मिलने वाली दर्जनों संबंधित चीज़ों, जैसे यात्रियों को लाने-ले जाने वाली बसों से लेकर छतरियों और फ़्लाइट सूट्स तक राष्ट्रपति के नाम का इस्तेमाल करने का विशेष अधिकार मांगा है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>रूसी डीजल खरीदना है, भारत जैसे हमें भी छूट दो&amp;#8217;, जंग के बीच संकट में फंसे बांग्लादेश ने ट्रंप से लगाई गुहार</title><link>https://gauravshalibharat.com/world/we-want-to-buy-russian-diesel-give-us-a-discount-like-india-bangladesh-caught-in-a-crisis-amid-the-war-pleads-to-trump/</link><pubDate>March 31, 2026, 8:43 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2026/03/69cb7eeacedf0-tarique-rehman-donald-trump-russian-oil-315933443-16x9-1-300x169.webp</image><category>दुनिया</category><excerpt>बांग्लादेश ने बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका से रूसी डीजल की खरीद के लिए अस्थायी प्रतिबंध छूट की मांग की है. बांग्लादेश ने इस छूट की मांग करते हुए भारत का हवाला दिया है और अमेरिका से कहा है कि जिस तरह से भारत को छूट दी गई है, बांग्लादेश को भी ...</excerpt><content>&lt;p&gt;बांग्लादेश ने बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका से रूसी डीजल की खरीद के लिए अस्थायी प्रतिबंध छूट की मांग की है. बांग्लादेश ने इस छूट की मांग करते हुए भारत का हवाला दिया है और अमेरिका से कहा है कि जिस तरह से भारत को छूट दी गई है, बांग्लादेश को भी वैसी ही छूट मिले.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ईरान जंग के बीच तेल-गैस की बढ़ती कीमतों को देखते हुए अमेरिका ने भारत को रूसी तेल की खरीद के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट जारी की थी. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, बांग्लादेश ने इसी छूट का हवाला देते हुए अमेरिका से कहा है कि उसे दो महीने की मांग पूरी करने लायक डीजल चाहिए और वो इसे रूस के खरीदना चाहता है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;बांग्लादेश ने भारत को दी गई छूट जैसी ही व्यवस्था की मांग की है और प्रस्ताव रखा है कि वो अधिकतम 6 लाख मीट्रिक टन रूस ी डीजल आयात कर सकता है. ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों ने यह जानकारी दी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ऊर्जा और खनिज संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव मोनिर हुसैन चौधरी ने कहा, &amp;#8216;(अमेरिका के समक्ष) पत्र जमा कर दिया गया है और अब हम जवाब का इंतजार कर रहे हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ऊर्जा जरूरतों के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है बांग्लादेश&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
करीब 17.5 करोड़ आबादी वाला बांग्लादेश अपनी लगभग 95% ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है. इस कमी को पूरा करने के लिए सरकारी एजेंसियां लगातार अस्थिर वैश्विक बाजार का सहारा ले रही हैं. सरकार ने ईंधन की राशनिंग भी लागू की है, हालांकि ईद-उल-फितर के मौके पर कुछ पाबंदियों में ढील दी गई थी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;चौधरी ने कहा, &amp;#8216;हम अमेरिका, रूस, उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, अंगोला और ऑस्ट्रेलिया समेत हर संभव जगह से खरीदने की कोशिश कर रहे हैं.&amp;#8217;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;बांग्लादेश अपने मौजूदा साझेदारों से आयात भी बढ़ा रहा है. बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन अप्रैल में भारत की नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड से 40,000 मीट्रिक टन डीजल आयात करने जा रहा है. यह बांग्लादेश की मार्च की खरीद से लगभग दोगुना है.&lt;br /&gt;
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध ऊर्जा बाजार को और अधिक झटका देने वाला है. तेल आपूर्ति में रुकावट के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं और आयात पर निर्भर देशों पर भारी दबाव पड़ रहा है.&lt;/p&gt;
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