3 महीने से नहीं मिल पा रही सैलरी, कॉलेज बंद करने की नौबत, सैलरी में कटौती
उपराज्यपाल महोदय से स्थिति में हस्तक्षेप की मांग
नई दिल्ली : दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने केजरीवाल सरकार द्वारा फंडेड दिल्ली विश्वविद्यालय के 12 कॉलेजों के वित्तीय संकट पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने उपराज्यपाल श्री वी.के. सक्सेना से अनुरोध किया है कि इस संकट को दूर कराने के लिए वह हस्तक्षेप करें क्योंकि कॉलेजों के टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को कई महीनों से सैलरी नहीं मिल पा रही। कॉलेज अब शिक्षकों के वेतन में कटौती कर रहे हैं और खर्चे कम करने के लिए पढ़ाई के दिन भी कम किए जा रहे हैं।
बिधूड़ी ने कहा कि जब से दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार आई है, इन कॉलेजों को फंड जारी करने में लगातार अनियमितता बरती जा रही है। कॉलेजों के प्रिंसिपलों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है जिसकी शिकायत प्रिंसिपल एसोसिएशन द्वारा भी की गई है। दिल्ली सरकार इन कॉलेजों को इतना कम फंड जारी कर रही है कि उससे पूरा वेतन देना भी संभव नहीं है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए एरियर, प्रमोशन का एरियर और मेडिकल बिलों का भुगतान भी पूरी तरह रुका हुआ है। सैलरी न मिल पाने के कारण शिक्षक अब प्रॉविडेंड फंड से अपनी जमा पूंजी निकालने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा में क्रांति का झूठा दावा करने वाली दिल्ली सरकार के इस रवैये को देखते हुए दिल्ली सरकार के दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज ने तो फैसला लिया है कि अब सप्ताह में छह दिन की बजाय पांच दिन ही काम करेंगे। ऐसा इसलिए किया गया है कि एक दिन कॉलेज बंद रहेगा तो बिजली का बिल और दूसरे खर्चों में कमी आएगी और कॉलेज के वित्तीय संकट को कम किया जा सकेगा। स्वाभाविक है कि इससे छात्रों की पढ़ाई का नुकसान होगा लेकिन आर्थिक संकट को देखते हुए कॉलेज यह फैसला लेने के लिए मजबूर हैं। यही नहीं, इस कॉलेज ने यह फैसला भी किया है कि दिल्ली सरकार द्वारा फंड जारी न किए जाने के कारण अब असिस्टेंट प्रोफेसरों के वेतन में से 50-50 हजार रुपए और एसोसिएट प्रोफेसरों के वेतन में से 30-30 हजार रुपए की कटौती कर दी जाए। कटौती की यह राशि इन शिक्षकों को तब जारी की जाएगी जब दिल्ली सरकार पूरी ग्रांट जारी करेगी।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में दिल्ली सरकार के कुल 28 कॉलेज हैं जिनमें से 12 कॉलेजों का 100 प्रतिशत फंड दिल्ली सरकार द्वारा जारी किया जाता है। इसके अलावा 16 कॉलेजों का 5 प्रतिशत फंड दिल्ली सरकार देती है। हालत यह है कि दिल्ली सरकार 12 कॉलेजों का 100 प्रतिशत तो क्या 16 कॉलेजों का अपने हिस्से का 5 प्रतिशत फंड भी जारी नहीं कर पाई। बिधूड़ी ने पूछा है कि क्या दिल्ली सरकार के सामने कोई आर्थिक संकट है कि वह इन कॉलेजों का फंड जारी नहीं कर रही या फिर शिक्षा में क्रांति का दावा करने वाली यह सरकार सिर्फ झूठे प्रचार पर ही विश्वास करती है? उन्होंने उपराज्यपाल महोदय से अनुरोध किया है कि वह केजरीवाल सरकार पर दबाव बनाएं कि वह उच्च शिक्षा के इस आर्थिक संकट को दूर करे अन्यथा आने वाले दिनों और भी खराब स्थिति बन सकती है।