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दूध उत्पादों में मिलावटखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाने का आग्रह

अजमेर : राजस्थान में अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने भारत सरकार से दूध एवं दूध उत्पादों में हो रही मिलावटखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाने तथा जांच अभियान चलाने का आग्रह किया है। श्री चौधरी ने इण्डियन डेयरी एसोसिएशन (ईडा) की सेंट्रल एग्जीक्यूटिव कमेटी नयी दिल्ली की सातवीं बैठक में दूध एवम् दुग्ध उत्पाद के वर्तमान परिदृश्य देश और विदेश की स्थिति पर चर्चा में उक्त आग्रह किया। बैठक में उपस्थित डेयरी क्षेत्र के विशेषज्ञों ने अपनी-अपनी राय प्रकट की।
इस अवसर पर श्री चौधरी ने महत्वपूर्ण सुझाव दिये की दूध एवम् दुग्ध उत्पाद में जो मिलावटखोरी हो रही है, उसके विरुद्ध भारत सरकार कठोर कदम उठाये, क्योंकि इसके कारण दूध एव दुग्ध के उत्पाद के विपणन पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है, जिससे दूध उत्पादकों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है इसी प्रकार दूध एवं उसके उत्पाद की गुणवत्ता की भारत सरकार राष्ट्रीय स्तर पर जाँच अभियान चलायें।
श्री चौधरी ने कहा कि यदि किसान को दूध की क़ीमत अच्छी मिलेगी तो वह अपने आप जानवरों की अच्छी क़िस्म, उच्च गुणवत्ता का पशु आहार एवं चारे की व्यवस्था स्वयं कर लेगा। पशुपालकों को दूध के उचित भाव नहीं मिलने से इनकी युवा पीढ़ी पशुपालन से मुड़ कर अन्य व्यवसाय में रुचि लेना शुरू कर कर दिया है। श्री चौधरी ने यह भी माँग रखी कि देश में पशु आहार की बड़ती हुई क़ीमत को कम करने के लिए भारत सरकार को मोलासिस पर 28 प्रतिशत को कम करके 12 प्रतिशत की जाये।
उन्होंने यह भी बताया कि राजस्थान की पूर्ववर्ती गहलोत सरकार द्वारा राज्य में पशुपालकों के लिये भरपूर लाभकारी योजनायें लागू की जिसके कारण राजस्थान दूध उत्पादन के क्षेत्र में प्रथम स्थान प्राप्त किया लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा उपयुक्त योजनाओं के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं करने से पशुपालक असमंजस की स्थिति में है। दूध उत्पादकों को गत छह माह से मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना का भुगतान नहीं हुआ है तथा मिड-डे मील योजना में एक जनवरी से दूध बंद कर देने पर ज़िला संघों को एक किग्रा पाउडर पर 150 रुपये का घाटा हो रहा है जिससे ज़िला दुग्ध संघों को ख़रीद मूल्य कम करना पड़ रहा है।

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