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तेजस के इंजन की आपूर्ति में देरी के लिए अमेरिकी कंपनी जीई को भरना होगा जुर्माना

नई दिल्ली : स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के उन्नत संस्करण तेजस मार्क-1 ए के लिए इंजन की आपूर्ति में दो वर्ष की देरी पर अमेरिकी कंपनी जीई को अनुबंध की शर्तों के अनुसार जुर्माना देना होगा।
जीई को भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले तेजस मार्क-1 ए के लिए इंजनों की आपूर्ति मार्च 2023 में करनी थी, लेकिन ये इंजन अब तक भी नहीं मिले हैं। जीई ने अब इन इंजनों की आपूर्ति अगले वर्ष अप्रैल से करने की बात कही है।
इस समूचे मामले के जानकार उच्च पदस्थ सरकारी सूत्रों ने बताया है कि समय पर इंजन की आपूर्ति नहीं होने पर अनुबंध की शर्तों के अनुरूप जीई को जुर्माना देना होगा। उन्होंंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अलग-अलग समय पर अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिका के साथ इंजनों की आपूर्ति में देरी का मामला उठाया था। इसके बाद अमेरिकी कंपनी ने अगले वर्ष मार्च या अप्रैल से इंजनों की आपूर्ति शुरू करने को कहा है।
सूत्रों ने कहा कि इंजन की आपूर्ति नहीं मिलने का कारण काेई दबाव की राजनीति या अन्य कारण नहीं है बल्कि यह पूरी तरह से तकनीकी कारणों से नहीं हो पा रही है। एक कारण जीई को इन इंजनों के लिए दक्षिण कोरिया से मिलने वाले उपकरणों की कमी बताया जा रहा है।
तेजस मार्क -1ए देश में ही बनाये गये हल्के लड़ाकू विमान तेजस का उन्नत संस्करण है और वायु सेना को अपने लड़ाकू विमानोंं के बेड़े के लिए इन विमानों की बहुत अधिक दरकार है। वायु सेना के लिए ये विमान सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड एचएएल बना रहा है।
रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2021 में एचएएल के साथ 83 तेजस मार्क-1ए विमानों की खरीद के लिए 48000 करोड़ रुपये का सौदा किया था। इसके बाद एचएएल ने उसी वर्ष अगस्त में 99 विमानों के लिए इंजन एफ-404 की खरीद के लिए जीई के साथ करार किया था। जीई ने इंजनों की आपूर्ति मार्च 2023 में शुरू करने की बात कही थी।

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