अलवर। राजस्थान के अलवर जिले में प्रदूषण को लेकर ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) की लगी पाबंदियों से जहां एक और अलवर के उद्योगों पर संकट आ गया है वहीं हजारों मजदूर प्रभावित हो गए हैं।
शहर के विभिन्न उद्योग संघों की और से आज यहां पत्रकार वार्ता कर अलवर को एनसीआर से बाहर करने की मांग की। जिससे उद्योग चलाए जा सके। उद्योगपतियों ने बताया कि जिस तरह ग्रेप की पाबंदियां लगाई गई हैं। ऐसे हालात में उद्योग चलाना संकट भरा काम हो गया है, जो मापदंड तय किए गए हैं उसी मापदंडों के आधार पर अलवर में उद्योग चलाए जा रहे हैं लेकिन पाबंदियां लगातार ज्यादा बढ़ती जा रही हैं जिससे अब अलवर के उद्योग बंद होने के कगार पर हैं।
उन्होंने राज्य सरकार से भी मांग की कि अलवर के औद्योगिक क्षेत्र में इस संबंध में सकारात्मक सोचें और शहर को एनसीआर से बाहर किया जाए। उल्लेखनीय है कि ग्रेप के कारण अलवर में करीब 25000 मजदूर प्रभावित हो गए हैं और इन पाबंदियों का असर अलवर में काफी दिखाई दे रहा है।
अलवर में ईट भ_े, क्रेशर, खानों पर पहले ही काम बंद था और अब पूरी तरह बंद हो गए हैं। शहर में ग्रेप के कारण 2500 कंपनिया प्रभावित हुई हैं। एनसीआर में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर यहां के अधिकारी पूरी तरह विफल है। मत्स्य औद्योगिक संघ के सचिव विनोद शर्मा का कहना है कि मौसम में बदलाव कर सर सभी शहरों में होता है। दिल्ली में वाहनों की संख्या अधिक होने से वहां की हवा की गुणवत्ता बिगड़ती है और उसका असर अलवर तक दिखाई देता है।
अलवर में उद्योगों पर संकट
