नई दिल्ली : भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने शनिवार को कहा कि अध्यात्म से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो द्विवेदी ने आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा चलाए जा रहे ‘समृद्ध भारत की ओर समाधान आधारित मीडिया अभियान’ के अंतर्गत स्वास्थ्य विहार स्थित ब्रह्माकुमारी राजयोग केंद्र में ‘मीडिया संचार में सकारात्मक परिवर्तन के लिए मेडिटेशन’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी से सम्बोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा, “मन को ठीक करने के लिए, मानसिक स्वास्थ्य और आनंद प्राप्त करने के लिए ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ना होगा और ध्यान योग करना होगा। हम आनंद बाहर ढूढ़ रहे हैं जबकि वह हमारे भीतर है, आध्यात्मिक संगठन और गुरुजन ही हमें इसकी प्राप्ति कराते हैं। ”
द्विवेदी ने कहा, “हमें अपने मूल्यनिष्ठ व्यवस्था को बचाना होगा, समाज हमारा घर है, घर में कोई एक भी दुखी हो और बाकी खुश रहें, ऐसा नहीं होता, पड़ोसी भी दुखी होगा तो आप सुखी नहीं रह सकते। भविष्य की पीढ़ियों को हम ऐसा जीवन देना चाहते हैं, जहाँ हर व्यक्ति, हर प्राणी समान रूप से सुखी हो। स्वराज का अर्थ है, हर व्यक्ति को समान अवसर प्राप्त होना। इसके लिए हमें याद रखना होगा कि जिस तरह आप व्यवहार करते हैं, वही लौट कर आता है, यही प्रकृति, समाज का नियम है। संगत का असर पड़ता है, श्रेष्ठ और गुणवान व्यक्तियों की संगत अमृत समान है जो आप में सकारात्मक परिवर्तन लाती है। ” इस अवसर यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) के प्रधान संपादक अजय कौल ने कहा कि आजकल सोशल मीडिया, मीडिया की मर्यादा की लक्ष्मण रेखा पार कर चुका है, इसलिए उसे शांति और सकारात्मकता की भाषा सीखनी होगी।
उन्होंने कहा कि तनाव दूर करने के लिए ब्रह्माकुमारी जैसी आध्यात्मिक संस्था ही राजयोग मेडिटेशन सिखा कर मन को शांति प्रदान कर सकती है। प्रेरणादायी वक्ता ब्रह्माकुमारी पूनम ने इस अवसर पर कहा कि सकारात्मक परिवर्तन के लिए अपनी चेतना का परिवर्तन करना होगा और चेतना में परिवर्तन हमारे विचारों की गुणवत्ता पर निर्भर है। विचारों, संकल्पों को सकारात्मक बनाने के लिए संकल्प पैदा करने वाली आत्मा की पहचान और सर्वगुणों और शक्तियों के दाता परमात्मा से सम्बन्ध जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दिव्यता और अच्छी नीयत से कर्म क्षेत्र पर आते हैं तो अनेक लोगों के सहयोगी बन जाते हैं। इस अवसर पर कई और मीडिया संस्थानों से जुड़े लोगों ने अपने विचार रखे।