वक्तओं ने घुमक्कड़ों को अपने ज्ञान भंडार से किया सिंचित, देशभर से आए घुमक्कड़ों ने परस्पर साझा किए अनुभव
घुमक्कड़ी कहें कि सैर-सपाटा या कुछ और लेकिन यह एक जूनूनी कार्य है, जिसे हर कोई नहीं कर सकता। इस कार्य के लिए व्यक्ति के दिल में घर से निकलकर कहीं घूमने-विचरने वाला जज्बा होना चाहिए। जी हां, घुमक्कड़ मतलब घूमने वाला, विचरण करने में रूचि रखने वाला। अब आप उसे यायावर, परिभ्रमक, भ्रमणक, भ्रमणकारी, घुमंतू, सैलानी, यात्री, पर्यटक, यायावर आदि-इत्यादि चाहे कुछ भी कह-पुकार लें, लेकिन उसका काम एक ही है घुमक्कड़ी, सैर-सपाटा, आमोद-विहार अर्थात ‘पर्यटन’। ‘पर्यटन’ एक ऐसा शब्द जिसके मूल में अर्थ है, रोजगार है, कारोबार है, सामाजिक समरसता है, संस्कृति है और परस्पर व्यवहार है।
और ‘पर्यटन’ यानी ‘घुमक्कड़ी’ जैसे इसी महत्वपूर्ण विषय पर पर्यटकों के सोशल मीडिया (फेसबुक) समूह ‘घुमक्कड़ी जिन्दाबाद’ के तत्वावधान में बीते दिनों ‘घुमक्कड़ी सम्मेलन’ अर्थात यायावरी महोत्सव आयोजित किया गया। आभासी मंच फेसबुक के ‘घुमक्कड़ी जिन्दाबाद’ समूह की सदस्य शक्ति 50 हजार का आंकड़ा पार करने के उपलक्ष्य में यह कार्यक्रम ‘जीजेड-50 के’ नाम से आयोजित हुआ।
उत्तराखंड में रामनगर के जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र स्थित ढेला गांव के ‘अशोका टाइगर ट्रेल’ में आयोजित इस ‘घुमक्कड़ महोत्सव’ में देश भर के विभिन्न क्षेत्रों से आए ढाई सौ से अधिक घुमक्कड़ों ने भाग लिया। कार्यक्रम में शामिल होने को यूं तो बहुत से लोग देश के विभिन्न स्थानों से लम्बी यात्रा करके आए, लेकिन राहुल गौड़ कहें कि राहुल जहाजी उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। राहुल गौड़ लगभग 22 हजार किलोमीटर की यात्रा करके पेरू से इस सम्मेलन में प्रतिभाग करने पहुंचे।
घुमक्कड़ों को परस्पर मिलने-जुलने का यह अवसर उपलब्ध कराने वाले इस भव्य कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रख्यात ट्रैवल ब्लॉगर, समूह संचालक और ट्रैवल किंग इंडिया के संस्थापक नीरज कुमार, प्रसिद्ध घुमक्कड़ और आतिथ्य-पर्यटन उद्यमी ललित शर्मा, कमल रामवानी सारांश, गोविंद अग्रवाल, राहुल जीटीएम (गौतम) आदि के मार्गदर्शन में ‘सफर और नगमे’ स्टार्टअप के सस्थापक अर्पण शर्मा और सह संस्थापक श्रेया के साथ उनकी पूरी टीम ने अथक परिश्रम किया।
एक से बढ़कर एक, ठेठ घुमक्कड़ हुए इकठ्ठा
‘घुमक्कड़ी सम्मेलन’ ‘जीजेड-50 के’ में उल्लेखनीय यह रहा कि यहां हर कोई कहने वाला था और हर कोई सुनने वाला। यहां एक से बढ़कर एक ठेठ घुमक्कड़ उपस्थित रहा। हर एक अपनी-अपनी अलग विशेषता लिए हुए, कोई समुंद्री जहाजी तो कोई अंटलांटिका तक घूमने वाला तो कोई केदारनाथ धाम यात्रा की आपदा के अनुभव सुनाने वाला। कोई एवेरस्ट पर्वत की रोमांचक यात्रा की गाथा कहने वाला। कोई पहाड़ों की चोटियों पर चढ़ने का का शौकीन तो कोई मरुस्थली रेत के टीलों को पार करने वाला। कोई साइकिलिस्ट तो कोई पैदल घुमक्कड़ी का जुनूनी। कोई ब्लॉगर, कोई फोटोग्राफी में पारंगत तो कोई वीडियोग्राफी में सिद्धहस्त। कोई किस्सागोई या काव्य (कहन कला) का खिलाड़ी तो कोई विकट लिख्खाड़ (लेखन में माहिर)। कोई आतिथ्य-पर्यटन उद्यमी तो कोई भ्रमण सलाहकार। कोई धार्मिक यात्री तो कोई मनमौजी सैलानी। कोई फक्कड़ घुमक्कड़ तो कोई दरियादिल पर्यटक। कोई खान-पान का आनंद लेने वाला तो कोई योगी-सन्यासी। इतनी विभिन्नता होते हुए भी सब में एकता-एकजुटता का भाव, जात-धर्म, आयु-लिंग भेद से कोसों दूर। दूसरे शब्दों में कहें तो घाट-घाट का पानी पी चुके ठेठ घुमक्कड़ एक ही छत तले जुटे।

उत्तराखंड की वादियों के आनंदमय वातावरण में बहुआयामी सम्मेलन
उत्तराखंड की वादियों के आनंदमय वातावरण में हुआ यह बहुआयामी सम्मेलन शानदार रहा। सांस्कृतिक कार्यक्रम और सुस्वादु कुमाऊंनी भोजन को सभी ने सराहा। इस भव्य आयोजन में आउटडोर एक्टिविटीज, संगीत कार्यक्रम सभी ने भरपूर आनंद लिया। छोलिया नृत्य की प्रस्तुति शानदार रही, रोहित नंदा और उनकी मंडली विशेषकर मुख्य पुरुष कलाकार बहुत गुणी और ऊर्जावान थे। प्रकृति प्रेमी, योगी एवं जीवन प्रबंधक आचार्य भूपेन्द्र शुक्लेश ने प्रगतिशील विश्रांति (प्रोग्रेसिव रिलेक्सेशन) तकनीक का अभ्यास कराया। गजल संध्या के सुरीले कार्यक्रम में भारी वर्षा ने विध्न डाल दिया। हालांकि रात्रि में हुए मिलन समारोह में घुमक्कड़ों की बहुमुखी प्रतिभा देखने को मिली। गीत-संगीत-काव्य के इस ‘स्वतंत्र सत्र’ में अनेक गायक-शायर उभर कर सामने आये। एक से बढ़कर एक कवि, गायक और बेहतरीन नर्तकों ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा प्रदर्शित कर समां बांध दिया। गायक निहाल ने जब गिटार की धुन पर तराने छेड़कर उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।
महफिल सजती रही, गाना-बजाना-शायराना अंदाज चलता रहा। असीम-अपार आनंद के इस सरोवर में सभी रह-रहकर गोते लगाते रहे और यह कार्यक्रम देर रात्रि अपने अंतिम सोपान पर पहुंचा।
घुमक्कड़ों ने साझा किए रोमांचक-सुखद अनुभव, खूब हुआ ज्ञानवर्धन
उत्तराखंड की वादियों के आनंदमय वातावरण में सभी ने न केवल भरपूर आनंद लिया, बल्कि विचारों-अनुभवों को जान-सुनकर ज्ञानवर्धन भी खूब हुआ। सौम्य-शांत और आनंदमय वातावरण में हम-खयाल लोगों से मिलना-जुलना अच्छा रहा। इकट्ठा हुए घुमक्कड़ों ने अपने-अपने घुमक्कड़ी के अनुभवों का आदान-प्रदान किया। कुछ लोगों ने घुमक्कड़ी के अपने-अपने सर्वश्रेष्ठ अनुभव सुनाए-बताए। रोमांचक और सुखद अनुभवों को साझा करने के साथ ही गुदगुदाने वाली कहानियों से अपनी कहन कला का बखूबी प्रदर्शन करते हुए खूब मनोरंजन किया।
इस अवसर पर घुमक्कड़ों ने जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में ‘जंगल सफारी’ का आनन्द भी लिया। सभी इच्छुक घुमक्कड़ जिप्सियों पर सवार हो ढेला द्वार (ढेला गांव) से जिम कॉर्बेट में प्रवेश कर वन्यजीव देखने पहुंचे। हालांकि हाथियों, हिरनों, बंदरों और लंगूरों के झुंड, अनेक प्रजाति की चिड़िया तो देखने को मिलीं, लेकिन ‘बाघ’ देखने से वंचित रहे और उसके ‘पग चिन्ह’ ही देख सके।
ढेला गांव और आस-पास की प्राकृतिक सुन्दरता ने सभी का मनमोह लिया। उस पर्वतीय-वन्य वातावरण, आनन्दित करती वायु, चहुंओर फैली हरियाली, कीट-पतंगों का मल्हार गायन, नील गगन में छाए मेघ, आकाश को अचानक अच्छादित कर बादलों का बरसना, बारिश के बाद मिटटी से आती सौंधी-सी मनमोहक सुगंध, जंगल के रहस्यमयी सन्नाटे को चीरते हुए रह-रहकर आते वन्य जीवों के रोमांचकारी स्वर आदि-इत्यादि के इस अनुभव को शब्दों में कहना-बताना, प्रकट करना बहुत कठिन है, क्योंकि इसे केवल और केवल अनुभव ही किया जा सकता है।
देश भर के विभिन्न राज्यों से रही गौरवमयी उपस्थिति
सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात आदि देश भर के विभिन्न राज्यों से लगभग 250 घुमक्कड़ों की गौरवमयी उपस्थिति रही। इनमें प्रमुख रूप से हिमाचल से ललित शर्मा, हरिद्वार-ऋषिकेश से आचार्य भूपेन्द्र शुक्लेश और गोविंद अग्रवाल, भीलवाड़ा से कमल रामवानी सारांश, मनाली से राहुल जीटीएम (गौतम), माधवी गौतम, विकास नगर (देहरादून) से संजय कुमार जैन, ‘घुमक्कड़ी जिन्दाबाद’ समूह के 50 हज़ारी सदस्य उदयपुर राजसमन्द के रतन बागवान, दिल्ली से नितिन तोमर, स्वर्णा शरद राव, अमित धल्ल, नितिन गोयल, लखनऊ से शैलेष कुमार,
गाजियाबाद से दिनेश मावी, सहारनपुर से विकास जैन, बिजनौर से सी.एस. पुलकित गुप्ता, अयोध्याजी से सूरज मिश्रा, मुरादाबाद-संभल के मयंक तिवाना, बदायूं से राहुल गुप्ता, पुणे-तलेगाव से गणेश बुदखाले, आगरा के नितिन अग्रवाल, बरेली के हरीश वर्मा, हरवेन्द्र सिंह ‘हैरी’, अलीगढ़ से एम.पंकज, झुंझुनूं नवलगढ़ से सुनील शर्मा, छत्तीसगढ़ वाले विवेक शुक्ला के अलावा दीप्ति सिंह, मुक्ता व्यास, विजया सिंह, पल्लवी, शालू, कांता शर्मा, मयंक, जतिन, हिमांशु कुमार, सूरज मिश्रा, गौरव मिश्रा, हरबेन्द्र सिंह, धरम लाकड़ा, हिमांशु कुमार, हेमराज सिंह सम्भरवाल, राजेश कुमार लोहानी, हरीश यादव, शालिनी गुप्ता, अमित गुप्ता, पल्लवी गुप्ता, आसिफ खान, प्रदीप, धर्मेंद्र पाचुनकर, शैलेष कुमार, गौरव मिश्रा, सत्यम तिवारी, अश्विनी चौहान, हिमांशु कुमार, कल्पदीप माथुर, आशीष, अनूप, नितिन गोयल, मीता बक्शी, अरूण कुमार पूनिया, संदीप प्रताप सिंह, राजेंद्र वशिष्ठ, अरविन्द शर्मा, जसवंत सिहं, शौकत दिलावर खान बेरी, ध्यान उमेश आदि के नाम उल्लेखनीय हैं।
पर्यटन है क्षेत्रीय और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का मेरुदंड : इमरान खान
मुख्य कार्यक्रम में उपस्थित ‘घुमक्कड़ी जिन्दाबाद’ परिवार के सदस्यों को वक्तओं ने अपने ज्ञान भंडार से सिंचित किया। ज्ञानवर्धन का यह सत्र बहुत अच्छा रहा। सम्मेलन के प्रमुख वक्ता अपने-अपने क्षेत्र के महारथी हैं, उनके सुनना अत्यंत रोचक और प्रेरक रहा। मुख्य कार्यक्रम का शुभारंभ सम्मेलन में आए गणमान्य घुमक्कड़ों का स्वागत के साथ हुआ। आयोजक मंडल की ओर से सभी वक्ताओं को स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनका अभिनन्दन किया गया।
संबोधन-सत्र का आरंभ आभासी समूह ‘घुमक्कड़ी जिन्दाबाद’ के संस्थापक-संचालक नीरज मुसाफिर (जो नीरज कुमार और नीरज जाट आदि नामों से भी लोकप्रिय हैं) के उदबोधन से हुआ। नीरज मुसाफिर ने अपने खांटी देशी अंदाज में अपने अनुभव सुनाए-बताए। तत्पश्चात मुख्यवक्ता वरिष्ठ प्रकृतिशास्त्री इमरान खान ने माइक संभाला और जिम कॉर्बेट के विषय में रोचक जानकारियां दीं। साथ ही असम में अपने कार्यकाल के अनुभव सुनाए और जंगली जीवन के बारे में व्यापक प्रकाश डाला। इमरान खान ने पर्यटन, पर्यावरण और वन्यजीवन को परस्पर जोड़ते हुए अपने अनुभव सुनाए। उन्होंने पर्यटन को सबंधित क्षेत्रों संग राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की मेरुदंड बताया।
कैप्टन सुदीप विजय स्वयं एक घुमक्कड़ हैं और देश-विदेश के विभिन्न प्रसिद्ध स्थलों के साथ ही अंटार्टिका की यात्रा का भी अनुभव कर चुके हैं। कैप्टन सुदीप ने अपनी अंटार्कटिका यात्रा के रोमांचक अनुभव बताए और केदारनाथ आपदा के समय किए हुए अपने बचाव अभियान के विषय में जानकारी दी। केदारनाथ आपदाकाल का यह अनुभव रोंगटे खड़े कर देने वाला था। समाजसेवा क्षेत्र में कार्य कर रहे पैदल घुमक्कड़ विपुल सिंह ‘तपस’ ने अपने सफर के किस्से-अनुभव सुनाए।
कमल रामवानी सारांश ने चुटीले अंदाज में संक्षेप में अपने यात्रा वृतांत सुनाए। ललित शर्मा ने गुदगुदाने वाले किस्से-कहानियों ने भरपूर मनोरंजन करने के साथ ही अपने अनेकानेक अनुभवों से अवगत कराया। पेरु से आए राहुल गौड़ ने अपनी समुंद्री यात्राओं के अनुभव के किस्से सुनाकर श्रोताओं को रोमांचित-अचंभित कर दिया।
सम्मेलन में आए पर्यटन उद्यमियों ऋषिकेश के गोविंद अग्रवाल और मनाली के राहुल जीटीएम (गौतम) आदि ने भी अपने अनुभव साझा किए। मुख्य कार्यक्रम की समय सीमा के कारण बहुत से लोगों के विचार नहीं सुने जा सके, लेकिन बहुत अच्छा आयोजन रहा। कुल मिलाकर घुमक्कड़ी सम्मेलन-कभी न भूलने वाला अनुभव रहा। संचालन का दायित्व अर्पण शर्मा ने सफलता पूर्वक संभाला। कार्यक्रम को आभासी दुनिया के मंच पर जीवंत प्रसारित (फेसबुक लाइव टेलीकास्ट) करने का दायित्व गोविन्द अग्रवाल ने निभाया।
”अपने उद्देश्य में सफल रहा सम्मेलन, अब निरंतर कराने का है विचार”
सम्मेलन के प्रमुख सूत्रधार नीरज कुमार ‘मुसाफिर’ ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर के घुमक्कड़ों के मध्य मेलजोल बढ़ाना, एक-दूसरे के अनुभव साझा कराना और साथ ही साथ पर्यटन उद्योग से जुड़े या जुड़ने के इच्छुक उद्यमियों को व्यवसायिक संभावनाएं तलाशने को परस्पर मिलाने, सामंजस्य स्थापित करने-कराने का एक बहुआयामी मंच उपलब्ध कराना। घुमक्कड़ी, लेखन, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, कम्युनिकेशन स्किल समेत विभिन्न विधाओं को करियर या शौकिया अपनाने के इच्छुक लोगों का मार्गदर्शन कर उन्हें प्रोत्साहित करना रहा। उन्होंने दावा किया कि सम्मेलन अपने उद्देश्य में सफल रहा। ‘घुमक्कड़ी जिन्दाबाद’ परिवार का यह सम्मेलन (आयोजन) बिल्कुल वैसा ही रहा जैसा कि इसका प्रयोजन था, इससे हर घुमक्कड़ को वही मिला जो असल में वह चाहता था। किसी को जिम कॉर्बेट घूमना था, किसी को नए दोस्त बनाने थे, किसी को व्यापारिक संभावनाएं तलाशनी थीं। किसी को दूसरे घुमक्कड़ों के अनुभवों से दो-चार होना था और अपने-अपने रोमांचक किस्से सुनाने थे। किसी को उत्तराखंड की वादियों का आनन्द लेना था। किसी को आभासी दुनिया के मित्रों से रूबरू होना था। कार्यक्रम की सफलता से प्रेरित-स्फूर्त नीरज कुमार का कहना है कि भविष्य में ऐसे आयोजन अब निरंतर कराने की योजना को मूर्त रूप देने की तैयारी है।
घुमक्कड़ों ने स्मृति स्वरूप एक-दूसरे को दिए उपहार-भेंट
‘जीजेड-50 के’ आयोजन की एक और विशेष बात यह रही कि बहुत से प्रतिभागी अपने साथ स्मृति स्वरूप में पुस्तकें, की-चेन, कॉफी मग आदि कुछ न कुछ उपहार-भेंट, एक-दूसरे को देने के लिए लेकर आए। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध खाद्य उत्पाद विशेषकर श्रीनाथजी के लड्डू, जयपुरी घेवर, अयोध्या के आंवला लड्डू-बर्फ़ी, पश्चिमी उप्र की प्रसिद्ध बालुशाही, महाराष्ट्र की भाखरवाड़ी (पुणे की ‘चितले बाकरवड़ी’), आगरे का पेठा, झुंझुनूं के पेड़े आदि मिठाईयां और विकास नगर का अदरक, भीलवाड़ा की कचौड़ी, नकमीन शामिल रहीं। देश भर से आए सभी घुमक्कड़ आपस में मिल-जुलकर, घुल-मिलकर अत्यंत आनंदित हुए और मधुर अनुभव के साथ आगामी आयोजनों में उपस्थिति सुनिश्चित कराने के वादे के साथ जिम कार्बेट क्षेत्र से अपने गंतव्यों को प्रस्थान कर गए। बेशक समय कुछ कम रहा हालांकि इस दौरान भी हासिल करने वालों को भरपूर मिला, यूं कहें कि झोला भर के मिला। आभासी मंच के मित्र-परिचित कुछ ऐसे मिले मानो कि कई वर्षों से एक-दूसरे को जानते-पहचानते हों। आभासी दुनिया एक मंच से बाहर पहली बार एक-दूजे से रूबरू हुए अनेक आभासी मित्रों के बीच अब तो वास्तविक मित्रता भी हो गई है। सभी ”हमारे यहां अवश्य आना” कह एक-दूसरे को आमंत्रित कर अपने-अपने क्षेत्रों में बुलाने को आतुर दिखे।
एकल घुमक्कड़ महिलाओं ने भी किया प्रतिभाग
इस भव्य आयोजन में स्वर्णा शरद राव, दीप्ति कुमार, मीता बक्शी, दीप्ति ठाकुर, आशा, मुक्ता व्यास और सुनीता राजपाल आदि लगभग एक दर्जन ऐसी महिलाओं ने भी प्रतिभाग किया जो कि एकल घुमक्कड़ (सोलो ट्रेवलर) के रूप में जानी-पहचानी जाती हैं। यह अपने आप में न केवल एक विशेष, बल्कि महत्वपूर्ण बात है। सभी महिला घुमक्कड़ों ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और भरपूर आनंद उठाया।
(यह लेख सोशल मीडिया समूह ‘घुमक्कड़ी जिन्दाबाद’ के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं पर आधारित है। सभी छायाचित्र ‘घुमक्कड़ी जिन्दाबाद’ के सौजन्य से प्राप्त किए गए हैं।)
