बस्ती : उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले मे 14 कोसी परिक्रमा को लेकर सोमवार 20 नवम्बर से मंगलवार 21 नवम्बर रात्रि 11 बजे तक अयोध्या से बस्ती तक रूट डायवर्जन रहेगा। आधिकारिक सूत्रो ने रविवार को यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि 14 कोसी परिक्रमा और कार्तिक पूर्णिमा स्नान मेला को लेकर अयोध्या मे भारी भीड़ होने की सम्भावना है। प्रत्येक वर्ष भारी संख्या मे श्रद्वालुओं को रेला आता है। इस सब को देखते हुए अयोध्या की तरफ जाने वाले सभी मार्गो को 20 नवम्बर सोमवार की रात्रि 10 बजे से मंगलवार 21 नवम्बर रात्रि 11 बजे तक रूट डायवर्जन रहेगा।
इसके लिए यातायात पुलिस द्वारा आवश्यक दिशा निर्देश प्रदान किया गया है।बस्ती और गोरखपुर से आने वाले वाहनों को बस्ती से कलवारी ,टांडा होते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से लखनऊ की ओर भेजा जायेगा।प्रयागराज,सुल्तानपुर से अयोध्या होकर बस्ती तथा गोरखपुर जाने वाले वाहनों को सुल्तानपुर से अम्बेडकर नगर ,कलवारी,नगर बस्ती से गोरखपुर की ओर डायवर्जन रहेगा। कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर 26 नवम्बर को सुबह 6 बजे से 27 नवम्बर को शाम 5 बजे तक डायवर्जन लागू रहेगा।
लखनऊ से गोरखपुर और बस्ती जाने वाले वाहनों का बाराबंकी से जरवल रोड,मनकापुर गोण्डा,बभनान से हर्रैया,बस्ती से गोरखपुर की ओर डायवर्जन किया जायेगा,बाराबंकी जाने वाले वाहनों को नबाबगंज रोक दिया जायेगा इन वाहनों को गोण्डा से रामनगर होते हुए बाराबंकी तथा लखनऊ की ओर भेजा जायेगा।
सनातन धर्म के विद्वान पं0 विशाल पाण्डेय ने 14 कोसी परिक्रमा के बारे मे विस्तार पूर्वक बताते हुए कहा है कि 14 कोसी परिक्रमा सनातन धर्म में धार्मिक महत्ता अधिक है इसको करने के लिए लोग समूह बना कर जाते है। इस 14 कोसी परिक्रमा की धार्मिक मान्यता है कि 14 लोक में जीव को भ्रमण करना पड़ता है। लोग नियम पूर्वक 14 कोसी परिक्रमा धार्मिक स्थल अयोध्या, मथुरा सहित अन्य स्थानो पर भी करते हैं।
परिक्रमा के कई कारण भी है धार्मिक भी है, वैज्ञानिक भी है और व्यावहारिक की है। इस 14 कोस की परिक्रमा में तीनों प्रकार के गुण व्याप्त हैं व्यवहारिक का तात्पर्य है कि सभी लोग मिलकर एक साथ परिक्रमा करते हैं , वैज्ञानिक का तात्पर्य है कि चलने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है, और धार्मिक दृष्टि से 14 कोस की परिक्रमा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और कई पीढि़यों के कष्ट कट जाते हैं।
