सिरसा : हरियाणा में बढते पर्यावरण प्रदूषण पर रोक के लिए पराली जलाने की घटनाओं पर पूर्ण अंकुश जरुरी है। पर्यावरण प्रदूषण को लेकर उच्चतम न्यायालय सख्त है। उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने बताया कि जिला में पराली जलाने की घटनाओं को लेकर अब तक 17 एफआईआर दर्ज की गई हैं। उपायुक्त गुप्ता जिलेभर में शुक्रवार को पराली जलाने की घटनाओं पर पूर्ण अंकुश को लेकर कृषि अधिकारियों और थाना प्रभाारी की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिला में कहीं पर भी फसल अवशेष जलाने की घटनाएं न हों, इसके लिए अधिकारी खेत में रहकर फसल कटाई एरिया में निगरानी रखें। कहीं पर भी आगजनी की सूचना मिलती है, तुरंत संबंधित के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाएं।
श्री गुप्ता ने कहा कि जिन भी अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी इस कार्य में लगाई गई है, वह खेत में रहकर काम करें। कहीं पर भी फसल अवशेष जलाने की घटना की सूचना मिलती है, तो तुरंत उसकी सूचना दें। संबंधित के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाए। गांव स्तर पर कमेटी के साथ तालमेल बनाकर रखें। संबंधित थाना प्रभारी को साथ लेकर पराली जलाने वालों के खिलाफ कार्यवाही अमल में लाई जाए।
उपायुक्त ने कहा कि जहां पर फसल कटाई हो रही है उस एरिया में विशेष निगरानी रखी जाए। इसके साथ ही किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जागरुक करें और पराली प्रबंधन के कृषि यंत्रों उपलब्ध करवाए जाएं। जिला में पराली जलाने की घटनाओं को शून्य तक ले जाने के लक्ष्य के साथ काम किया जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों से कहा कि वह पराली जलाने की घटनाओं को लेकर गंभीरता से कार्य करें। इस कार्य में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने बताया कि जिला में पराली जलाने की घटनाओं को लेकर अब तक 17 एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने बताया कि जिला में पराली जलाने पर पूर्ण अंकुश को लेकर प्रशासन पूरी गंभीरता से काम कर रहा है। प्रदूषण को रोकने के लिए पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश जरुरी है। इसके लिए जिलावासियों विशेषकर किसानों का सहयोग जरुरी है। किसान पराली को जलाने की बजाए उसका प्रबंधन करें।
फसल अवशेष जलाने को लेकर 17 प्राथमिकी दर्ज
