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नाबालिग के अपहरण व दुष्कर्म मामले में 20 साल की सजा

शिमला : हिमाचल प्रदेश की स्थानीय अदालत ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म के दोषी को विभिन्न धाराओं में 20 वर्षों के कारावास की सजा के साथ जुर्माने की सजा सुनाई। जिला न्यायवादी मण्डी कुलभूषण गौतम ने बताया कि नौ जुलाई 2018 को पीड़िता की मां ने अपने पति के साथ पुलिस थाना औट में शिकायत दर्ज करवाई कि और एक रिश्तेदार उनके घर आया था और वह थोड़ी देर बाद अपने घर के लिए निकल गया और उसी दौरान सात वर्ष की पीडिता भी खेलने के लिए घर से निकल गयी।

जब पीड़िता काफी देर तक घर नहीं आयी तो शिकायतकर्ता और उसका पति पीड़िता को ढूंढने के लिए निकले और काफी देर तक ढूंढने के बाद पीडिता उनको पास के एक स्कूल के पास मिली। वह अचेत हालत में थी और वह सारी रात अचेत रही जब सुबह उसको होश आया। तो पूछने पर उसने बताया कि जो रिश्तेदार पिछले दिन उनके घर आया था। वह उसको गोद में उठाकर ले गया और उसके साथ गलत काम किया।
शिकायतकर्ता की शिकायत के आधार पर दोषी के खिलाफ थाना औट, जिला मण्डी में अभियोग मामला दर्ज हुआ था। छानबीन सहायक उप निरीक्षक श्याम लाल, थाना औट, जिला मण्डी द्वारा अमल में लाई थी। छानबीन पूरी होने पर थानाधिकारी थाना औट, जिला मण्डी द्वारा चालान को अदालत में दायर किया था। उक्त मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत में 27 गवाहों के ब्यान कलम बंद करवाए थे। उक्त मामले में सरकार की तरफ से मामले की पैरवी लोक अभियोजक, चानन सिंह द्वारा की गई।
अभियोजन एवं बचाव पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उपरोक्त दोषी को भारतीय दण्ड सहिंता की धारा 376 (एबी) के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ 20,000 जुर्माने की सजा और धारा 363 के तहत पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ 2,000 जुर्माने की सजा, धारा 366 के तहत पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ 2,000 जुर्माने की सजा और पोक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ पांच हजार जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने की सूरत में अदालत ने दोषी को दो से छह माह तक अतिरिक्त कारावास की सजा भी सुनाई।

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