डांग : आचार्य देवव्रत ने डांग जिले के आहवा में किसानों और गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के साथ प्राकृतिक कृषि पर गुरूवार को संवाद करते हुए कहा कि डांग जिले में प्राकृतिक कृषि का दायरा बढ़ाने के लिए एक शिक्षित किसान को मास्टर ट्रेनर की तालीम दी जाए। उसके द्वारा दस गांवों के किसानों को तालीम दी जाए। फिर जिले के 311 गांवों के लिए 30 मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएं।
श्री देवव्रत ने इस अवसर पर कहा कि किसानों को जागरूक करके समग्र जिले के किसान प्राकृतिक कृषि अपनायें, इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने आज यह बात डांग के आहवा सर्किट हाउस में जिले के किसानों, एनजीओ और आत्मा प्रोजेक्ट के अधिकारियों के साथ प्राकृतिक कृषि संबंधी संवाद के दौरान कही। उन्होंने यहां उपस्थित सभी लोगों से जिले में प्राकृतिक कृषि का दायरा बढ़ाने के लिए वाहक बनने का अनुरोध भी किया।
राज्यपाल ने इस परिपेक्ष्य में कहा कि यहां के आदिवासी पहले से ही प्राकृतिक कृषि कर रहे हैं। उनके साथ जिले के तमाम गांवों के किसान 100 फीसदी प्राकृतिक कृषि अपनाएं, इसके लिए उन्हें जागरूक करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मास्टर ट्रेनर किसानों द्वारा अन्य किसानों को प्राकृतिक कृषि के ठोस आयोजन और प्रशिक्षण के साथ तालीम देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तालीम के साथ ही जीवामृत, घनजीवामृत किस प्रकार बनाया जाता है इसके उपयोग से क्या लाभ होते हैं, इसका भी किसानों को मार्गदर्शन दिया जाए।
उन्होंने इसके लिए प्रत्येक किसान का डेटाबेज तैयार करने, इसकी वीडियोग्राफी करने और रजिस्टर मैंटेन करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने प्राकृतिक कृषि के लिए किसानों में जागरूकता लाने के लिए अभियान शुरु करने और किसान सम्मेलन आयोजित करने का मार्गदर्शन दिया। इस संवाद में सोडमाल के सुरेशभाई कालुभाई ने उनके द्वारा नारियल की खेती में जीवामृत के सफल प्रयोग की जानकारी दी और इससे उनको भारी उत्पादन मिलने की बात कही। साथ ही कहा की जीवामृत का उपयोग बहुत ही सफल रहा है। बैठक में सांसद केसी. पटेल, उप सचेतक विजयभाई पटेल, जिला पंचायत प्रमुख मंगलभाई गावित, कलक्टर डॉ. विपिन गर्ग, उप वन संरक्षक रविप्रसाद, आत्मा के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संजय भगोरिया सहित कई किसान, एनजीओ के प्रतिनिधिगण औए आत्मा प्रोजेक्ट के अधिकारी उपस्थित थे।
डांग जिले के लिए 30 मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएं
