20 कलाकार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित
नई दिल्ली : ललित कला अकादमी द्वारा शुरू की गई 63वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी (एनईए) के शुभारंभ के साथ ही आज यहां देश भर के 20 कलाकाराें को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अभिनेता मनोज जोशी ने इस प्रदर्शनी का शुभारंभ किया और इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता अकादमी के अध्यक्ष प्रो.वी.नागदास ने की। इस समारोह में मंगोलिया के राजदूत डी गनबोल्ड, इजरायल के राजदूत नाओर गिलोन, इजरायल दूतावास की संस्कृति अटैचे सुश्री रेयूमा मंत्ज़ुर, हंगरी सांस्कृतिक केंद्र दिल्ली के डायरेक्टर/काउंसलर संस्कृति सुश्री डॉ मारियन एर्डो, अल्जीरिया के राजदूत डॉ अली आचोई, स्पेन के राजदूत जोसे मारिया रिडाओ डोमिंग्गेज़ जैसी हस्तियां मौजूद थी।
सभी बीस राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कलाकारों को शॉल, प्रशस्ति प्रमाण पत्र और दो लाख रुपये से सम्मानित किया गया। सम्मानित कलाकारों में अभिप्सा प्रधान (दिल्ली), आकाश विश्वास (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह), अनामिका सिंह (उत्तरप्रदेश), अनस सुल्तान (उत्तर प्रदेश), आरती पालीवाल (दिल्ली), भाऊराव बोदाडे (मध्यप्रदेश), चुगुली कुमार साहू (ओडिशा), दीपक कुमार (हरियाणा), दीपक कुमार (उत्तर प्रदेश), जान्हवी खेमका (उत्तर प्रदेश), किरण अनिला शेरखाने (कर्नाटक), कुमार जिगीशु (दिल्ली), महेंद्र प्रताप दिनकर (दिल्ली), नागेश बालाजी गाडेकर (गुजरात), नरोत्तम दास (ओडिशा), पंकज कुमार सिंह (उत्तर प्रदेश), पवन कुमार (हरियाणा), प्रियौम तालुकदार(असम), समा कंथा रेड्डी (आंध्र प्रदेश) और सोमेन देबनाथ (त्रिपुरा) शामिल है।
इस अवसर पर श्री जोशी ने कहा- “कला एक असीमित क्षेत्र है। मनुष्य की प्रत्येक अभिव्यक्ति कला है, जब यह हमारे शरीर और पहनावे के माध्यम से व्यक्त होता है तो यह अभिनय बन जाता है और जब यह अन्य सामग्रियों और माध्यमों से व्यक्त होता है तो यह दृश्य कला बन जाता है। दृश्य कला आज रचनात्मकता और सामग्रियों की विभिन्न धाराओं का मिलन बिंदु है। समकालीन कलाकार हमेशा नए माध्यमों और सामग्रियों के साथ प्रयोग करते रहते हैं।
इस क्रम में आज का नवीनतम चलन एआई यानी आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस कि बदौलत तैयार कलारूपों को रखा जा रहा है। हमारे रोजमर्रा के जीवन से लेकर फिल्मों तक, विज्ञान से लेकर स्वास्थ्य सेवा तक, मोटर वाहनों के निर्माण से लेकर जीवन शैली तक,आज इस एआई की उपस्थिति हमारे चारों तरफ है। लेकिन इन सबके बावजूद रचनात्मकता में मानव हृदय और हाथों की भागीदारी को कोई कम नहीं कर सका और न कर सकता है। मैं इस 63वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के सभी प्रतिभागियों और पुरस्कार विजेताओं की उनके योगदान के लिए सराहना करता हूं।”
प्रो नागदास ने कहा कि ललित कला अकादमी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वसुधैव कुटुंबकम के दर्शन को साकार करने की दिशा में काम करने वाली भविष्यवादी और प्रगतिशील संस्था है। श्री मोदी न केवल देश में बल्कि विश्व में शांति और सद्भाव प्राप्त करने में सांस्कृतिक कूटनीति के प्रभावों के महत्व को रेखांकित करते रहे हैं। कला नरम कूटनीति का एक सशक्त माध्यम है। और ललित कला अकादमी में हम कला की सेवा के माध्यम से पूरी दुनिया में शांति और सद्भाव का संदेश फैलाना चाहते हैं।
उन्होंने कहा “हम विंसेंट वान गॉग की कहानियों को जीना पसंद करते हैं जिन्होंने जीवन भर आर्थिक रूप से संघर्ष किया था। लेकिन हम राजा रवि वर्मा को भूल जाते हैं जो एक राजा की तरह रहते थे और अपनी कला का प्रदर्शन करते थे। कलात्मक संघर्ष का मतलब आर्थिक रूप से संघर्ष करना नहीं होना चाहिए। हम युवा प्रतिभाओं को खोजने, उन्हें अवसर प्रदान करने और उन्हें पर्याप्त पुरस्कार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
