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केदारखंड की तरह मानसखंड बदलेगी कुमाऊं की तस्वीर

नैनीताल : पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे के बाद उत्तराखंड का कुमाऊं विश्व पटल पर अपनी पहचान बनायेगा और केदारखंड की तर्ज पर मानसखंड से कुमाऊं की तस्वीर बदलेगी। धार्मिक पर्यटन और तीर्थाटन कुमाऊं की आर्थिकी की रीढ बनेगा। धामी ने यह बात आज हल्द्वानी दौरे पर पत्रकारों से कही। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा से उत्तराखंड पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बना चुका है। केदारखंड के बाद मानसखंड से कुमाऊं की तस्वीर बदलेगी।
उन्होंने कहा कि कुमाऊं को संवारने, समृद्ध बनाने और यहां के आध्यात्मिक विकास के लिये मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत रोड मैप तैयार किया गया है। जिसमें कुमाऊं के लगभग 26 मंदिरों को आपस में जोड़ने के साथ धार्मिक और अध्यात्मिक पर्यटनस्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ लोगों को रोजगार मिल सकेगा।
उन्होंने कहा कि मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत राष्ट्रीय और मुख्य मार्गों में सुधार होगा। सभी मानसखंडों को हेली सेवा से जोड़ा जायेगा तथा सभी मानसखंडों को चारधाम की तर्ज पर विकसित किया जायेगा। यही नहीं मानसखंडों के आसपास स्वास्थ्य सुविधा आदि का विकास किया जायेगा ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि इस वर्ष चारधाम यात्रा पर 56 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं। जो राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिये गर्व की बात है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ समय पूर्व पिथौरागढ़ दौरे पर आए थे। 18000 से अधिक फीट की ऊंचाई पर पहुंचने वाले वे पहले प्रधानमंत्री हैं। वह आदि कैलाश के साथ ही चीन सीमा से सटे गुंजी भी पहुंचे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे बाद पूरे विश्व में कुमाऊं अपनी अलग पहचान बना चुका है और आदि कैलाश, जागेश्वर धाम सहित कुमाऊं के अन्य पर्यटक स्थलों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। सरकार भी पर्यटन व तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। साथ ही देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के सुगम आवागमन की व्यवस्था के लिए हर बेहतर विकल्प के प्रयास किया जा रहे हैं।

धामी ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध सरोवर नैनीताल को रोप वे से जोड़ने के लिए शुरूआती कार्य शुरू हो चुका है। सरकार कुमाऊं की लोक कला, लोक संस्कृति और हथकरघा को सांस्कृतिक विरासत के रूप में विकसित करने का निरंतर प्रयास कर रही है। आने वाले वर्षों में धार्मिक पर्यटन और तीर्थाटन से हमारी संस्कृति को और बल मिलेगा।

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