गौरवशाली भारत

देश की उम्मीद ‎‎‎ ‎‎ ‎‎ ‎‎ ‎‎

कोटा संभाग में बागी प्रत्याशियों ने भी दर्ज की मौजूदगी

कोटा : राजस्थान के कोटा संभाग में लगभग आधा दर्जन सीटों पर कांग्रेस या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से बगावत करने वाले प्रत्याशी निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में सफल रहे। संभाग की 17 सीटों में से झालावाड् जिले की मनोहरथाना और बारां जिले की छबड़ा-छीपाबड़ोद सीट को छोड़कर किसी भी निर्दलीय प्रत्याशी को मिले मतों का आंकड़ा चुनाव जीतने वाले या उसके निकटतम प्रतिद्वंदी के नजदीक नहीं पहुंच पाया लेकिन ये निर्दलीय कांग्रेस भाजपा के अलावा चुनाव मैदान में उतरे अन्य राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक स्तर के राजनीतिक दलों पर भारी पड़े।
संभाग में बागी के रूप में सबसे मजबूत चुनौती झालावाड़ जिले के मनोहरथाना सीट से कांग्रेस के बागी कैलाश चंद्र मीणा की रही जो हालांकि 24 हजार 865 मतों के अंतर से भाजपा के गोविंद प्रसाद रानीपुरिया से चुनाव हार गए लेकिन उनकी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मौजूदगी के कारण कांग्रेस के प्रत्याशी नेमी चंद मीणा को मतदाताओं ने तीसरे स्थान पर धकेल दिया जिन्हें केवल 38 हजार 429 वोट मिले जबकि कांग्रेस के बागी कैलाश चंद्र मीणा को 60 हजार 439 मत हासिल हुए। कैलाश मीणा वर्ष 2008 में भी इस विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक रहे हैं।
उन्होंने पिछला चुनाव हारने के बाद इस सीट से एक बार फ़िर पार्टी का टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं देकर नेमी चंद मीणा को प्रत्याशी बनाया तो उन्होंने बागी के रूप में अपनी दावेदारी जता कर कांग्रेस को यहां हाशिए पर ला दिया।
निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ऎसी ही दमदार मौजूदगी बारां जिले के छबड़ा-छीपाबड़ौद सीट पर निर्दलीय नरेश मीणा की रही जो पिछले काफी समय से इस विधानसभा क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को लेकर आंदोलनात्मक गतिविधियों में लगातार भाग लेकर नवागंतुक चेहरा बने हुए थे।

भारतीय जनता पार्टी ने यहां से पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नजदीकी प्रताप सिंह सिंघवी जो मौजूदा विधायक थे,को तरजीह देते हुए अपना प्रत्याशी घोषित किया जबकि कांग्रेस ने पूर्व विधायक कर्ण सिंह राठौड़ को चुनाव मैदान में उतारा तो नरेश मीणा के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतर जाने के कारण श्री सिंघवी अपना सातवां चुनाव मात्र 5108 मतों के अंतर से ही जीत पाए। नरेश मीणा 40 हजार 921 वोट ले गए और दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस के प्रत्याशी पूर्व विधायक करण सिंह राठौड़ (59 हजार 892 वोट) नरेश मीणा से महज 15 हजार 971 मत ही अधिक हासिल कर पाए।
भाजपा के रूप में सबसे बड़ी चुनौती बूंदी जिले की बूंदी विधानसभा सीट से रूपेश शर्मा की रही जिन्हें पार्टी ने आग्रह किए जाने के बावजूद टिकट नहीं देकर लगातार तीन बार के विधायक अशोक डोगरा पर ही अपना दांव खेला, लेकिन इस बार वे कांग्रेस के हरिमोहन शर्मा से 18 हजार 814 मतों के अंतर से हार गए। यहां अशोक डोगरा को टिकट दिए जाने से नाराज होकर निर्दलीय के रूप में दावेदारी जताने वाले रूपेश शर्मा को 39 हजार 805 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे। चुनाव हारने के बाद भी उन्होंने कहा कि उनकी नाराजगी पार्टी से नहीं है बल्कि उन नेताओं से है जो जानते थे कि अशोक डोगरा चुनाव हारेंगे लेकिन उसके बावजूद उन्हें (रूपेश शर्मा) टिकट देने के बजाए अशोक ड़ोगरा को टिकट दिया और वे हार गए।
बागी के रूप में भाजपा को एक बड़ी चुनौती झालावाड़ जिले के डग-पिड़ावा विधानसभा सीट से मिली जहां से हालांकि भाजपा के कालूराम 99 हजार 251 वोट देकर कांग्रेस के निकटतम प्रतिद्वंदी चेतराज को 22 हजार 261 मतों के अंतर से हराने में सफल रहे लेकिन यहां भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़कर हारने वाले रामचंद्र सोनारीवाल हार-जीत के इस अंतर से कहीं अधिक 23 हजार 701 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे। यदि वे चुनाव नहीं लड़ते तो शायद भाजपा कहीं अधिक बड़े अंतर से यह चुनाव जीतती। बागी रामचंद्र सोनारीवाल पूर्व में भी यहां से भाजपा के विधायक रहे हैं, लेकिन इस बार पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो उन्होंने बगावत कर चुनाव लड़ा था।
बागी के रूप में संभवत सबसे अधिक निराशा बूंदी जिले की केशवरायपाटन सीट पर कांग्रेस के बागी राकेश बायतू के हाथ लगी जो यह चुनाव पार्टी से बगावत करके खुद जीतने के अथवा जीत न पाने पर कांग्रेस के उन अधिकृत प्रत्याशी चुन्नीलाल प्रेमी को हराने के लिए उतरे थे जिन्होंने वर्ष 2018 का चुनाव बागी के रूप में लड़कर उन्हें हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस समय कांग्रेस ने राकेश बायतू को अपना प्रत्याशी बनाया था लेकिन तब टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर पूर्व विधायक रह चुके चुन्नीलाल प्रेमी ने पार्टी से बगावत कर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा जो जीते तो नहीं लेकिन 35 हजार 115 वोट लेकर राकेश बायतू की हार की बड़ी वजह बने क्योंकि वह से विजयी भाजपा की श्रीमती चंद्रकांता मेघवाल से महज 7119 मतों के अंतर से हारे थे जो प्रेमी को मिले मतों की तुलना में मामूली था।
कोटा संभाग में कोटा जिले में बसपा को पीपल्दा में 1387,सांगोद में 1622, कोटा दक्षिण में 1085, रामगंजमंडी में 2387, बारां जिले में किशनगंज सीट पर 1488,झालावाड़ जिले में झालरापाटन सीट पर 3471 वोट मिले जबकि बूंदी जिले में हिंडोली सीट पर आसपा प्रत्याशी 9312 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे। कोटा जिले की लाड़पुरा में 976 मत मिले। आम आदमी पार्टी को बारां जिले में अंता सीट पर 1334, झालावाड़ जिले में खानपुर सीट पर 2634 वोट मिले।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *