श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर प्रशासन के अधिकारियों ने लगातार दसवें सप्ताह शुक्रवार को श्रीनगर की जामिया मस्जिद में सामूहिक नमाज की अनुमति नहीं दी और मुख्य मौलवी व अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक को घर में नजरबंद कर रखा गया।
मस्जिद की प्रबंध संस्था अंजुमन औकाफ ने आज यह जानकारी दी।
अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस के प्रमुख मीरवाइज ने जामिया मस्जिद को बार-बार बंद करने और मनमाने ढंग से हिरासत में लेने की निंदा करते हुए कहा कि शासकों द्वारा ‘तथाकथित सामान्य स्थिति’ के सभी दावे ‘ऐसे जनविरोधी कदमों से विफल’ हो जाते हैं।
उन्होंने कहा,“मैं यह समझने में असफल हूं कि केंद्रीय जामा मस्जिद को बार-बार क्यों निशाना बनाया जा रहा है, जब तक कि इसका उद्देश्य घाटी के मुसलमानों को दुःख पहुंचाना और उन्हें ‘नए कश्मीर’ में उनकी जगह नहीं दिखाना है।” मीरवाइज ने कहा कि प्रभारी शासकों को मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं से खेलना बंद करना चाहिए और उन्हें अपनी मस्जिदों में बिना किसी बाधा के नमाज़ अदा करने देना चाहिए। उन्होंने कहा,“लोगों की चुप्पी और उनके धार्मिक अधिकारों पर बेशर्म हमलों को सहने को प्रतिक्रिया देने में उनकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।”
पुराने शहर में स्थित जामिया मस्जिद की प्रबंध संस्था अंजुमन औकाफ ने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने लगातार दसवें सप्ताह शुक्रवार की नमाज की अनुमति नहीं दी। अंजुमन औकाफ ने एक बयान में कहा,“अधिकारियों ने एक बार फिर केंद्रीय जामा मस्जिद श्रीनगर में आज लगातार 10वें शुक्रवार को जुमे की नमाज की अनुमति नहीं दी और मीरवाइज-ए-कश्मीर डॉ. मौलवी मुहम्मद उमर फारूक को भी नजरबंद कर दिया, जो जामा मस्जिद में शुक्रवार को धार्मिक उपदेश देते हैं।”
बायन में यह भी कहा गया है कि अधिकारियों द्वारा इन प्रतिबंधों और अंकुशों के लिए कोई कारण नहीं बताया गया है। गौरतलब है कि गत 13 अक्टूबर से जामिया मस्जिद में शुक्रवार की नमाज की अनुमति नहीं दी गई है, क्योंकि अधिकारियों का मानना है कि फिलिस्तीन समर्थक और इजरायल विरोधी विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं।
जामिया मस्जिद में लगातार 10वें हफ्ते जुमे की नमाज नहीं
