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ओडिशा विस्फोट कांड में मरने वालों की संख्या बढ़कर तीन

भुवनेश्वर : ओडिशा के हाई-टेक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के आउटडोर एसी में विस्फोट में घायल हुए एक और व्यक्ति की शनिवार को मौत हो गई, जिससे दुर्घटना में मरने वालों की कुल संख्या तीन हो गई। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार, गत 29 दिसंबर को अस्पताल के आउटडोर एसी में गैस भरने के दौरान करीब चार लोग घायल हो गये थे। उनमें से दो लोगों की जलकर मौत मौत हो गई जबकि दो अन्य घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन आज घायलों में से एक ने भी दम तोड़ दिया।
घटना के दो दिन बाद, मरने वाले व्यक्तियों में से एक की पत्नी ने अपने पति की मृत्यु की खबर पाने के अगले ही दिन ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया। सूत्रों के मुताबिक, मृतक की पहचान को लेकर भ्रम की स्थिति तब सामने आई जब अस्पताल के रिकॉर्ड में ज्योति रंजन मल्लिक नाम के घायलों में से एक, जो आईसीयू से निकाले जाने पर वेंटिलेटर पर था, ने दावा किया कि वह दिलीप सामंत्रे है, न कि ज्योति रंजन मल्लिक।
अस्पताल के अधिकारियों ने पहले दिलीप सामंत्रे को मृत घोषित कर दिया था और पोस्टमॉर्टम के बाद अंतिम संस्कार के लिए शव उनके परिवार के सदस्यों को सौंप दिया था। इस बीच, खुद को दिलीप सामंत्रे बताने वाले व्यक्ति ने शनिवार को जलने के कारण दम तोड़ दिया।
ज्योतिरंजन और दिलीप दोनों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर मृतकों की पहचान में गड़बड़ी का गंभीर आरोप लगाया है। पहचान को लेकर असमंजस की स्थिति के बीच, अस्पताल प्राधिकारी ने तीसरे पीड़ित का शव उसकी वास्तविक पहचान का पता लगाने के लिए डीएनए परीक्षण कराने के लिए पुलिस को सौंप दिया है।
इस बीच, ज्योति रंजन के परिवार के सदस्यों ने तीसरे पीड़ित की पहचान पर सवालिया निशान उठाते हुए मांग की है कि उसका शव उन्हें सौंप दिया जाए। अब केवल डीएनए परीक्षण से ही पुष्टि हो सकेगी कि आज सुबह जलने के कारण दम तोड़ने वाला तीसरा पीड़ित दिलीप सामंत्रे है या ज्योति रंजन मल्लिक। दिलीप के परिवार के सदस्यों ने कहा है कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है। उन्होंने उनकी मौत के बारे में सवाल उठाया है और अस्पताल प्रशासन पर अपनी गलती छिपाने को लेकर आरोप लगाया है।

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