प्रयागराज : दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम माघ मेले का पहले स्नान पर्व “मकर संक्रांति” पर बर्फीली हवाओं और हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा,यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में आस्था की डुबकी लगायी।
अधिकृत जानकारी के अनुसार संगम तट पर भोर चार बजे से दोपहर 12 बजे तक 12 लाख 50 हज़ार श्रद्धालुओ ने स्नान कर लिया था। मकर संक्रांति के अवसर पर प्रात:काल में संगम तट दूधिया रोशनी से नहाया हुआ था। सुबह चार बजे घने कोहरे और सर्द हवाओं के कारण संगम तट पर श्रद्धालुओं की अधिक भीड नहीं थी। भोर में साधु-संतों के साथ गृहस्थ और कल्पवासियों ने भी आस्था की डुबकी लगाई। गृहस्थ के साथ बच्चों को भी त्रिवेणी के पवित्र जल डुबकी लगाते देखा गया। कड़कड़ाती ठंड पर देव-आस्था की गर्माहट की विजय का प्रतीक श्रद्धालुओं के चेहरे पर साफ दिखलाई पड़ रहा है। श्रद्धालुओं ने संगम स्नान करने के बाद गरम कंबल, तिल ,सेव, चावल के लड्डूओं, चवल आदि का दान किया।
मेला क्षेत्र में स्थापित नियंत्रण कक्ष के अनुसार 12 बजे तक..12 लाख 50 हज़आर. श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी हिमांशु पाण्डेय ने बताया कि माघ मेले में श्रद्धालुओं के लिए एहतियात के तौर पर दो बड़े 20-20 बेड के त्रिवेणी और गंगा नाम से दो अस्पताल बनाए गए हैं। इसी प्रकार मेला क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बनाए गए हैं, जहां मरीज सामान्य बीमारियों की दवाइयों को ले सकेगा। 30 एम्बुलेंस तैयार रहेंगे जो जरूरत के समय तत्काल मरीजों को अस्पताल पहुंचाएंगे। मेले में प्रसव की भी व्यवस्था की गयी है। इसके लिए महिला चिकित्सकों की भी ड़्यूटी लगायी गयी है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि मेला क्षेत्र में तीन जोन, आठ सर्किल,14 थाने,41 पुलिस चौकी, 14 अग्निशमन केन्द्र और 14 फायर वाच टावर तैयार किए गये हैं। सुरक्षा के कडे बंदोबस्त किए हैं। बड़ी संख्या में गोताखोरों की तैनाती की गयी है। इनमें पुलिस, पीएसी, जल पुलिस के साथ प्राइवेट गोताखोेर भी तैनात है। जल पुलिसकर्मी वोट पर सवार होकर करीब पांच किलोमीटर स्नान घाट पर किसी अप्रिय घटना पर त्वरित नियंत्रण के लिए लगातार चक्कर लगा रहे हैं।
संगम तट पर स्नान करने के बाद पुरूष एवं महिला श्रद्धालु पूजा और आराधना में श्रद्धालु लीन है। कोई संगम में कोई सूर्य देव को जल अर्पित कर रहा है तो कोई दूध चढ़ा रहा है तो कोई दीपदान आरती कर रहा है तो कहीं श्रद्धालु महिलाएं दोने में पुष्पों के बीच दीपक को गंगा में प्रवाहित कर दोनों हाथ जोड़कर परिवार की सुख और समृद्धि की कामना करते नजर आ रहे हैं।
तीर्थ पुरोहित राजेन्द्र पाल ने बताया कि साधु-संतोें के साथ-साथ गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग भी कल्पवास को धारण करते हैं। उन्होंने बताया कि माघ मेला क्षेत्र में पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक कल्पवास करने का विधान बताया गया है। कुछ कल्पवासी मकर संक्रांति से माघ शुक्ल की संक्रांति तक कल्पवास करते हैं जबकि 90 फीसदी कल्पवासी पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक कल्पवास करते हैं। मकर संक्रांति से माघ शुक्ल की संक्रांति तक कल्पवास करने वालो में मैथिल के साथ बिहार और बंगाल के श्रद्धालुओं के अलावा हिमाचल प्रदेश और नेपाल से आने वाले श्रद्धालु-कल्पवासी भी शामिल है। मान्यता है कि सभी नियमों का पालन कर कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं को किसी न किसी रूप में देव दर्शन होते हैं।
कड़ाके की ठंड पर भारी आस्था,लाखों ने किया संगम स्नान
