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कंतित उर्स मेला है राष्ट्रीय सद्भावना की मिसाल

मिर्जापुर : विश्व प्रसिद्ध विंध्याचल धाम के तलहटी में मनाया जाने वाला कंतित उर्स मेला राष्ट्रीय सद्भावना का एक मिसाल है। यहां ख्वाजा इस्माइल चिश्ती की दरगाह पर इस समय अनूठा दृश्य है। पूरा उर्स मेला जायरीनों से पटा पड़ा है। बिहार, झारखंड एवं मध्य प्रदेश आदि दूर दूर स्थानों से भारी संख्या में लोग आ रहे हैं। हिंदू-मुस्लिम समन्वय के प्रतीक इस उर्स मेले की शुरूआत एक हिन्दू परिवार द्वारा चादर चढ़ायें जाने के बाद ही शुरू होती है। यह परम्परा सदियों से चल रही है और यही परंपरा इस उर्स मेले को धार्मिक सौहार्द का एक अनूठा रूप देती है।
हिन्दूओं के पवित्र शक्तिपीठ विंध्याचल के तलहटी में स्थित कंतित शरीफ ख्वाजा इस्माइल चिश्ती की दरगाह है। वे अजमेर शरीफ के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के सगे भांजे है। कंतित शरीफ के संबंध में मान्यता है कि जो जायरीन अजमेर शरीफ की यात्रा नही कर पाते हैं।वे लोग यहां मत्था टेक एवं चादर चढ़ा कर अजमेर शरीफ के गरीब नवाज की कृपा प्राप्त कर लेते हैं। वैसे भी अजमेर शरीफ यात्रा शुरु करने से पहले या यात्रा पूर्ण करने के बाद भी जायरीन आते रहते हैं।
कंतित शरीफ के इस्माइल चिश्ती के संबंध में यहां क‌ई किंवदंतियां प्रचलित है। स्थानीय लोग इस्माइल चिश्ती के हैरतंगेज कारनामों को बड़े गर्व से बताते हैं। मोइनुद्दीन चिश्ती के भांजे इस्माइल चिश्ती के कंतित आगमन को लेकर कोई ठोस ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है पर जनश्रुतियों एवं राजपूत गहरवारों की ऐतिहासिकता को सर्वाधिक मान्यता दी जाती है।
मान्यता के अनुसार अवध राज्य के इस सूबे कंतित में कभी गहरवार राजपूत राजाओं का शासन था। इसी वंश वृक्ष में दानव राय नमक एक राजपूत शासन ने जनता में आतंक पैदा कर दिया था। इसी समय बाबा इस्माइल चिश्ती ने दाना राय के आतंक को अपने कारनामों से समाप्त कराया। तभी से जनता में उनके प्रति आदर एवं सम्मान का भाव पैदा हुआ और उन्हें देव दूत माना जाने लगा।
गंगा के किनारे बेस इस गांव में राजपूत राजाओं के किला एवं बावली के भग्नावशेष विशेष इन जनश्रुतियों को पुष्ट करते हैं। पर्वतमाला की गोद में बस यह स्थल अपने चमत्कारों के साथ प्राकृतिक वैभव से परिपूर्ण है। संभवत: इसी कारण लोक प्रसिद्ध भी है ।इस दरगाह के पश्चिम में हिंदुओं का प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां विंध्यवासिनी धाम अवस्थित है।उत्तर में मां जाह्नवी की धारा है। दक्षिण में विंध्य पर्वत माला की हरितिमा इसकी शोभा में चार-चांद लगा देते हैं।
कंतित शरीफ हिन्दुओं और मुसलमानो मे समान रूप से लोकप्रिय है। राष्ट्रीय मिसाल भी। मान्यता के अनुसार आज भी बाबा की मजार पर पहली चादर स्थानीय कसरहट्टी मोहल्ला के एक कसेरा परिवार द्वारा चढ़ाई जाती है। इस चादर के चढ़ने के बाद उर्स मेला विधिवत शुरु होता है। इस प्रथा के संबंध में कोई विशेष कारणों का पता नही चलता है। परिवार के लोग बताते हैं कि यह रस्म पीढ़ी दर पीढ़ी चल रहा है, जिसका हम भी पालन करते हैं।
इस मेले को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। नगर मजिस्ट्रेट एवं मेला प्रभारी विनय कुमार सिंह ने बताया कि पूरे मेला क्षेत्र को सेक्टर एवं जोन में सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है। गंगा नदी में घाटों एवं यातायात व्यवस्था के लिए अलग से व्यवस्था की गई है।

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