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हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं चरमराईं

शिमला : राजीव सैजल ने कहा कि प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बहुत महत्वपूर्ण विभाग है और लोगों के जीवन से जुड़ा यह विभाग है लेकिन वर्तमान सरकार की व्यवस्था इस समय ठीक नहीं है। डा. सैजल ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस नीत सरकार ने सत्ता में आने के बाद कहा था कि प्रदेश के प्रमुख मेडिकल कालेज की इमर्जेन्सी को हम चुस्त दुरुस्त करेंगे। एक बेड के ऊपर एक डॉक्टर, चार नर्सिंग स्टाफ की व्यवस्था कांग्रेस सरकार द्वारा होगी। परन्तु एक वर्ष से ऊपर सरकार का हो गया लेकिन सरकार ने यह बात पूरी नहीं की हैं।
उन्होंने प्रदेश सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि आज इमरजेंसी में बुरा हाल है, आज भी वहाँ पर ड्रग लिस्ट जिसमें सामान्य सी दवाई पैरासीटामॉल जैसी दवाइयां मजबूरन लोगों को बाहर से खरीदनी पड़ रही है। माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट और पैथोलॉजी डिपार्टमेंट में टेस्टों के लिए आवश्यक इक्विपमेंट भी उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं। उन्होनें सरकार से प्रश्न किया कि आप की इसी क्या मज़बूरी है जो अस्पतालों में सामान्य और छोटी-छोटी चीजें भी उपलब्ध नहीं कर पा रहे है? जिसके कारण से टेस्ट नहीं हो पा रहे है और लोगों को मुफ्त टेस्ट की सुविधा नहीं मिल रही है, लोगों को टेस्ट बाहर से करवाना पड़ रहा है।
डॉ सैजल ने कहा क्रसना लैबोरेटरीज़ के साथ भाजपा सरकार ने फरवरी 2022 में टेंडर के माध्यम से मार्केट रेट से तकरीबन 30-35 प्रतिशत कम रेट पर टेस्टों को इस लैब के माध्यम से करवाने की व्यवस्था की थी। उन्हांने कहा कि 54 करोड़ रूपये वर्तमान की प्रदेश सरकर इस संस्थान का देना है। लेकिन भविष्य में यह भी संकट खड़ा होने वाला है। विशेषज्ञ डॉक्टर्स का मनोबल वर्तमान सरकार के कार्यकाल में गिरा हैं। ना सिर्फ डॉक्टर्स का मनोबल गिरा है।पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सिंग स्टाफ भी परेशान है। उन्होंने कहा कि बहुत-बड़ा कम्यूनिकेशन गैप सरकार और अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच में खड़ा हो रहा है। जिसके कारण डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सिंग स्टाफ अपने आप को हतोत्साहित महसूस कर रहा है। एक विशेषज्ञ डॉक्टर जब ट्रेनिंग कर रहा होता है तब उस तकरीबन 50,000 से ऊपरे स्टाइफन्ड मिलता है। ट्रेनिंग के बाद जब प्रदेश की सेवा करने के लिए जब वह स्वास्थ्य संस्थान में जाता है तो उसे 32 या 33 हजार रूपये सरकार की तरफ से दिये जाता है। वर्तमान सरकार ने एनपीएस बन्द करके डॉक्टर्स का मनोबल तोड़ने का कार्य सरकार कर रही है । वर्तमान सरकार मेडिकल स्टाफ और नर्सिंग स्टाफ क़े लॉन्ग पैंडिग इशूस पर कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। आज फार्मासिस्ट की भर्ती नहीं हो रही है, कलेरिकल डिपार्टमेंट में भी भर्तियां नहीं हो रही है।
उन्होंने 10 गारंटियों पर सरकार को लताड़ लगाते हुए कहा कि इस दिशा में एक भी इंच यह सरकार नहीं बढ़ पाई है, झूठ बोल करके ये कांग्रेस सत्ता में आई है। हर मोर्चे पर सरकार असफल होती हुई नजर आती है और सरकार की निष्क्रियता दिख रही है।
उन्होंने कहा कि सामान्य जन इस सरकार के कार्यकाल में त्रस्त है और साथ ही परेशान भी हैं। आज इनके कार्यकर्ता भी सरकार के खिलाफ़ बोलने लगे हैं। कांग्रेस के कार्यकर्ता भी कांग्रेस सरकार के खिलाफ़ बोलने लगे है। हिमकेयर योजना का गला घोंटने का प्रयास किया जा रहा है। तकरीबन 200 करोड़ रुपया आज भी देय है जबकि प्रदेश का एक बड़ा समूह 10,000 परिवार के लोग इस योजना के तहत पंजीकृत हैं। जयराम सरकार ने 3000 मासिक वित्तीय सहायता देने का कार्य किया था और जब तक उनकी सरकार रही इस योजना के तहत एडवान्स पैसे की व्यवस्था की जाती रही लेकिन आज इस योजना के माध्यम से लाभार्थी परिवारों को इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। हिमकेयर योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि आपदा के समय में प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि 1782 करोड़ रुपये प्रदेश को भिन्न-भिन्न इन्सटॉलमेंट के माध्यम से केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश की सहायता की लेकिन उसके बाद भी बार-बार प्रदेश के मुख्यमंत्री, मंत्री और इनके विधायक का यह राग अलापना कि केंद्र से कोई सहायता नहीं मिली है। सरकार का एक गलत नैरेटिव बनाने का प्रयास कांग्रेस की सरकार के नेता कर रहे हैं कि केंद्रीय सरकार ने कुछ नहीं किया, यह बहुत गलत परंपरा इस देवभूमि के अंदर वर्तमान सरकार ने शुरू की है। उन्होंने कहा कि काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती नहीं। यह वर्ष चुनाव का भी वर्ष है जिसमें जनता कांग्रेस की हार सुनिश्चित करेगी।

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