मुंबई : महाराष्ट्र सरकार की ओर से मराठा समुदाय की सभी मांगें मान लिए जाने के बाद समुदाय ने शनिवार को अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया। मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने आज सुबह अपना विरोध-प्रदर्शन और अनशन तोड़ दिया और आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नवी मुंबई में श्री जारांगे से मुलाकात की। श्री जारांगे अपने समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर हजारों लोगों के साथ प्रदर्शन और अनशन पर बैठे थे।
जारांगे और सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर कल देर रात के आसपास विस्तृत चर्चा की, जो सफल रही और बाद में सरकार के साथ भी चर्चा हुई। इस मुद्दे पर एक आधिकारिक अधिसूचना (सरकारी संकल्प) जारी की। इसके बाद आज सुबह करीब पांच बजे श्री जारांगे ने अपनी टीम से परामर्श किया और आंदोलन खत्म करने का फैसला किया। शिंदे, कैबिनेट मंत्री गिरीश दत्तात्रेय महाजन और अन्य लोगों के साथ सुबह लगभग आठ बजे नवी मुंबई गए और श्री जारांगे को एक गिलास फलों का रस पिलाया, जिसके बाद उन्होंने अपनी तीन दिवसीय भूख हड़ताल समाप्त कर दी।
इस अवसर पर श्री शिंदे ने सभा को संबोधित किया और कहा कि राज्य सरकार ने समुदाय की सभी मांगों को स्वीकार कर लिया है और उन्होंने समुदाय को कानूनी रूप से वैध आरक्षण देने का आदेश दिया है। इस संबंध में रात भर चली गतिविधियों में सर्वश्री मंगल प्रभात लोढ़ा और दीपक केसरकर, सामाजिक न्याय विभाग के सचिव सुमंत भांगे, औरंगाबाद संभागीय आयुक्त मधुकर अरंगल और मुख्यमंत्री के निजी सचिव डॉ. अमोल शिंदे जैसे शीर्ष अधिकारी शामिल थे।
नवी मुंबई में एकत्र हुए लाखों मराठों ने छह महीने लंबे अभियान की सफलता पर ढोल बजाते, नाचते और गाते हुए जश्न मनाया। मराठा नेताओं ने घोषणा की कि वे योजना के अनुसार मुंबई में प्रवेश नहीं करेंगे, और उसके बाद राज्य भर से यहां आये प्रदर्शनकारी घर लौटने लगे।
महाराष्ट्र सरकार ने मराठाओं की मांगें मानी, आंदोलन खत्म
