शिमला : सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मुख्यमंत्री सुख आरोग्य योजना शुरू करने की बजट में घोषणा की है। इसके अंतर्गत प्रदेश में 70 वर्ष से अधिक आयु के आयकर नहीं दे रहे सभी वृद्धों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना के अंतर्गत प्रदेश में ऐसी सभी विधवाओं के 27 साल तक की आयु वाले बच्चों की शिक्षा पर होने वाला व्यय प्रदेश सरकार वहन करेगी। विधवा, निराश्रित, तलाकशुदा और दिव्यांग माता-पिता के सभी पात्र बच्चों के आरडी खाते में 18 वर्ष की आयु तक एक हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। वृद्धावस्था, विधवा, एकल नारी, दिव्यांग, कुष्ठ रोगी पेंशन के 40 हजार नए पात्र लाभार्थियों को इस योजना में शामिल किया जाएगा।
विधायक प्राथमिकताओं के वित्तीय पोषण की वर्तमान सीमा को 175 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 195 करोड़ रुपये किया गया है। विधायक ऐच्छिक निधि को 13 लाख रुपये से बढ़ाकर 14 लाख रुपये प्रति विधानसभा क्षेत्र कर दिया जाएगा। विधायक क्षेत्र विकास निधि के अंतर्गत प्रति विधान सभा क्षेत्र राशि 2. 20 करोड़ रुपये की गई। वर्ष 2024-25 में एक हजार करोड़ रुपये उन कार्यों पर खर्च किए जाएंगे जो पूरा होने के करीब हैं।
बजट में राजीव गांधी प्राकृतिक खेती स्टार्टअप योजना शुरू करने का एलान किया गया। इसके तहत बेरोजगार युवाओं को प्राकृतिक खेती के लिए प्राकृतिक रूप से उगाए गए गेहूं को 40 रुपये तथा मक्की को 30 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाएगा। करीब 36,000 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा। हिमाचल प्रदेश कृषि मिशन के अंतर्गत 2500 कृषि क्लस्टर समूहों को विकसित करके विभिन्न क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार होगी। शिमला जिले में मेहंदली तथा शिलारू तथा कुल्लू जिला में बंदरोल में नई मंडियों का निर्माण होगा। सिरमौर में पांवटा साहिब, खैरी, घंडूरी और नौहराधार, कुल्लू में चौरीबिहाल, पतलीकुहल और खेगसू, मंडी में टकोली और कांगनी, कांगड़ा में जसूर, पासू तथा पालमपुर तथा सोलन में परवाणू, कुनिहार और वाकनाघाट मंडियों का उन्नयन होगा। किसानों की सुविधा के लिए चौटबोट और एआई पर आधारित भू-अभिलेख, हेल्पडेस्क तथा किसानों के डाटाबेस सहित एक वेब आधारित कृषि पोर्टल और मोबाइल एप बनाया जाएगा। सब्जी उत्पादन के माध्यम से किसानों को उचित गुणवत्ता की पौध तथा उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण देने के लिए एक हाईटेक सब्जी नर्सरी उत्पादन उत्कृष्टता केंद्र खोला जाएगा।
पशुपालन तथा दूध उत्पादन को प्राकृतिक खेती से जोड़कर गाया के दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वर्तमान 38 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 45 रुपये प्रति लीटर व भैंस के दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 47 रुपये प्रति लीटर से 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। हिमगंगा योजना के तहत कांगड़ा के ढगवार में 1.5 लाख लीटर प्रति दिन की क्षमता वाले पूर्णत स्वचालित दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद संयंत्र की स्थापना की जाएगी। ऊना तथा हमीरपुर में भी आधुनिकतम तकनीक से दूध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। स्थानीय युवाओं को दूध ले जाने के लिए 50 प्रतिशत उपदान पर 200 रेफ्रिजरेटेड दूध वैन उपलब्ध करवाई जाएगी। सोलन जिले के दाड़लाघाट में कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की जाएगी। प्रदेश में भेड़-बकरियों के लिए एफएमडी टीकाकरण शुरू करने तथा ऊन की अन्य समस्याओं के निदान के लिए भेड़-बकरी पालक प्रोत्साहन योजना शुरू की जाएगी। 1 अप्रैल 2024 से दुग्ध उत्पादन सोसाइटियों से एपीएमसी द्वारा ली जाने वाली फीस माफ की जाएगी। निजी गो सदनों में आश्रित गोवंश के लिए दिए जाने वाले अनुदान 700 रुपये प्रति गोवंश प्रतिमाह से बढ़ाकर 1,200 रुपये करने का फैसला लिया।
हिमाचल में मुख्यमंत्री सुख आरोग्य योजना होगी शुरू
