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अवैध कलैक्शन सेंटर के मामले में सरकार से मांगा जवाब

नैनीताल : उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश में गैर कानूनी रूप से चल रहे पैथालाॅजी लैबों के संग्रह केन्द्रों (कलैक्शन सेंटर) के मामले में सुनवाई करते हुए सोमवार को सरकार से जवाब देने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई एक मई को होगी।
हरिद्वार के सामाजिक कार्यकर्ता भरत कपूर की ओर से दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की युगलपीठ में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि हरिद्वार जिले में पैथालाॅजी लैब के नाम पर सैकड़ों कलैक्शन सेंटर काम कर रहे हैं।
इनमें से अधिकांश उत्तराखंड पैरा मेडिकल कौंसिल अधिनियम, 2009 का उल्लंघन कर रहे हैं। इन केन्द्रों में न तो प्रशिक्षित कर्मचारी तैनात हैं और न ही इनका प्रदेश में पंजीकरण है। उत्तराखंड क्लीनिकल एसेस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2013 के अनुसार प्रदेश में बिना पंजीकरण के कोई भी लैब संचालित नहीं हो सकती है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि अधिनियम के सेक्शन 37 में कहा गया है कि बिना चिकित्सक के हस्ताक्षर के कोई भी रिपोर्ट मान्य नहीं होगी। याचिकाकर्ता की ओर से आगे कहा गया है कि अकेले हरिद्वार जिले में चार सौ से अधिक संग्रह केन्द्र संचालित हो रहे हैं।
मात्र 10 प्रतिशत केन्द्रों में ही प्रशिक्षित कर्मचारी मौजूद हैं। शेष अवैध ढंग से संचालित हो रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सरकारी तंत्र और हरिद्वार प्रशासन की विफलता के चलते यह धंधा चल रहा है। जब इस संबंध में जानकारी ली गयी तो स्वास्थ्य अधिकारी इस संबंध में ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं करा पाये।

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