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मनी लांड्रिंग की आरोपी शैफाली वालिया को नहीं मिली जमानत

नैनीताल : उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मनी लांड्रिंग की आरोपी शैफाली वालिया उर्फ शैफाली करणवाल की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने इसे गंभीर अपराध माना है। शैफाली वर्मा मनी लांड्रिंग के आरोप में जेल में बंद है। आरोप है कि मैसर्स पुष्पांजलि रियलम्स एंड इंफ्राटेक लि0 नामक कंपनी देहरादून के राजपुर में आर्किड पार्क के नाम पर फ्लैट तैयार कर रही थी। यह एक बड़ा प्रोजेक्ट था।
इसके लिये फ्लैट खरीददारों से पैसा वसूला गया और बैंक से ऋण भी लिया गया लेकिन खरीददारों को न तो फ्लैट दिये गये और न ही पैसा वापस किया गया। कंपनी के खिलाफ देहरादून के राजपुर और डालनवाला थाना में कई अभियोग पंजीकृत हैं।
यह भी आरोप है कि आवेदक शैफाली वालिया के पति राजपाल वालिया कंपनी में सह निदेशक हैं और उनके पति के खाते से आवेदक के खाते में अच्छी खासी रकम स्थानांतरित हुई है।
आरोप है कि कंपनी के खाते से राजपाल वालिया और दो अन्य निदेशकों के खाते में 9.22 करोड़ रूपये स्थानांतरित हुआ है। यह भी आरोप है कि आवेदक के खाते में 1.79 करोड़ रुपये स्थानांतरित हुआ है। आवेदक की ओर से अदालत में दायर जमानत प्रार्थना पत्र में इसका विरोध किया गया और कहा गया कि कंपनी के खिलाफ दर्ज अभियोगों में आवेदक सीधे नामित नहीं है। आरोपी महिला है और उस पर मनी लांड्रिंग का आरोप गलत है। उसके खाते में मामूली रकम स्थानांतरित हुई है।
ईडी की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि स्थानांतरित रकम अधिक हो सकती है। इस संदर्भ में अभी पूरे साक्ष्य एकत्र नहीं हुए हैं क्योंकि कंपनी का सह निदेशक दीपक मित्तल जांच से भाग रहा है और वह सहयोग नहीं कर रहा है।
न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी की एकलपीठ में इस मामले में 23 फरवरी को सुनवाई हुई और आदेश की प्रति रविवार को मिल पायी। अंत में अदालत ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए आवेदन की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि जनता का विश्वास टूटने से समाज पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

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