न्यूनतम 4150 करोड़ रूपये के निवेश की शर्त
नई दिल्ली : सरकार ने भारत को बैटरी चालित वाहनों (ईवी) के विनिर्माण स्थल के रूप में बढ़ावा देने के लिए ई-वाहन नीति को मंजूरी दी जिसके तहत प्रोत्साहन की इच्छुक कंपनियों को न्यूनतम 4150 करोड़ रुपये का निवेश करना आवश्यक बनाया गया है। इस नीति के तहत कंपनियों को भारत में नए कारखाने में तीस साल में व्यावसायिक उत्पादन शुरू करना होगा तथा पांच साल में कम से कम 50 प्रतिशत मूल्यवर्धन देश में करना होगा।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार इस नीति के तहत निवेश करने वाली कंपनियों को कम आयात शुल्क पर सीमित संख्या में कारों के आयात की छूट होगी। विज्ञप्ति में कहा गया है “सरकार ने भारत को विनिर्माण गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने के लिए एक योजना को मंजूरी दे दी है ताकि देश में नवीनतम तकनीक वाले ई-वाहनों (ईवी) का निर्माण किया जा सके।”
बयान में कहा गया है, “यह नीति प्रतिष्ठित वैश्विक ईवी निर्माताओं द्वारा ई-वाहन क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए तैयार की गई है। यह भारतीय उपभोक्ताओं को नवीनतम तकनीक तक पहुंच प्रदान करेगा, मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देगा, ईवी खिलाड़ियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देकर ईवी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगा जिससे उच्च मात्रा में उत्पादन, पैमाने की अर्थव्यवस्थाएं, उत्पादन की कम लागत, कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी। व्यापार घाटा कम होगा, विशेषकर शहरों में वायु प्रदूषण कम होगा और स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।”
इस नीति के तहत विनिर्माण के दौरान घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) तीसरे वर्ष तक 25 प्रतिशत और पांचवें वर्ष तक 50 प्रतिशत का स्थानीयकरण स्तर हासिल करना होगा। इस नीति के तहत देश में तीन साल के अंदर व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने वाली कंपनियां 15 प्रतिशत सीमा शुल्क (जैसा कि सीकेडी इकाइयों पर लागू होता है) पर कुल पांच साल की अवधि के लिए 35,000 अमेरिकी डॉलर और उससे अधिक के न्यूनतम सीआईएफ (लागत, बीमा और किराया) मूल्य वाले वाहन आयात कर सकेंगी।
सस्ती दर पर आयात के लिए स्वीकृत विद्युत वाहनों (ईवी) की कुल संख्या निवेश राशि या 6484 करोड़ रुपये (पीएलआई योजना के तहत प्रोत्साहन राशि) में से जो भी कम हो, उतने तक सीमित रहेगी। बयान में कहा गया है कि यदि कोई कंपनी 80 करोड़ डॉलर से अधिक है, तो प्रति वर्ष 8,000 से अधिक की दर से 40,000 ईवी से अधिक की अनुमति नहीं होगी। अप्रयुक्त वार्षिक आयात सीमाओं को आगे बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी।
