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बंदियों की समय पूर्व रिहाई पर हाईकोर्ट का सख्त रूख

आज शाम तक निर्णय लेने की दी मोहलत

नैनीताल : उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बंदियों की समय पूर्व रिहाई के मामले में गुरुवार को बेहद कड़ा रूख अख्तियार करते हुए प्रदेश सरकार को आज शाम पांच बजे तक अंतिम निर्णय लेने के निर्देश दिये। साथ ही शुक्रवार सुबह तक रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस प्रकरण में एक जनहित याचिका दायर की है। मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की युगलपीठ में जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। प्रमुख गृह सचिव दिलीप जावलकर, जेल महानिरीक्षक विमला गुंज्याल और विधि सचिव वुर्चुअली पेश हुए।
अदालत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय (एससी) की ओर से बुजुर्ग, बीमार, अच्छे आचरण वाले बंदियों की समय पूर्व रिहाई के लिये प्रदेश सरकारों को निर्देश दिये गये थे। एससी ने ऐसे बंदियों के मामलों को उच्चस्तरीय कमेटी के समक्ष रखने और कमेटी को अंतिम निर्णय लेने को कहा था।
पुलिस और जेल प्रबंधन से रिपोर्ट मिलने के बाद सामने आया कि सितारगंज स्थित संपूर्णानंद जेल में ऐसे 167 बंदी हैं जिनकी समयपूर्व रिहाई पर विचार किया जाना है। अदालत ने कहा कि ऐसे बंदियों के मामले में एक साल से सरकार के पास फाइल पड़ी, लेकिन शासन की ओर से कोई विचार नहीं किया गया।
सरकार की ओर से कहा गया कि कुछ बंदियों की रिहाई के मामले में पुलिस की रिपोर्ट अच्छी नहीं है। इन बंदियों की समय पूर्व रिहाई से समाज को खतरा उत्पन्न हो सकता है। श्री जावलकर ने यह भी कहा कि शासन आम चुनाव में व्यस्त है और उसे इस मामले में कम से कम दो सप्ताह का समय दिया जाये।
अदालत ने अधिकारियों की गुहार को दरकिनार कर दिया। इस मामले में दो बार सुनवाई स्थगित की गयी और शासन को इस मामले में निर्णय लेने का समय दिया गया लेकिन शासन की ओर से हर बार समय की मांग की गयी। अदालत ने अंत में सरकार को निर्देश दिये कि वह 167 बंदियों के प्रत्यावेदन पर आज शाम तक निर्णय करे और सुबह अदालत खुलने पर रिपोर्ट पेश करे।

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