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बिजली की आंख मिचौली से उपभोक्ता त्रस्त, जिम्मेदार मौन

छह से आठ घंटे तक हो रही अघोषित विद्युत कटौती।

संवाददाता।गौरवशाली भारत

कर्नलगंज,गोण्डा। भीषण गर्मी में लोगों को अघोषित विद्युत कटौती रुला रही है। गांवों में विद्युत आपूर्ति बदहाल होने के साथ ही कस्बे में भी सुचारू रूप से निर्धारित विद्युत आपूर्ति नहीं की जा रही है। यहाँ मरम्मत के नाम पर छह से आठ घंटे तक मनमानी विद्युत कटौती की जा रही है। बिजली की आंख मिचौली से उपभोक्ता काफी त्रस्त हैं वहीं जिम्मेदार मौन साधे हुए हैं। बता दें कि एक ओर जहां गर्मी बढ़ रही है,वहीं दूसरी ओर विद्युत कटौती ने भी लोगों को जीना दुश्वार कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की दशा अभी से खराब होने लगी है। गांव में बिजली आने का कोई समय नहीं है। अधिकांश समय लोकल फाल्ट के चलते खराबी बनी ही रहती है। चुनाव में जहां तमाम नेता लंबे चौड़े वादे कर रहे हैं,वहीं बिजली समस्या को दुरूस्त करने की

कोई भी जरूरत नहीं समझी जा रही है। शहरी क्षेत्र में केबल बदलने के नाम पर छह से आठ घंटे की कटौती की जा रही है। गौरतलब हो कि इन दिनों जिले का तापमान 40 डिग्री के आसपास पहुंच रहा है। बढ़ रही गर्मी में बिजली की मांग भी बढ़ गई है,लेकिन बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही विद्युत आपूर्ति की समस्या लोगों के सामने बढ़ती जा रही है। गांवों में बिजली कुछ घंटे ही पहुंच रही है। वह भी उसके आने और जाने का कोई समय भी निश्चित नहीं है। वहीं इन दिनों तेज हवाओं के चलते अक्सर विद्युत तार आपस में शार्ट हो जाने के कारण फीडर बंद हो जाते हैं।

यह फीडर घंटों बंद पड़े रहते हैं,लेकिन इनकी कोई सुधि लेने वाला नहीं है। सरकार करोड़ों रुपए प्रतिवर्ष विद्युत आपूर्ति की बेहतर व्यवस्था में लगाने की बात कह रही है। लेकिन इसका लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है। अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में इतनी विद्युत नहीं आती है कि लोगों के इनवर्टर तक चार्ज हो सके। गर्मी के मौसम में तेज हवाएं आंधी चलने से अक्सर विद्युत तार व पोल टूट जाते हैं जो सप्ताह भर पड़े रहते हैं। सरकार भले ही बेहतर विद्युत व्यवस्था के लिए तमाम कागजी दावे क्यों ना कर रही हो लेकिन धरातल पर जनता को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

यही नहीं चुनाव में भी प्रत्याशी अनेकों प्रकार की घोषणाएं कर रहे हैं। अभी भी क्षेत्र में बिजली व्यवस्था सुधारने को लेकर किसी जनप्रतिनिधि द्वारा कोई ठोस कदम उठाए नहीं गए हैं। हालांकि जनप्रतिनिधि अपनी निधियों का तमाम पैसा विद्युत व्यवस्थाओं के सुधार में खर्च कर रहे हैं। इस पैसे का उपयोग होने के बाद जनता को कितनी सुविधा मिल रही है। इसको देखने वाला कोई नहीं है। नतीजतन ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की स्थिति बहुत ही दयनीय है। इसी के साथ ही शहरों में भी खपत बढ़ने के साथ कई घंटो तक विद्युत आपूर्ति बाधित हो जाती है। खास बात यह है कि कोई भी जिम्मेदार अधिकारी यह भी बताने को तैयार नहीं होता है कि बिजली किस समय आएगी। फिलहाल गर्मी के साथ ही विद्युत समस्या भी दिनों दिन बढ़ती 

जा रही है।

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