चंडीगढ़ : चंडीगढ़ कॉंग्रेस ने पंजाब चुनाव आयोग की तरफ से किसानों को भाजपा उम्मीदवारों का विरोध करने से रोकने का हालिया ‘निर्देश’ किसानों के संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ और पक्षपातपूर्ण आचरण का उदाहरण है।
चंडीगढ़ काँग्रेस प्रवक्ता राजीव शर्मा ने यहाँ जारी एक बयान में कहा कि भाजपा-नीत केंद्र सरकार की मनमानी का शिकार हुये किसानों को सरकार के प्रतिनिधियों के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त करने और शांतिपूर्वक विरोध करने का अधिकार है। यह अजीब बात है कि एक ऐसे देश में शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का हनन किया जा रहा है, जिसने शक्तिशाली ब्रिटिश शासन के खिलाफ ऐसे ही विरोध प्रदर्शनों के कारण अपनी स्वतंत्रता हासिल की थी।
उल्लेखनीय है कि पंजाब में भाजपा प्रत्याशियों को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हाल में चुनाव आयोग की पंजाब इकाई ने किसानों से ऐसा न करने का निर्देश दिया था और प्रशासनिक अधिकारियों को भी निर्देश दिया था कि सभी प्रत्याशियों को ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ मुहैया कराई जाये और भाजपा प्रत्याशियों को सुरक्षा मुहैया कराई जाये।
श्री शर्मा ने इसी के साथ आम चुनावों में मतदान के आंकड़ों में बड़े उतार-चढ़ाव पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है और भारत के चुनाव आयोग से अपनी वेबसाइट पर फॉर्म 17 सी के भाग एक में निहित मतदान के प्रमाणित रिकॉर्ड का तुरंत खुलासा करने का आग्रह किया। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि “चुनाव संचालन के नियमों” के नियम 49 एस के अनुसार, पीठासीन अधिकारी को फॉर्म 17 सी के भाग एक में दर्ज वोटों का लेखा-जोखा तैयार करना होता है और इसकी एक प्रमाणित प्रति प्रत्येक पोलिंग एजेंट को मतदान समाप्त होने के तुरन्त बाद देनी होती है।
श्री शर्मा ने कहा कि चुनाव के पहले चरण के लिये चुनाव आयोग ने मतदान के दिन, 19 अप्रैल को जारी अपने प्रेस नोट में कहा कि शाम 7 बजे तक अनुमानित मतदान 60 प्रतिशत से कुछ अधिक था, लेकिन 11 दिन बाद 30 अप्रैल को आयोग द्वारा प्रकाशित मतदान के आंकड़ों को 66.14 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया।
पंजाब चुनाव आयोग का किसानों को ‘निर्देश’ पक्षपातपूर्ण
