अहमदाबाद : बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिये महाराष्ट्र में कंस्ट्रक्शन साइट और उसके आसपास की संरचनाओं और सर्विस यूटिलिटीज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हाइली सेंसिटिव भू-तकनीकी मॉनिटरिंग उपकरण लगाये जा रहे हैं। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) की ओर से सोमवार को यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार विभिन्न प्रकार के भू-तकनीकी उपकरण जैसे इनक्लिनोमीटर, वाइब्रेशन मॉनिटर, ग्राउंड सेटलमेंट मार्कर, टिल्ट मीटर आदि को टिल्ट, सेटलमेंट, वाइब्रेशन, क्रैक्स और डिफ़ॉर्मेशन की मॉनिटरिंग के लिये कंस्ट्रक्शन साइट और उसके आसपास लगाये गये हैं। ये उपकरण यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि सुरंग निर्माण कार्य को और न ही साइट के आस-पास की संरचनाओं को कोई खतरा हो।
उन्होंने बताया कि गतिविधियों को रिकॉर्ड और मॉनिटरिंग करने के लिये भू-तकनीकी उपकरण अपने संबंधित मॉड्यूल से जोड़े गये हैं। इससे संभावित जोखिमों की समय पर पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी, जिससे उन्हें कम करने के लिए ससमय हस्तक्षेप करना संभव हो सकेगा। धूल और ध्वनि को नियंत्रण में रखने के लिये, सुरंग साइट पर मॉनिटर लगाये गये हैं। इससे वायु और ध्वनि प्रदूषण को तय सीमा तक रखने में मदद मिलती है।
महाराष्ट्र में मुंबई और ठाणे जिलों में बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के 21 किमी लंबे भूमिगत हिस्से के लिये निर्माण गतिविधियां प्रगति पर हैं। कार्यों में बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में लगभग एक किमी लंबे और 32 मीटर गहरे (लगभग 10 मंजिला इनवर्टेड बिल्डिंग) भूमिगत बुलेट ट्रेन स्टेशन के लिए खुदाई, सुरंग निर्माण कार्यों के लिए शाफ्ट और पोर्टल का निर्माण शामिल है।
तीन मेगा टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) को 16 किमी सुरंग निर्माण कार्य के लिये उपयोग किया जायेगा, जिसमें समुद्र के नीचे सात किमी लम्बी सुरंग शामिल है और शेष पांच किमी सुरंग न्यू ऑस्ट्रियाई टनलिंग विधि का उपयोग करके बनायी जायेगी। सुरंग की गहराई 25 मीटर से 57 मीटर तक होगी। टनल बोरिंग मशीनों को नीचे उतारने के लिये तीन शाफ्ट, एक एडीआईटी और एक पोर्टल का निर्माण किया जा रहा है।
ऐसे भूमिगत मेगास्ट्रक्चर के निर्माण के लिये कंस्ट्रक्शन साइट, जमीन के ऊपर और नीचे के आसपास की संरचनाओं की सुरक्षा की आवश्यकता होती है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को कम से कम असुविधा हो।
बुलेट ट्रेन परियोजना के लिये लगे भू-तकनीकी मॉनिटरिंग उपकरण
