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‘राजधानी में आवारा कुत्तों की समस्या बन रही है चुनावी मुद्दा’

नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कई आवासीय सोसाइटी और बस्तियों में कुत्तों के काटने की बढ़ रही घटनाओं से चिंतित कुछ प्रबुद्ध नागरिकों ने चुनाव के इस माहौल में राजनीतिक दलों का ध्यान आवारा कुत्तों की समस्या की ओर आकृष्ट किया है। दिल्ली में बसन्त कुंज गंगा, यमुना, नर्मदा और सरस्वती आवास की रेजीडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों और लगभग 500 स्थानीय रेजीडेंट ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा को एक पत्र भेजकर कहा है, “ पार्किंग स्थल, पार्क, सीढियां और टेरेस सभी जगह पर मौजूद आवारा कुत्तों के काटने की घटनायें लगातार बढ़ रही हैं, जिसके कारण समाज में भय का माहौल है। बुजुर्ग और बच्चे बाहर जाने से कतराते हैं। ”
पत्र लिखने वालों ने कहा है, “ हम उसी पार्टी का समर्थन करेंगे, जो उन्हें आवारा कुत्तों से निजात दिलाने का वादा करेगी। ”
इन कालोनियों के निवासियों ने कहा कि भाजपा सांसद मेनका गांधी द्वारा संचालित एनजीओ ‘पीपल्स फॉर एनिमल्स के एक्टिविस्ट्स’ द्वारा कुत्तों को पोषित किया जाता है। ये कार्यकर्ता सरकारी कानूनों की परवाह किये बिना ही आवारा कुत्तों को घनी आबादी के क्षेत्रों में फीड करते हैं और अनेक जगह पर पानी तथा खाने के बर्तन रख देते हैं, जिससे कुत्ते घनी आबादी में रहना शुरू कर देते हैं। उन्होंने कहा कि अगर लोग इन गतिविधियों पर आपत्ति जताते हैं तो कुत्तों को पोषित करने वाले एनजीओ के लोग कानूनी कार्रवाई की धमकियां देना शुरू कर देते हैं, जिससे समाज में भय और डर का महौल पैदा हो जाता है।
समाज के पीड़ित वर्गों ने पत्र में लिखा कि कुछ कार्यकर्ता फ्लैट के बाहर ही कुत्तों को फीड कराना शुरू कर देते हैं, जब कोई इसका विरोध करता है, तो वह नागरिक को लीगल नोटिस भेजते हैं और उनके खिलाफ थाने में फर्जी शिकायत दर्ज करवाते हैं। इससे अलावा वे पुलिस पर पीड़ित नागरिक को गिरफ्तार करने का दबाव बनाते हैं।
नागरिकों ने एनजीओ कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाया है कि वे आवारा कुत्तों की सेवा के नाम पर कमाई करते हैं और कुत्तों की उनकी सेवा महज दिखावा है। नागरिकों ने पत्र में अनुरोध किया कि इन परिस्थितियों के मद्देनज़र कुत्तों के बढ़ते आतंक को चुनावी मुद्दों में शामिल करके पार्टी का दृष्टिकोण स्पष्ट किया जाये।

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