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कभी सूखा था फुलंब्री की पहचान, अब वॉटर एटीएम से जिंदगी हुई खुशहाल

  • फुलंब्री के लिए वरदान साबित हुए ‘वॉटर एटीएम’
  • जल संकट से जूझ रहे फुलंब्री निवासियों की जिंदगी में आया सकारात्मक बदलाव
  • फुलंब्री में लगे वॉटर एटीएम

औरंगाबाद : महाराष्ट्र में जल संकट की समस्या जगजाहिर है। विशेष रूप से औरंगाबाद जिला (अब छत्रपति संभाजी नगर) जल संकट से उपजी चुनौतियों से पूरी तरह जकड़ा हुआ था। यहां के फुलंब्री ब्लॉक की तो पहचान ही सूखे के कारण थी। दैनिक उपयोग के लिए भी गांव वालों को 20 लीटर बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता था। सबसे बुरी हालत तो उन गरीब परिवारों की थीं, जिनके पास कुएं का दूषित पानी पीना ही एकमात्र विकल्प था। लेकिन अब फुलंब्री सूखे के कारण नहीं जाना जाता। फुलंब्री के लोगों को पानी की किल्लत से मुक्ति मिल गई। अब बोतल बंद पानी भी नहीं खरीदना पड़ता। फुलंब्री में इस सकारात्मक बदलाव के वाहक बने हैं आनंदना-कोका कोला इंडिया फाउंडेशन और एम एस सहगल फाउंडेशन। इन संस्थानों ने मिलकर फुलंब्री ब्लॉक के वानेगांव, वावना, बबरा और डोंगरगांव कवाड गांवों में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के साथ ही प्रभावी जल प्रबंधन भी सुनिश्चित किया।

वॉटर एटीएम लगाए गए
आनंदना-कोका कोला इंडिया फाउंडेशन और एम एस सहगल फाउंडेशन की संयुक्त पहल से क्षेत्र में वॉटर एटीएम लगाए गए। ये वॉटर एटीएम आरओ और यूएफ युक्त हैं। इससे ग्रामीणों को अपने गांवों में ही काफी कम दरों पर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हुआ। वॉटर एटीएम के पानी का ना केवल प्रत्येक महीने बल्कि हर तीन महीने बाद परीक्षण किया जाता है। इसके अपशिष्ट जल को भी संग्रहित किया जाता है। जिसका उपयोग कपड़े धोने सरीखे कामों के लिए किया जाता है।

बीमारियों में आई कमी
वॉटर एटीएम से ग्रामीणों की जिंदगी खुशहाल हुई है। खासतौर पर महिलाओं और बच्चों में दस्त जैसी जलजनित बीमारियों में कमी आई है। इससे चिकित्सा, दवाईयों पर होने वाले खर्च बचा, जिससे गांव वालों की आर्थिक बचत हो रही है। इसका उपयोग वे अन्य आर्थिक गतिविधियों में निवेश के रूप में करके जीवन स्तर को सुधार सकते हैं। गांव के प्रत्येक व्यक्ति तक शुद्ध पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की मदद ली जा रही है। इन वाहनों की मदद से वॉटर एटीएम का पानी बुजुर्गों, दिव्यांग, समेत कमजोर तबके के घर तक पहुंचाया जा रहा है।
आनंदना-कोका कोला इंडिया फाउंडेशन के निदेशक राजीव गुप्ता कहते हैं कि हम समुदायों की ना केवल सेवा करते हैं बल्कि उनके गुणवत्तापूर्ण जीवन के प्रति भी प्रतिबद्ध है। सुरक्षित पेयजल को किफायती दरों पर उपलब्ध कराकर और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करके, हम एक सकारात्मक और स्थायी प्रभाव बनाने में सफल रहे हैं।

जल प्रबंधन समितियों का गठन
वॉटर एटीएम के साथ ही जल प्रबंधन की दिशा में भी कारगर कदम उठाए गए हैं। प्रत्येक गांवों में जल प्रबंधन समितियों का गठन किया गया है। ये समितियां संचालन की निगरानी के साथ ही जल साक्षरता, सूचना, शिक्षा और संचार सरीखे दायित्वों का भी निर्वाहन कर रही हैं।

गांवों में बैठकों के जरिए जल संरक्षण की अलख जगाई जा रही है। यही नहीं, इस प्रोजेक्ट के जरिए स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं। एक ऑपरेटर दैनिक संचालन का प्रबंधन करता है। पंचायतें (ग्राम परिषदें) दैनिक संचालन का प्रबंधन करने के साथ लाभ भी कमा सकती हैं, जिससे परियोजना की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित होती है।

एस एम सहगल फाउंडेशन की ट्रस्टी और सीईओ अंजलि मखीजा कहतीं हैं कि आनंदना के साथ साझेदारी से हम जल सुरक्षा के सर्वाधिक महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक को हल करने के लिए कम्यूनिटी डेवलपमेंट में सफल हुए। साथ में, हमने गांवों में पेयजल की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक सामुदायिक-स्तरीय प्रणाली बनाई है जिसे अन्य क्षेत्रों में भी दोहराया जा सकता है।

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