नई दिल्ली : सरकार ने बुधवार को दो टूक शब्दों में कहा कि विपक्ष को विधिसम्मत ढंग से हर मुद्दे पर चर्चा करने का पूरा पूरा मौका दिया जायेगा लेकिन उसे किसी भी बहाने से संसद को ठप करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल एवं एल. मुरुगन के साथ यहां संसद भवन में एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही। अठारहवीं लोकसभा के पहले सत्र में सत्तापक्ष एवं विपक्ष के बीच टकराव के बारे में एक सवाल के जवाब में श्री रिजिजू ने कहा कि हमने पहले भी कहा है कि हम संविधान, नियमों एवं परंपराओं से बंधे हैं और इन्हीं के आधार पर संसद के दोनों सदन और देश चलायेंगे।
उन्होंने कहा, “विपक्ष अगर सकारात्मक भूमिका निभाता है, तो अच्छी बात है। एक दूसरे की बात की आलोचना होती है, तो अच्छी बात है। पर सदन नहीं चलने देंगे, यह नहीं हो सकता। क्योंकि देश की सेवा करनी है, तो संसद काे बंद नहीं कर सकते हैं। जबरदस्ती रोकने की कोशिश हो नहीं सकती है। ”
श्री रिजिजू ने कहा, “ आपको विपक्ष में हमने नहीं, देश की जनता ने बिठाया है। यह हमारी मर्ज़ी से नहीं हुआ है।” उन्होंने कहा कि इसलिये आप हमारे साथ अपनी भावना के लिये जनता की मर्ज़ी के विरुद्ध नहीं जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह नियमों एवं परंपराओं के मुताबिक काम करने के लिये किसी के साथ भी मिलने और बात करने के लिये तैयार हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि किसी भी को भी उसके परिवार के आधार पर विशेष तरजीह नहीं दी जा सकती है, संसद में हर सदस्य बराबर है।
यह पूछे जाने पर कि संसद के शांतिपूर्ण संचालन के लिये क्या वह श्री राहुल गांधी से भी मिलेंगे, श्री रिजिजू ने कहा कि निजी तौर पर सत्तापक्ष में किसी को विपक्ष के किसी नेता से कोई समस्या या दिक्कत नहीं है, लेकिन जो परंपरा एवं प्रथा को तोड़ने का काम किया गया है, उसी की निंदा की गयी है। संसद के सुचारु रूप से संचालन के लिये जो भी लोग चुन कर आये हैं, उन सभी से मिलना और बात करना उनका कर्तव्य है।
एक सवाल पर श्री मेघवाल ने कहा कि विपक्ष में संसद को बाधित करने के मुद्दे पर मतभेद हैं, मंगलवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री के जवाब के दौरान कांग्रेस के सदस्य आसन के इर्दगिर्द आ गये थे, लेकिन तृणमूल कांग्रेस एवं समाजवादी पार्टी के सदस्य नहीं आये थे।
सदन में श्री गांधी के कथन के सत्यापन एवं कार्रवाई के नियम के बारे में पूछे जाने पर श्री रिजीजू ने कहा कि नियम संख्या 115 के अनुसार श्री गांधी को एक नोटिस देकर पूछा जायेगा कि किन परिस्थितियों में उन्होंने सदन को गुमराह किया है। यदि वह जवाब देने में विफल रहते हैं तो अध्यक्ष इस मामले को विशेषाधिकार समिति के पास विचारार्थ भेज देंगे।
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) परीक्षा के बारे में विपक्ष की चर्चा की मांग के बारे में पूछे जाने पर श्री रिजिजू ने कहा कि राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस को चार घंटे 45 मिनट का समय मिला था। जब समय दिया तब कांग्रेस के सदस्यों ने इस पर चर्चा नहीं की। प्रधानमंत्री ने दोनों सदनों में जोर देकर कहा है कि सरकार बहुत कठोर कदम उठा रही है और आगे भी कार्रवाई करेगी।
उन्होंने कहा कि जो लोग सुबह से लेकर रात तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गाली देते हैं, वही कहते हैं कि देश में बोलने की आज़ादी नहीं है। उन्होंने कहा कि नये सांसद आये हैं और वे सदन में चर्चा को सुनना और भाग लेना चाहते हैं। नये सांसद एक दो सत्रों में पुराने सदस्यों को देख कर सीखते हैं, लेकिन कांग्रेस उन्हें हंगामा करना सिखा रही है। इससे देश की संसदीय परंपरा को नुकसान पहुंच रहा है।
संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि देश को नुकसान करने वाला आख्यान नहीं चलेगा। एक दिन अखबारों की सुर्खियों में उनकी हरकतें छप सकतीं हैं, लेकिन देश इसे स्वीकार नहीं करेगा। सदन बाधित होने से छोटी पार्टियों के सांसद बहुत दुखी होते हैं।
सांसदों के शपथ लेते समय एक सांसद द्वारा फिलिस्तीन के समर्थन में नारे लगाने के बारे में जिक्र किये जाने पर श्री रिजिजू ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने इसके लिये एक समिति का गठन किया है। वह समिति नियम बनायेगी कि शपथ ग्रहण विधि में कोई राजनीतिक नारेबाजी आदि करने की इजाज़त नहीं दी जाये। उन्होंने कहा कि सख्त नियम बनाये जायेंगे, भविष्य में कोई उसका उल्लंघन नहीं कर सकेगा।
संसद को बाधित करने की इजाज़त नहीं दी जायेगी
