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ओबीसी आरक्षण पर महाराष्ट्र चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

C JUDGEMENT ON RESERVE CAT

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की अनुमति देने के वास्ते स्थानीय निकायों के 367 सीटों के पुनर्निर्धारण के लिए महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग को फटकार लगाई तथा अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दी। न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति सी. टी. रविकुमार की पीठ ने राज्य चुनाव आयोग को 367 स्थानीय निकायों के चुनाव कार्यक्रम को फिर से अधिसूचित नहीं करने का निर्देश दिया। पीठ ने स्पष्ट संकेत दिया कि शीर्ष अदालत के आदेश के उल्लंघन करने पर इस मामले में अवमानना ​​​​कार्रवाई शुरू की जा सकती है। न्यायमूर्ति खानविलकर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने राज्य चुनाव आयोग से अदालत के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि मई में जारी की गई अधिसूचना बरकरार रहेगी।

पीठ ने राज्य सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील शेखर नफड़े से कहा, “यह स्वीकार्य नहीं कि आप अपनी सुविधा के लिए हमारे आदेश को (शायद किसी के इशारे पर) गलत तरीके से पढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। क्या आप चाहते हैं कि हम अवमानना ​​नोटिस जारी करें?” शीर्ष अदालत ने अपने पिछले आदेश की ओर संकेत करते हुए स्पष्ट किया कि 367 स्थानीय निकायों के चुनाव को मई के आदेश के तहत अधिसूचित किया जाना था। कई आदेशों में इस स्थिति को अस्पष्ट तौर पर बताया गया था। राज्य चुनाव आयोग ओबीसी आरक्षण की अनुमति देने के लिए स्थानीय निकायों के 367 सीटों के चुनाव कार्यक्रम को फिर से अधिसूचित नहीं कर सकता। शेखर नफड़े ने दलील देते हुए कहा था कि राज्य चुनाव आयोग के हलफनामे में कहा गया है कि दो नगर पालिकाओं के लिए चुनाव टाल दिया गया था। इस पर पीठ ने आयोग से कहा कि उस चुनाव में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है, जिसे पहले ही अधिसूचित किया जा चुका है। उसने कहा कि ज्यादा से ज्यादा चुनाव की तारीखों में बदलाव किया सकता है।

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