कोलकाता : कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सरकारी स्कूलों में प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति में कथित अनियमितता के मामले की केन्द्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) से जांच कराने के संबंध में एकल पीठ के 21 जून के आदेश को बरकरार रखा।
न्यायमूर्ति सुब्रत तालुकदार और न्यायमूर्ति लपिता बनर्जी की युगलपीठ ने एकल पीठ के 21 जून के आदेश को बरकरार रखते हुए यह भी निर्देश दिया कि जांच की निगरानी एकल पीठ द्वारा ही की जाएगी। इससे पहले न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय की एकलपीठ ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक माणिक भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश दिया था। पलाशीपाड़ा के विधायक भट्टाचार्य पर फर्जी दस्तावेज जमा करने का आरोप लगाया गया है।
युगलपीठ ने यह भी आदेश दिया है कि मामले में पैसा कहां कहां गया ‘मनी ट्रेल’ की भी जांच कराई जाए।
युगलपीठ का यह आदेश राज्य सरकार के प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के एकल पीठ के आदेश के खिलाफ अपील करने के बाद आया है। एकल पीठ ने अपने आदेश में तृणमूल कांग्रेस विधायक को प्राथमिक शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था।
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक शुरुआती भर्ती में उन पर भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप लगे थे। अदालत ने कहा कि 2014 की प्राथमिक शिक्षक भर्ती से जुड़े कई दस्तावेज मांगे गए थे लेकिन बोर्ड ने दस्तावेज जमा नहीं किए और अदालत को गुमराह किया।
अदालत ने कहा कि 2018 के बजाय 2022 के दस्तावेज जमा किए गए हैं और बोर्ड के अध्यक्ष को इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार माना जाता है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शिक्षकों की भर्ती मामले में सीबीआई जांच के फैसले को रखा बरकरार
