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केजरीवाल सरकार प्रदूषण पर काबू पाने में नाकामयाब: बिधूड़ी

•पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सुधारे बिना प्रदूषण पर काबू पाना संभव नहीं
•दिल्ली की बदहाल सड़कें बढ़ा रही हैं प्रदूषण, सरकार को सुध नहीं

नई दिल्ली : दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा है कि दिल्ली सरकार राजधानी में प्रदूषण पर नियंत्रण करने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं कर रही। यही वजह है कि इस साल दिल्ली के लोगों को एक भी ऐसा दिन नसीब नहीं हुआ जब उन्हें सांस लेने के लिए अच्छी हवा मिली हो। पिछले पांच सालों में इस साल सबसे ज्यादा प्रदूषित दिन रहे हैं।

बिधूड़ी ने कहा है कि दिल्ली सरकार सिर्फ कागजों पर ही प्रदूषण पर नियंत्रण के कार्यक्रम चलाती है और यही वजह है कि जमीनी हकीकत हर बार सरकार को गलत साबित करती है। दिल्ली में जब तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सुधार नहीं किया जाएगा और सड़कों का रखरखाव नहीं किया जाएगा, तब तक प्रदूषण पर काबू पाना असंभव है।

उन्होंने कहा कि पिछले सात सालों में दिल्ली में डीटीसी की एक भी नई बस नहीं खरीदी गई जिसका नतीजा यह है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट की स्थिति बहुत खराब हो गई है। दिल्ली में हाल ही में जो इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर आई हैं, वे भी केंद्र सरकार ने ही दी हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुलभ न होने के कारण लोगों को अपनी कारें या टू व्हीलर सड़कों पर लाने पड़े हैं जिसका सीधा असर प्रदूषण पर पड़ता है। यही वजह है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार इस बार पहली जनवरी से 5 सितंबर के बीच दिल्ली में एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब लोगों को अच्छी हवा में सांस लेने का मौका मिला हो। पिछले पांच सालों में यह सबसे ज्यादा है।

बिधूड़ी ने कहा कि प्रदूषण की दूसरी बड़ी वजह सड़कों पर उड़ने वाली धूल है और वह धूल इसलिए ज्यादा उड़ रही है कि केजरीवाल सरकार के मॉडल में सड़कें बनाना या उनकी मरम्मत करना विकास की श्रेणी में नहीं आता। यही कारण है कि दिल्ली की सड़कों के बखिए उधड़े हुए हैं और हर जगह धूल के गुबार नजर आते हैं। स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा है कि दिल्ली में पीएम-10 और पीएम-2.5 सबसे ज्यादा है जो कि धूल के कारण है।

बिधूड़ी ने कहा कि अब दिल्ली सरकार की पोल पूरी तरह खुल चुकी है कि वह हर समस्या की तरह प्रदूषण पर भी काबू पाने में निष्फल हो चुकी है।

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