झुंझुनू : राजस्थान के झुंझुनू में अपर सैशन न्यायाधीश संख्या एक सोनिया बेनीवाल ने आज निर्णय में दहेज के लिए अपनी पत्नी की हत्या करने के आरोपी पति एवं ससुर को आजीवन कारावास सी सजा सुनाई। मामले के अनुसार छह अगस्त 2017 को शबनम बानो पत्नी बशीर रहमानी निवासी झुंझुनू ने झुंझुनू कोतवाली में एक रिपोर्ट दी कि उसकी पुत्री मेहरूनिशा का निकाह 24 जनवरी 2016 को जुबेर पुत्र फारूक के साथ समाज में प्रचलित रीति रिवाज के साथ हुआ था। निकाह के समय हमने हमारी बेटी को काफी सामान दहेज के रूप में दिया था।
चार अगस्त 2017 को दोपहर को उसकी लडक़ी को टेलीफोन आया और फोन पर बताया कि उसके साथ उसके पति, सास व ससुर आदि मारपीट कर रहे है और कह रहे है कि अभी अपने पिता से 50 लाख रूपए मंगवा नहीं तो तेरे को जान से मार देंगे। मैंने मेरी लडक़ी से कहा कि बेटी मैं तेरे पिता से कहकर जल्दी से रूपए की व्यवस्था करती हूं। तू तेरे पति व ससुर से मेरी बात करवा तो टेलीफोन पर एक साथ मेरी लडक़ी के पति, ससुर, सास की आवाज आई व मुझे सुनाई दी कि हम तेरी मम्मी से कोई बात नहीं करना चाहते है, और मेरी लडक़ी के हाथ से फोन छीन लिया।
इसके दो-तीन घंटे बाद फोन आया कि तुम्हारी लडक़ी की तबियत ज्यादा खराब हो रही है। उसको अस्पताल ले जा रहे है। तब मेरा पति व लड़क़ा अस्पताल गए तथा अस्पताल में उसकी लड़क़ी को देखा तो चिकित्सक ने बताया कि वह मर चुकी है। यही नहीं उसके बाद उसकी लडक़ी का शव उसके ससुराल वाले ले जाकर उसको दफना दिया। अब उसे पता चला है कि उसकी लडक़ी के ससुराल वालो ने उसकी लडक़ी का बिना शव परिक्षण कराए। उसका शव दफना दिया। अतः उसकी पुत्री मेहररूनिशा का शव कब्रिस्तान से निकलवाकर, पोस्टमार्टम करवा कर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जाए।
पुलिस ने इस रिपोर्ट पर मामला दर्ज जांच शुरू की व मृतका का शव हांडीशाह कब्रिस्तान से बाहर निकलवाकर उसका पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड से करवाया गया तथा बाद जांच पुलिस ने पति जुबेर अली, सास हुस्ना बानो व ससुर फारूक अली के विरूद्ध संबंधित न्यायालय में चालान पेश कर दिया। ट्रायल के दौरान सास हुस्ना बानो की मृत्यु हो गई थी। इस्तगासा पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे राज्य सरकार के सहायक निदेशक अभियोजन कमल किशोर शर्मा व मृतका की तरफ से पैरवी कर रहे गोकुलचंद सैनी ने कुल 15 गवाहान के बयान करवाए तथा 104 दस्तावेज प्रदर्शित करवाए।
सहायक निदेशक कमल किशोर शर्मा व गोकुलचंद सैनी ने न्यायालय में तर्क दिया कि मृतका मेहरूनिशा गर्भवती थी। इसलिए मृतका की मृत्यु के साथ-साथ गर्भ में पल रहे शिशु की भी मृत्यु हो गई। मामला गंभीर किस्म का है। इसलिये दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए। न्यायाधीश ने पत्रावली पर आई साक्ष्य का बारिकी से विशखेषण करते हुए पति जुबेर व ससुर फारूक को आजीवन सजा देने के साथ-साथ एक-एक लाख रूपए का जुर्माना, धारा 315 में पांच-पाचं वर्ष की सजा, धारा 498ए में दो-दो वर्ष, धारा 201 में तीन-तीन वर्ष व धारा 406 में दो-दो वर्ष का और कारावास की सजा सुनाई।
