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पाकिस्तान के साका पंजा साहिब शताब्दी समारोह में भाग लेगा भारतीय सिख जत्था

नयी दिल्ली : भारतीय सिखों का एक जत्था 30 अक्टूबर को पाकिस्तान के रावलपिण्डी से 45 किलोमीटर दूर स्थित पंजा साहिब जी गुरुद्वारा में आयोजित हो रहे साका पंजा साहिब के शताब्दी समारोह में भाग लेगा। दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका ने आज यहां बताया कि कुल 240 भारतीय सिखों का जत्था 28 अक्टूबर को अटारी/वाघा बार्डर पार करके पाकिस्तान जायेगा। इस जत्थे में 40 श्रद्धालू राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से भाग लेंगे। जबकि बाकी 200 सदस्य देश के विभिन्न भागों से सम्मिलित होंगे।
उन्होंने कहा कि यह जत्था 2 नवंबर को स्वदेश वापस आयेगा तथा अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान यह ऐतिहासिक सिख गुरुद्वारों पंजा साहिब, श्री ननकाणा साहिब तथा लाहौर के पवित्र गुरुद्वारों में मात्था टेकेगा। साका पंजा साहिब के बारे में उन्होंने कहा कि अमृतसर में अपनी मांगों के प्रति शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले सिख समुदाय को 30 अक्टूबर 1922 को जब ब्रिटिश अधिकारी दमनकारी नीतियों के अर्न्तगत सुदूर और दूरवर्ती जेलों मे कैद करने के लिए रेलगाड़ी से ले जा रहे थे तो सिख समुदाय को इसके बारे में जानकारी मिलते ही पंजा साहिब के सिख समुदाय ने रेलगाड़ी रोककर निर्दोष सिखों को लंगर प्रदान करने का फैसला किया लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने पंजा साहिब रेलवे स्टेशन पर रेलगाड़ी रोकने से मना कर दिया जिससे सिख समुदाय के लोग रेलवे की पटरी पर बैठ गए तथा कुछ निहत्थे प्रदर्शनकारी रेलगाड़ी की चपेट में आने से शहीद हो गए। इस त्रासदी से लोगाें में गंभीर रोष पैदा हो गया जिससे आज़ादी के आंदोलन को नया बल मिला।
इन शहीदों की याद में विभाजन से पहले पंजा साहिब में 30 अक्टूबर से दो नवंबर तक श्रद्धांजिल देने का कार्यक्रम आयोजित किया जाता था। दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के महासचिव सरदार जगदीप सिंह काहलों ने बताया कि श्रद्धालुओं को बस/रेलगाड़ी से यात्रा करवाई जाएगी जिसका औसतन खर्चा लगभग 6000 रुपये आंका गया है। श्रद्धालुओं के ठहरने/लंगर की व्यवस्था गुरुद्वारों में की जाएगी तथा पाकिस्तान सरकार द्वारा सभी श्रद्धालुओं को अलग से कमरे आवंटित किये जाने हैं।

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