गौरवशाली भारत

देश की उम्मीद ‎‎‎ ‎‎ ‎‎ ‎‎ ‎‎

श्री विठ्ठल भाई पटेल और शहीद भगत सिंह को जन्म जयंती के अवसर पर विधानसभा परिसर में उनको श्रद्दांजलि दी गई

देश के इन महान सपूतों ने अपने विवेक, समर्पण, त्याग और साहस से भारत की स्वाधीनता में अहम भूमिका निभाई : गोयल

नई दिल्ली : विठ्ठल भाई पटेल को उनकी 149वीं जन्म जयन्ती और शहीद भगत सिंह को उनकी 115वीं जन्म जयंती के अवसर पर विधानसभा परिसर में भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी। अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष, समाज कल्याण मंत्री श्री राजेन्द्र पाल गौतम, विधानसभा सचिव, श्री राजकुमार के अलावा कई अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर अध्यक्ष महोदय ने श्री विठ्ठल भाई पटेल को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि विल भाई पटेल केंद्रीय विधानसभा के पहले निर्वाचित भारतीय अध्यक्ष थे।

श्री पटेल प्रख्यात विधानवेत्ता, वक्तृत्वकला के आचार्य और भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के देश-विदेश में प्रचारक, प्रवर्तक थे। वे सरदार वल्लभ भाई पटेल के बड़े भाई थे। गोयल ने आगे कहा की सन 1923 में वे केन्द्रीय विधान परिषद् के लिए चुने गए और 1925 में इसके अध्यक्ष बन गए। उनकी  निष्पक्ष और निर्भीक विचारधारा ने लोगों पर उनके व्यक्तित्व की अमिट छाप छोड़ी। विल भाई संसदीय विधि विधानों के प्रकांड विद्वान थे जिसके कारण सदन में सभी दल उन्हें आदर और सम्मान देते थे  और उनकी दी हुई विद्वत्तापूर्ण व्यवस्था सभी लोगों को मान्य हुआ करती थी।

केंद्रीय विधान सभा के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि विदेशों में भी ख्याति अर्जित की। अध्यक्ष महोदय ने आगे कहा की उन्होंने असहयोग आन्दोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया । वि_ल भाई पटेल ने कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया और चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरु के सहयोग से ‘स्वराज पार्टी की स्थापना की। स्वराज पार्टी का मुख्य उद्देश्य था विधान परिषदों में प्रवेश कर सरकार के काम-काज को बाधित करना।
शहीद भगत सिंह की जन्म जयंती पर उनको श्रद्धांजलि देते हुए अध्यक्ष महोदय ने कहा की भगत सिंह भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी एवं क्रान्तिकारी थे। चन्द्रशेखर आजाद व पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर इन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अभूतपूर्व साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया। लाहौर में बर्नी सैंडर्स की हत्या और उसके बाद दिल्ली की केन्द्रीय संसद (सेण्ट्रल असेम्बली) में बम-विस्फोट करके भगत सिंह ने ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खुला विद्रोह कर दिया था।
श्री गोयल ने आगे कहा की आज़ादी के इस दीवाने ने अंग्रेजों और भारत के लोगों को दिखा दिया कि वह आज़ादी के लिये क्या कर सकते है । भगत सिंह राजगुरु, सुखदेव पर अंग्रेजी हुकूमत ने झूठा मुकदमा चला उन्होंने फांसी की सजा सुनाई लेकिन भारत के इन महान सपूतों ने हंसते हंसते बलिदान दे दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *