मथुरा : उत्तर प्रदेश में पौराणिक महत्व की कान्हा की नगरी मथुरा में बुधवार को विजयादशमी के अवसर पर रावण को पराजित करने की खुशी में राम की पूजा हो रही है वहीं लंकेश रावण की भक्त मंडली त्रिकालदर्शी दशानन की यमुना तलहटी में स्थित शिव मंदिर में पूजा अर्चना कर रही है। अपने तरह के इस अनूठे अवसर पर रावण की महाआरती की गई।
इस कार्यक्रम में पुतला दहन करने की कुप्रथा को तत्काल बंद करने की सरकार से मांग की गई साथ ही लंकेश का मन्दिर बनाने का संकल्प भी व्यक्त किया गया। लंकेश भक्त मण्डल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत ने पूजन कार्यक्रम प्रारंभ होने के पूर्व उपस्थित जन समुदाय के समक्ष को संबोधित करते हुए कहा कि इस कुप्रथा को समाप्त किया जाना चाहिये, क्योंकि इसका न तो पौराणिक महत्व है और न यह व्यवहारिक है।
उन्होंने दलील दी कि सनातन संस्कृति में एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार जीवन में केवल एक बार किया जाता है। इसके अलावा व्यापक पैमाने पर होने वाले पुतला दहन से पर्यावरण प्रदूषण भी होता है। इतना ही नहीं किसी का दहन करने से बच्चों में कुसंस्कार पैदा होते हैं।
उन्होंने कहा कि इस कुप्रथा को समाप्त करने तथा जनमत तैयार करने के लिए लंकेश भक्त मंडल का विस्तार अन्य जिलों में भी किया जाएगा। उनका कहना था कि वे रामलीला सभा के पदाधिकारियों को भी इस बात के लिए राजी करने का प्रयास कर रहे हैं कि वे रामलीला मैदान में लंकेश का भव्य मन्दिर बनवाने के लिए अपनी सहमति दें। उपस्थित जन समुदाय ने दोनों हाथ उठाकर इसमें सहयोग करने का भरोसा दिलाया।
इसके बाद विधि विधान से वैदिक मंत्रों के मध्य लंकेश की पूजा एक घंटे से अधिक समय तक की गई। घंटे, घड़ियाल, शंख की प्रतिध्वनि के मध्य लंकेश की आरती जब की गई तो वातावरण में भक्ति नृत्य करने लगी। प्रसाद वितरण तथा इस कुप्रथा को समाप्त करने के सामूहिक संकल्प के मध्य कार्यक्रम का समापन हुआ।
मथुराः कान्हा की नगरी में हुई त्रिकालदर्शी दशानन की आरती
