नई दिल्ली : केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने आज कहा कि नारियल के महत्व को देखते हुए देश में इसके उत्पादन और उत्पादकता बढाने के हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। श्री तोमर ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में नारियल विकास बोर्ड की ओर से आयोजित किसान सम्मेलन को सम्बोधित करते हुुए कहा कि भारत विश्व में तीसरा बड़ा नारियल उत्पादक देश है और कृषि अर्थव्यवस्था में नारियल का महत्वपूर्ण योगदान है ।
देश में 21 लाख हेक्टेयर में नारियल की खेती की जाती है और इसके उत्पादन में अग्रणी तमिलनाडु में 88 हजार हेक्टेयर में इसकी पैदावार होती है । उन्होंने कहा कि देश में नारियल के 22 प्रकार के प्रसंस्करित उत्पाद तैयार किये जाते हैं । कुल 537 नये प्रसंस्करण इकाइयों को सरकार का समर्थन प्राप्त है जिनमें से 136 तमिलनाडु के हैं । नरियल के प्रसंस्करण को बढावा देने के हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं और इसमें तेजी आयी है ।
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार की किसान हितैषी नीतियों , किसानों के कठोर परीश्रम , बेहतर खाद बीज और दवाओं के बावजूद कृषकों को प्राकृतिक प्रकोप का सामना करना पड़ता है जिससे उन्हें भारी नुकसान होता है । कृषि बीमा योजना के माध्यम से किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई करने का प्रयास किया जाता है। इसके बावजूद किसानों को घाटा होता है । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पिछले आठ साल के दौरान किसानों को एक लाख 22 हजार करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया है ।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अब तक करीब साढे ग्यारह करोड़ किसानों को आर्थिक मदद की गयी है तथा सूक्ष्म सिंचाई योजना का बजट पांच हजार करोड़ रुपये से बढाकर दस हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है । किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत पहले किसानों को पांच छह लाख करोड़ रुपये का कृषि अल्पकालिक रिण दिया जाता था जिसे बढाकर अब 16 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है ।
श्री तोमर ने कहा कि गांवों की आधारभूत कृषि संरचना को मजबूत किया जा रहा है और वहां कोल्ड स्टोरेज और भंडारगृहों के निर्माण के लिए सहायता दी जा रही है । उन्होंने कहा कि राज्यों को केन्द्र सरकार की योजनाओं का भरपूर लाभ लेना चाहिये और उन्हें अपने जरुरत की परियोजनाओं को तैयार कर केन्द्र के पास भेजनी चाहिये जिससे वे अधिक से अधिक लाभ ले सकें ।
उन्होंने कृषि की प्रगति की चर्चा करते हुए कहा कि करोना संकट के दौरान कल कारखानों के पहिये थम गये थे लेकिन केन्द्र तथा राज्य सरकारों ने मिलकर जो फैसले किये उससे फसलों की बम्पर पैदावार हुई और बड़े पैमाने पर सरकारी स्तर पर इसकी खरीद भी की गई ।
