परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और माननीय प्रधानमंत्री भारत नरेन्द्र मोदी की दिव्य भेंट
परमार्थ निकेतन गंगा आरती और अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में सहभाग हेतु किया आंमत्रित
यह परियोजनाओं का शिलान्यास नहीं बल्कि परम्पराओं का भी शिलान्यास है : स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश। भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी अपनी केदारनाथ और बद्रीनाथ यात्रा एवं दिव्य परियोजनाओं के शिलान्यास हेतु उत्तराखंड पधारे। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने माननीय मोदी जी से भेंट कर विश्व विख्यात परमार्थ निकेतन गंगा आरती एवं अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में सहभाग हेतु आमंत्रित किया।
स्वामी जी ने कहा कि माननीय मोदी जी जैसे ही मिले उन्होंने उत्तराखंड की माटी को प्रणाम करते हुये, यहां की वायु और वादियों को स्पर्श किया तो मानो आंखों की पलकें ही नहीं बल्कि हृदय की पलकें भी नम हो गयी।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि हिमालय की सुरम्य वादियों में बसे धाम केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन कर दिव्य परियोजनाओं का शिलान्यास आस्था और व्यवस्था का अद्भुत संगम है। उनके द्वारा आज किया गया शिलान्यास केवल परियोजनाओं का शिलान्यास नहीं है बल्कि परम्पराओं का भी शिलान्यास है इससे परम्परायें बचेगी, पर्यावरण, संस्कृति और आने वाली सम्पत्ति व संतति भी बचेगी।
स्वामी जी ने कहा कि पावन धाम बद्रीनाथ और केदारनाथ में दिव्य व भव्य शिलान्यास को देख कर लगता है उत्तराखंड मोदी जी के हृदय में बसता है। मुझे तो लगता है इस देश की आत्मा तीर्थों में बसती है और तीर्थों की आत्मा मोदी जी के पवित्र हृदय में बसती है। काशी से केदारनाथ और अयोध्या से उज्जैन और वर्ष 2024 आते-आते मुझे तो लगता है हम 24 स्थानों का एक नये रूप में दर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि तीर्थ स्थानों पर इंफ्रास्ट्रचर को बढ़े परन्तु इंट्रास्ट्रचर भी बढ़े ताकि हमारे ऋषियों ने हमें जो विचारों की वैक्सीन दी है उसके माध्यम से हर तरह के वायरस का इलाज सम्भव हो सके।
स्वामी जी ने कहा कि आध्यात्मिक पर्यटन विकसित होने से देश में केवल रोजगार ही नहीं बढ़ेगा बल्कि संस्कारों में भी वृद्धि होगी। इससे देश की सम्पत्ति बढ़ेगी, सम्मत्ति बढ़ेगी और हमारी संतति भी संस्कृति और संस्कारों को समर्पित होगी।
वास्तव में माननीय मोदी जी अध्यात्म रूपी सच्ची सम्पत्ति के संरक्षण हेतु अद्भुत कार्य कर रहे हैं। वे भारत के राष्ट्र ऋषि हैं। ऋषि वही है जो जिनके पास विज़न हो, उनका श्रेष्ठ मिशन हो तथा ऋषि वही है जो अपने लिये नहीं बल्कि सब के लिये जीते हो। ऋषि वही है जो सबका साथ और सबको साथ लेकर पूरे देश के विकास के लिये आगे बढ़े और यही कार्य इस समय हो रहा है। वर्तमान समय में देेश में सांइस के साथ स्पिरिचुअलिटी और ईकोनामी के साथ ईकोलॉजी भी बढ़ रही है।
स्वामी जी ने कहा कि काशी में कॉरीडोर खुलने के बाद वहां के पर्यटन में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुयी है। आंकड़ों के अनुसार 2021 में गोवा में 3 करोड पर्यटक गये और काशी में 10 करोड़ पर्यटक आये। मुझे तो लगता है ऐसा ही उत्तराखंड में भी होने वाला है। माननीय मोदी जी ने उत्तराखंड वासियों को एक अद्भुत अवसर प्रदान किया है। अब उत्तराखंड में योग, आयुर्वेद, अध्यात्म, पीस टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के भी अवसर विकसित होंगे। इस हेतु स्वामी जी ने माननीय मोदी जी को उत्तराखंड वासियों की ओर से साधुवाद दिया।
