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यौन उत्पीड़न मामले में बोला सुप्रीम कोर्ट

पक्षपात की आशंका के चलते केस नहीं कर सकते ट्रांसफर

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि आपराधिक मामलों में मुकदमे को ज्यूडिशियल ऑफिसर के खिलाफ पूर्वाग्रह की आशंका पर ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने पीड़िता द्वारा एक लोकप्रिय मलयालम फिल्म एक्टर से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामले में दायर याचिका को खारिज कर दिया। इसमें पीड़िता ने मामले की सुनवाई को प्रधान सत्र न्यायाधीश, एर्नाकुलम की अदालत से ट्रांसफर करने की मांग की थी। केरल हाई कोर्ट 22 सितंबर को ही उसकी याचिका खारिज कर चुका है।

पीड़िता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आर. बसंत ने आरोप लगाया कि उसके खिलाफ अपराध प्रसिद्ध अभिनेता दिलीप के इशारे पर किया गया। उन्होंने उक्त एक्टर, उसके वकील और न्यायाधीश व उसके पति से संबंधित एक ऑडियो क्लिप को लेकर बात की। जस्टिस अजय रस्तोगी और सीटी रविकुमार की बेंच ने कहा, ”हम जिस तरह की व्यवस्था में हैं, वह अब दूषित हो गई है। किसी भी न्यायाधीश को आपराधिक मामले से जुड़े मामले में कोई दिलचस्पी नहीं है। उसके द्वारा की गई किसी भी टिप्पणी को अभियोजन और अभियुक्त दोनों द्वारा अन्यथा समझा जाता है। ऐसा ही सब ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट में चल रहा है।”

आलोचना का करना पड़ता है सामना
शीर्ष अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों से निपटने वाले न्यायाधीशों, यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट के भी गलियारों में बहुत आलोचना का सामना करना पड़ता है, लेकिन अधीनस्थ न्यायाधीश जबरदस्त डर में रहते हैं। आपराधिक मामलों में, विशेष रूप से जमानत से संबंधित मामलों में, हमारे द्वारा जो भी आदेश पारित किया जाता है, आप जो सुनते हैं उसके बाद गलियारों में क्या कहा जाता है, तो ऐसे में कोई भी न्यायाधीश कोई आदेश पारित नहीं करेगा।”

न्याय की सेवा के लिए काम करते हैं न्यायाधीश
यह कहते हुए कि न्यायाधीश जिम्मेदार हैं और न्याय की सेवा करने के लिए काम करते हैं, बेंच ने कहा, ”हम सभी सद्भाव के साथ काम करते हैं और गलियारों में जो कुछ भी कहा जाता है उसे अपने तक नहीं पहुंचने देते, लेकिन निचली अदालतों के जज बेहद डरे हुए हैं.” बेंच ने कहा कि इस तरह के आरोपों से निपटने के लिए उच्च न्यायालय सबसे अच्छी स्थिति में है और एक बार जब हाई कोर्ट को कोई पूर्वाग्रह नहीं मिला, तो यह इस कोर्ट के कदम उठाने के लिए एक गलत मिसाल कायम करेगा। न्यायाधीशों ने कहा, ”हम सभी जिम्मेदार न्यायाधीश हैं। यदि हम पूर्वाग्रह की आशंका पर मामलों का ट्रांसफर शुरू करते हैं, तो कोई भी न्यायिक अधिकारी काम नहीं कर पाएगा।”

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