सुबह भोर के अर्घ्य के साथ होगा छठ पूजा का समापन
वाराणसी : नारी सशक्तिकरण में पुरुष की सार्थक भूमिका के प्रतीक लोकपर्व डाला छठ पर लाखों आस्थावानों ने रविवार को गंगा तट पर अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को दूध और जल का अर्घ्य दिया। घाटों के सीमित स्थान पर आस्था का ज्वार हिलोरें ले रहा था। बहुत से लोग जल में खड़े होकर अर्घ्य नहीं दे सके, उन्होंने किनारे तक पहुंचने को ही सौभाग्य समझा।
दलदली मिट्टी पर बना लिया नाव से पुल
अस्सी से राजघाट के बीच हर घाट पर लोगों का हुजूम था। अंतर यह था कि हर बार मुख्य मार्ग से अस्सी, दशाश्वमेध या भैसासुर घाट पर उतर कर लोग एक घाट से दूसरे घाटों पर पहुंच जाते थे। इस बार मुख्य मार्ग से दूर वाले घाटों तक पहुंचने के लिए व्रतियों ने गलियों का सहारा लिया। अर्घ्यदान के बाद घाट से सड़क की ओर आने वाले हर गली आस्थावानों से भरी रही। अस्सी घाट से दक्षिण की ओर दूर तक दलदल के सामने गुलाबी कपड़ा लगा कर बैरिकेडिंग कर दी गई थी। बाजवूद इसके जल में जाकर अर्घ्य देने वालों ने बीच का रास्ता खोज लिया। नाविकों के सहयोग से दलदली मिट्टी पर नावें कतार में लगवा दीं। उसे पुल के रूप में इस्तेमाल करते हुए किनारे तक गए।
