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हल्द्वानी रेलवे भूमि पर अतिक्रमण मामला , अंतिम सुनवाई शुरू

नैनीताल : उत्तराखंड उच्च न्यायालय में राज्य के हल्द्वानी में रेलवे की लगभग 29 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण से जुड़े बहुचर्चित मामले में अंतिम सुनवाई शुरू हो गयी है तथा सोमवार को दिन भर चली सुनवाई के दौरान रेलवे, याचिकाकर्ता और दो अतिक्रमणकारियों की ओर से अपने अपने दावे प्रस्तुत किये गये।
न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की अगुवाई में गठित विशेष पीठ ने अतिक्रमणकारियों की ओर से दायर संशोधित प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। अतिक्रमणकारी शमीम बानो की ओर से लोक परिसर (बेदखली) अधिनियम (पीपी एक्ट) के सवाल पर संशोधित प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था। प्रार्थना पत्र में पीपी एक्ट के प्रावधानों को स्पष्ट करने की मांग की गयी थी।
न्यायालय ने प्रार्थना पत्र को खारिज करते हुए कहा कि अतिक्रमणकारियों की ओर से जनहित याचिका के जवाब में कहा गया था कि उन पर पीपी एक्ट लागू नहीं होता है। इसलिये यहां पीपी एक्ट का सवाल उठाना सही नहीं है।
दूसरी ओर न्यायालय ने इस पूरे प्रकरण में आज से अंतिम सुनवाई शुरू कर दी। आज दिन भर सुनवाई के दौरान रेलवे, याचिकाकर्ता और दो अतिक्रमणकारियों की ओर से इस मामले में अपना पक्ष रखा गया। अब इस मामले में कल भी सुनवाई होगी।
हल्द्वानी निवासी रवि शंकर जोशी की ओर से जनहित याचिका के माध्यम से इस मामले को इसी साल उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी है। उच्च न्यायालय की ओर से इससे पूर्व सन् 2016 में रेलवे को 29 एकड़ भूमि से 4365 अतिक्रमणकारियों को हटाने के निर्देश दिये गये थे। अदालत की ओर से हटाने से पूर्व पीपी एक्ट के प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिये गये थे।
श्री जोशी की ओर से इसी साल दायर जनहित याचिका में कहा गया कि रेलवे की ओर से उच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया गया है। इसी के जवाब में रेलवे की ओर से कहा गया कि 4365 अतिक्रमणकारियों को सुनवाई का मौका दिया गया और सभी को खाली करने के नोटिस जारी कर दिये गये हैं। इसी के बाद अतिक्रमणकारियों की ओर से विभिन्न अतिक्रमणकारियों की ओर से उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा गया है।

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